इज़राइल और हमास के बीच शारम अल-शेख, मिस्र में हुई बातचीत के पश्चात युद्धविराम और बंधकों की रिहाई का समझौता हुआ।समझौता लागू होने के 72 घंटे के भीतर हमास अपने कब्जे से जीवित इज़रायली बंधकों को रिहा करेगा
और इज़राइल भी फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा इज़राइल अपनी सेना को गाजा पट्टी से आंशिक रूप से वापस बुलाएगा और मानवीय सहायता के ट्रक गाजा में भेजे जाएंगे, जिससे वहां के नागरिकों को राहत मिलेगी
समझौते में कुल 48 इज़रायली बंधकों की रिहाई, 250 लंबे समय से बंद फिलिस्तीनी कैदी और युद्ध के दौरान पकड़े गए 1700 फिलिस्तीनियों की रिहाई तय है इस वक्तव्य के अनुसार, भविष्य में कोई पक्ष युद्धविराम को तोड़ेगा नहीं और शांति के सारे बिंदुओं का पालन करेगा।
अमेरिका, मिस्र, कतर और तुर्की इसकी गारंटी देंगे राजनैतिक प्रतिक्रियाएंअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे शांति की दिशा में ऐतिहासिक कदम कहा और उम्मीद जताई कि यह स्थायी शांति ला सकता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल का स्वागत किया, नेतन्याहू को बधाई दी और कहा कि भारत मानवीय सहायता एवं बंधकों की रिहाई का स्वागत करता है
गाजा में मानवीय सहायतायुद्धविराम के साथ ही राहत सामग्री से भरे सैकड़ों ट्रक गाजा में पहुंचना शुरू करेंगे, जिससे भुखमरी और चिकित्सा संकट से जूझ रहे नागरिकों को मदद मिलेगी। वहां के अधिकांश लोग अपने घर खो चुके हैं और तंबुओं में जीवन बिताने को मजबूर हैं
समझौते के चरणतीन चरण वाला यह समझौता पहले बंधकों की रिहाई, फिर इज़रायली सेना की वापसी और अंतिम चरण में मृतकों के शवों की अदल-बदल को लेकर है बंधकों की रिहाई सप्ताहवार होगी—हर सात दिन पर कुछ बंधक छोड़े जाएंगे, जबकि अंतिम सप्ताह में शेष सभी छोड़े जाएंगे चुनौतियां और आगे का रास्तादोनों पक्षों में अभी भी गहरा अविश्वास कायम है
और समझौते की पूर्ण सफलता पर संदेह बना हुआ है क्योंकि अतीत में कई संधियाँ टूट चुकी हैं युद्ध से जर्जर गाजा को पुनर्निर्माण, चिकित्सा सेवाओं की बहाली, और नये प्रशासन की जरूरत है।
समझौते के अनुसार एक अस्थायी प्रशासन बनेगा अमेरिका और मध्यस्थ देशों को निगरानी करनी होगी कि कोई पक्ष समझौते से पीछे न हटे क्षेत्रीय और वैश्विक असरइस समझौते से पश्चिम एशिया की राजनैतिक स्थिति, अमेरिका की मध्यस्थता और भारत-इज़राइल संबंधों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है
वैश्विक स्तर पर अधिकांश देशों ने शांति समझौते का स्वागत किया है, जबकि ईरान जैसी ताकतें अब भी सतर्क हैं निष्कर्षइज़राइल-हमास समझौता इस्राइली और फिलिस्तीनी दोनों के लिए राहत की किरण है।
युद्ध की विभीषिका के बाद पहली बार गाजा में स्थायी शांति की उम्मीद दिखाई दे रही है और बंधकों की रिहाई, मानवीय सहायता तथा क्षेत्र में स्थिरता के लिए यह पहल ऐतिहासिक मानी जा रही है