शिक्षामित्र की लाश
महोबा, 4 दिसंबर 2025: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में सघन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान का दबाव अब जानलेवा साबित हो रहा है। श्रीनगर थाना क्षेत्र के पवा गांव में बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया। प्राथमिक विद्यालय पवा में तैनात 50 वर्षीय शिक्षामित्र शंकरलाल राजपूत का शव गांव के पास एक कुएं में मिला। सोमवार शाम से लापता चल रहे शंकरलाल की मौत ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी। परिजनों का आरोप है कि SIR के अत्यधिक काम के बोझ ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया। उनकी दो बेटियां रोते-रोते बेहाल हो गईं और कहा, “पापा काम के दबाव से टूट चुके थे… रात-दिन फॉर्म भरने का टारगेट पूरा न होने पर डांट सुनते थे।”
SIR दबाव में शिक्षामित्र की दर्दनाक मौत: कुएं से मिला शव, आत्महत्या की आशंका
पुलिस के अनुसार, शंकरलाल 17 नवंबर से SIR अभियान में BLO बृजेंद्र सिंह के सहायक के रूप में लगाए गए थे। उन्हें 1344 मतदाताओं का सत्यापन, फॉर्म-6 (नए मतदाता जोड़ना) और फॉर्म-7 (नाम हटाना) भरने का लक्ष्य दिया गया था। दैनिक 100 फॉर्म का प्रेशर इतना था कि वे ठीक से सो भी नहीं पा रहे थे। सोमवार शाम को स्कूल ड्यूटी के बाद SIR के काम में लगे शंकरलाल घर नहीं लौटे। मंगलवार को तलाशी ली गई, लेकिन बुधवार सुबह ग्रामीणों ने कुएं में तैरता शव देखा। पुलिस ने तुरंत पहुंचकर पंचनामा किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
परिजनों ने बताया कि शंकरलाल पिछले 15 दिनों से SIR ड्यूटी में डूबे थे। घर लौटते तो थकान से चूर हो जाते और बेटियों से कहते, “बेटा, ये काम तो जान ले लेगा।” उनकी बड़ी बेटी ने आंसू भरी आंखों से कहा, “पापा रोज रात 2 बजे तक जागते थे। BLO साहब के साथ गांव-गांव घूमते, लेकिन टारगेट न पूरा होने पर फोन पर गालियां सुननी पड़तीं। हमारी मां को भी यही कहते थे कि ये दबाव झेलना मुश्किल है।” छोटी बेटी ने जोड़ा, “पापा हमारी पढ़ाई का ख्याल रखते थे, लेकिन खुद की सेहत भूल गए। SIR ने उनकी जान ले ली।” मृतक के भतीजे बृजेंद्र और जितेंद्र ने भी आरोप लगाया कि क्षमता से अधिक काम और मानसिक तनाव ने यह कदम उठाने पर मजबूर किया।
महोबा में SIR का बढ़ता दबाव: शिक्षक-शिक्षामित्र परेशान, BLO ने स्वीकारा तनाव
प्राथमिक विद्यालय पवा के प्रधानाचार्य नूतन कुमार मिश्रा ने बताया, “SIR के कारण स्टाफ पर अत्यधिक तनाव है। कोई ट्रेनिंग नहीं, बस टारगेट थोप दिया जाता है। जनता की अभद्रता और अधिकारियों की सख्ती से मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ रहा है।” BLO बृजेंद्र सिंह ने कहा, “शंकरलाल मेरे सहायक थे। काम का बोझ बहुत था। अधिकारियों का 100% पूरा करने का दबाव है, लेकिन ग्रामीण सहयोग नहीं कर रहे। फॉर्म वितरण-कलेक्शन में अनर्गल सवाल और गाली-गलौज होती है, जो तनाव बढ़ाती है।”
यह घटना यूपी में SIR से जुड़ी मौतों की बढ़ती संख्या को उजागर करती है। अब तक 10 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं:
- मुरादाबाद: BLO सर्वेश सिंह ने फांसी लगाई, सुसाइड नोट में दबाव का जिक्र।
- बरेली: शिक्षक अजय अग्रवाल की ब्रेन हेमरेज से मौत।
- लखनऊ: शिक्षामित्र विजय कुमार वर्मा की ब्रेन हेमरेज।
- गोंडा: शिक्षक विपिन यादव ने आत्महत्या की।
- फतेहपुर: लेखपाल सुधीर कुमार ने शादी से पहले सुसाइड किया।
- देवरिया: BLO रंजू दुबे की मौत, पति ने टारगेट का आरोप लगाया।
- बांदा: एक अन्य BLO सहायक ने कुएं में कूदकर जान दी।
परिवार का आक्रोश: 1 करोड़ मुआवजा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
शव मिलने के बाद पवा गांव में ग्रामीणों, शिक्षामित्रों और परिजनों ने प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने जिला प्रशासन से 1 करोड़ मुआवजा और दोषी अधिकारियों पर FIR की मांग की। सपा नेता अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर कहा, “SIR से मौत पर सरकार 1 करोड़ दे, हम 2 लाख देंगे। ये अभियान कर्मचारियों की जिंदगी छीन रहा है।” विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा, जबकि BJP ने मजिस्ट्रेट जांच का भरोसा दिलाया। महोबा DM ने कहा, “जांच पूरी होने पर कार्रवाई होगी।
दबाव कम करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ भेजा जा रहा है।”
SIR अभियान: लोकतंत्र मजबूत करने का नाम पर जिंदगियां दांव पर?
चुनाव आयोग का SIR अभियान 31 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें फर्जी नाम हटाने और नए मतदाता जोड़ने का लक्ष्य है।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है
कि बिना पर्याप्त संसाधनों के बोझ शिक्षकों पर डालना गलत है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी निर्देश दिया था
कि शिक्षकों को तभी लगाएं जब विकल्प न हो।
यह घटना सवाल उठाती है
