India-China Border News: अरुणाचल में चीन से कई जगह आमना-सामना, ITBP चीफ ने बताया ड्रोन फोर्स पर क्यों बढ़ा फोकस

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव को लेकर एक बार फिर महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई स्थानों पर आमना-सामना हुआ है और स्थिति अभी भी जारी है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब वह 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

राजस्थान के अलवर में 22 अक्टूबर को ITBP जवानों को संबोधित करते हुए कपूर ने सीमा पर तैनात शौर्य कमांडो टीमों के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने आधुनिक युद्ध में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता का मुकाबला करने के लिए भारत को अपनी युद्ध रणनीति में बदलाव करना होगा।

उनके बयान के बाद भारत-चीन सीमा की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई। विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चीनी सैनिकों के निर्धारित गश्त पैटर्न से अलग जाने पर सीमा की स्थिति समय-समय पर प्रभावित होती है। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ITBP प्रमुख की टिप्पणी किसी एक विशिष्ट घटना के बजाय सीमा पर तैनाती और नियमित परिचालन तैयारियों के संदर्भ में थी।

अरुणाचल प्रदेश में चीन से कहां हुआ आमना-सामना?

ITBP महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अपने संबोधन में कहा कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आए। उन्होंने बताया कि इन परिस्थितियों में ITBP की नई शौर्य कमांडो टीमों ने अच्छा प्रदर्शन किया।

यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सीमा प्रबंधन और गश्त को लेकर लंबे समय से संवेदनशील स्थिति बनी हुई है। अरुणाचल प्रदेश में दुर्गम पहाड़ी इलाके, कठिन मौसम और सीमित संपर्क सुविधाएं सीमा सुरक्षा को और चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।

हालांकि, ITBP प्रमुख ने अपने सार्वजनिक बयान में आमने-सामने आने की घटनाओं के सभी स्थानों, तारीखों और विस्तृत परिस्थितियों की जानकारी नहीं दी। इसलिए किसी खास क्षेत्र में हुई घटना या उसके परिणामों के बारे में बिना आधिकारिक पुष्टि के दावा करना उचित नहीं होगा।

बाद में सरकारी सूत्रों ने भी स्पष्ट किया कि यह बयान सीमा पर नियमित तैनाती और परिचालन तैयारियों के संदर्भ में था, न कि किसी एक विशेष घटना की घोषणा के रूप में।

भारत और चीन के बीच सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। किसी भी क्षेत्र में सैनिकों के आमने-सामने आने की स्थिति में संवाद, निर्धारित प्रक्रियाओं और सैन्य तंत्रों के माध्यम से तनाव को बढ़ने से रोकना जरूरी होता है।

गलवान जैसी स्थिति से निपटने के लिए ड्रोन और शौर्य कमांडो पर जोर

ITBP प्रमुख ने आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उनके अनुसार, चीन ने अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के आधुनिकीकरण और पारंपरिक सैन्य क्षमता पर बड़े पैमाने पर निवेश किया है। ऐसे में भारत को केवल पारंपरिक युद्ध प्रणालियों पर निर्भर रहने के बजाय ड्रोन, एंटी-ड्रोन तकनीक और विशेष प्रशिक्षण को भी मजबूत करना होगा।

उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि आधुनिक संघर्षों में ड्रोन छोटे और बड़े देशों के बीच सैन्य मुकाबले की परिस्थितियों को बदल सकते हैं। ड्रोन से निगरानी, लक्ष्य की पहचान और सामरिक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है। दूसरी ओर, एंटी-ड्रोन प्रणालियां दुश्मन के मानवरहित विमानों से पैदा होने वाले खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

ITBP ने अपनी सीमा इकाइयों में ड्रोन प्लाटून गठित करने की दिशा में कदम उठाए हैं। बल के आधुनिकीकरण में ड्रोन और संबंधित तकनीक को प्राथमिकता दी जा रही है।

कपूर ने गलवान जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य जवानों को कठिन परिस्थितियों में मुकाबले के लिए तैयार करना है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 के अंत तक पूरे बल को इस प्रशिक्षण से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

शौर्य कमांडो टीमों को भी सीमा पर तैनात बटालियनों में मजबूत भूमिका देने की योजना है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त जवान दुर्गम परिस्थितियों में अभियान चलाने और अचानक पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकते हैं।

ITBP चीफ के बयान पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया, चीन सीमा पर क्या है भारत का रुख?

ITBP प्रमुख के बयान के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 अक्टूबर को भारत-चीन सीमा की

स्थिति पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब चीनी सैनिक स्थापित गश्त पैटर्न से अलग जाते हैं,

तब सीमा क्षेत्रों की स्थिति समय-समय पर प्रभावित होती है।

विदेश मंत्रालय ने इस मामले की विशिष्ट परिस्थितियों पर विस्तार से

टिप्पणी करने के बजाय रक्षा मंत्रालय की ओर ध्यान दिलाया। साथ ही कहा कि

भारत और चीन सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने, गलतफहमी से बचने और

स्थिति को बेहतर ढंग से समझने के लिए मौजूदा राजनयिक तथा सैन्य तंत्रों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना

दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए जरूरी है।

इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में जून 2020 का गलवान संघर्ष भी महत्वपूर्ण है।

लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी,

जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे। इस घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों पर गहरा

असर पड़ा और सीमा पर सैन्य तनाव कम करने के लिए कई दौर की बातचीत हुई।

गलवान की घटना ने यह स्पष्ट किया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर

किसी भी टकराव के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसी कारण सीमा पर बेहतर निगरानी,

जवानों का विशेष प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निष्कर्ष: ITBP प्रमुख शत्रुजीत कपूर के बयान ने अरुणाचल प्रदेश में

भारत-चीन सैनिकों के बीच जारी आमने-सामने की स्थितियों और सीमा सुरक्षा की

तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया है। ड्रोन, एंटी-ड्रोन तकनीक और शौर्य कमांडो पर जोर

भारत की बदलती रक्षा रणनीति का हिस्सा है। वहीं, विदेश मंत्रालय ने सीमा पर शांति बनाए रखने और

मौजूदा संवाद तंत्रों के जरिए विवादों को सुलझाने की आवश्यकता दोहराई है।

FAQ: भारत-चीन सीमा और ITBP प्रमुख के बयान से जुड़े सवाल

1. ITBP प्रमुख शत्रुजीत कपूर ने क्या कहा?

उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच

आमना-सामना हुआ है और स्थिति जारी है। उन्होंने शौर्य कमांडो टीमों के प्रदर्शन की सराहना भी की।

2. ITBP प्रमुख कब सेवानिवृत्त होने वाले हैं?

शत्रुजीत कपूर 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनका यह बयान सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले आया।

3. भारत चीन सीमा पर ड्रोन पर जोर क्यों दे रहा है?

ड्रोन निगरानी, जानकारी जुटाने और सामरिक अभियानों में मदद करते हैं।

एंटी-ड्रोन प्रणालियां दुश्मन के ड्रोन से पैदा होने वाले खतरों से निपटने में सहायक होती हैं।

4. विदेश मंत्रालय ने भारत-चीन सीमा पर क्या कहा?

विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीनी सैनिकों के स्थापित गश्त पैटर्न से अलग जाने पर

सीमा की स्थिति समय-समय पर प्रभावित होती है। दोनों देश मौजूदा राजनयिक और

सैन्य तंत्रों के जरिए समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।

5. ITBP का मुख्य काम क्या है?

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी निभाती है।

इसके जवान कठिन हिमालयी क्षेत्रों में तैनात रहते हैं और सीमा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करते हैं।

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