घटना की पूरी कहानी: कैसे फंसा बुजुर्ग पेंशनर?
सुभाष चंद्र मौर्य, स्व. राम प्यारे मौर्य के पुत्र, एक रिटायर्ड पेंशनभोगी हैं जो शांतिपूर्ण जीवन जी रहे थे। 27 नवंबर को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को पंजाब नेशनल बैंक का अधिकारी बताया और कहा कि वह पेंशनरों के जीवित प्रमाण पत्र का सत्यापन कर रहा है। यह प्रक्रिया पेंशन जारी रखने के लिए जरूरी होती है, इसलिए सुभाष जी ने बिना संदेह के बातचीत शुरू कर दी।
जालसाज ने बहुत ही चालाकी से बातचीत को आगे बढ़ाया। उसने सुभाष जी से बैंक खाते से जुड़े कई संवेदनशील सवाल पूछे, जैसे खाता संख्या, कार्ड डिटेल्स, और अन्य वेरिफिकेशन कोड। बुजुर्ग होने के कारण और बैंक से कॉल होने का भरोसा होने पर सुभाष जी ने अनजाने में यह जानकारी साझा कर दी। यह साइबर ठगों की पुरानी चाल है, जहां वे विश्वास जीतकर पीड़ित को फंसाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे फ्रॉड में 70% से अधिक मामले पेंशनरों या बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं, क्योंकि वे तकनीकी जटिलताओं से कम परिचित होते हैं।
अगले दिन, यानी 28 नवंबर को उसी नंबर से फिर कॉल आई। आरोपी ने सुभाष जी को लाइन पर 5 मिनट तक बने रहने को कहा, ताकि ‘सत्यापन पूरा हो सके’। इसी बीच, पीड़ित के मोबाइल पर लगातार मैसेज आने लगे। ये मैसेज बैंक की ओर से थे, जो खाते से एक-एक ट्रांजेक्शन की सूचना दे रहे थे। कुल 4.14 लाख रुपये की राशि विभिन्न लेन-देन के जरिए खाली हो गई। सुभाष जी हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत कॉल काटा और स्थानीय गीडा थाने पहुंचे, जहां उन्होंने पूरी घटना की तहरीर दी।
पुलिस की कार्रवाई: जांच और आरोपी की तलाश
थाना प्रभारी ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 419 (प्रतिरूपण) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली। साइबर क्राइम सेल को सूचित किया गया है, जो अब कॉल रिकॉर्ड्स, आईपी ट्रैकिंग और बैंक ट्रांजेक्शन हिस्ट्री के आधार पर आरोपी का पता लगाने में जुटा है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि फर्जी कॉल संभवतः किसी वॉयस मॉड्यूलेटर या स्पूफिंग ऐप के जरिए की गई थी, जो भारत के बाहर से भी संचालित हो सकती है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में आरोपी अक्सर विदेशी सर्वर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन साइबर सेल की तकनीकी क्षमता से उन्हें पकड़ना संभव है। गोरखपुर जिले में पिछले तीन महीनों में साइबर फ्रॉड के 50 से अधिक केस दर्ज हो चुके हैं,
जिनमें से 20% पेंशनरों से जुड़े हैं।
यह घटना स्थानीय स्तर पर दहशत फैला रही है, खासकर बुजुर्ग समुदाय में।
साइबर फ्रॉड से कैसे बचें? महत्वपूर्ण सावधानियां
यह घटना हमें सिखाती है कि सतर्कता ही सुरक्षा की कुंजी है। यहां कुछ जरूरी टिप्स हैं:
- कभी गोपनीय जानकारी शेयर न करें: बैंक कभी फोन पर ओटीपी, पिन, खाता डिटेल्स या एटीएम कार्ड नंबर नहीं मांगता।
- संदेह हो तो सीधे बैंक ब्रांच जाएं।
- अज्ञात कॉल्स पर सावधान: कॉलर आईडी चेक करें और कॉल बैक करके वेरिफाई करें।
- पेंशन संबंधी सत्यापन हमेशा ऑफिशियल ऐप या ब्रांच से होता है।
- ऐप्स और सॉफ्टवेयर अपडेट रखें: मोबाइल पर एंटीवायरस इंस्टॉल करें और ट्रांजेक्शन अलर्ट्स चालू रखें।
- तुरंत रिपोर्ट करें: फ्रॉड का शिकार होने पर 5 मिनट के अंदर बैंक को सूचित करें
- और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
सरकार की ओर से भी ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के तहत जागरूकता कैंप लगाए जा रहे हैं