गोरखपुर में शिक्षा के साथ स्वास्थ्य पर भी दिया ध्यान
गोरखपुर शहर में शिक्षा के साथ-साथ लड़कियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की मुहिम तेज हो गई है। रोटरी क्लब ऑफ गोरखपुर मिडटाउन ने एक अनोखी पहल शुरू की है, जिसमें मेधावी छात्राओं को न केवल स्टेशनरी सामग्री प्रदान की गई, बल्कि उनके स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए नैपकिन भी भेंट किए गए। यह कार्यक्रम शिक्षा और स्वास्थ्य एक साथ के थीम पर आधारित था, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की लड़कियों को सशक्त बनाने का प्रयास है। क्लब के अध्यक्ष अनिल कुमार ने कहा, “शिक्षा तो दी जाती है, लेकिन स्वास्थ्य के बिना वह अधूरी है। हमारी यह पहल लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम है।”
यह कार्यक्रम गोरखपुर के एक प्रमुख स्कूल में आयोजित किया गया, जहां 50 से अधिक छात्राओं को सम्मानित किया गया। रोटरी क्लब की यह पहल महिला सशक्तिकरण 2025 के अंतर्गत आती है, जो उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं से प्रेरित है। कार्यक्रम में स्थानीय अधिकारी, शिक्षक और अभिभावक शामिल हुए, जिन्होंने लड़कियों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर चर्चा की। यह घटना गोरखपुर शिक्षा स्वास्थ्य पहल के रूप में चर्चा में है, जहां नैपकिन वितरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बात की गई।
रोटरी क्लब की पहल: शिक्षा और स्वास्थ्य का संयोजन, छात्राओं को मिला दोहरा लाभ
रोटरी क्लब ऑफ गोरखपुर मिडटाउन ने शिक्षा को मजबूत बनाने के साथ लड़कियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी। कार्यक्रम में मेधावी छात्राओं का चयन उनकी परीक्षा अंकों के आधार पर किया गया। उन्हें स्टेशनरी किट (नोटबुक, पेन, पेंसिल आदि) के अलावा हाइजीन प्रोडक्ट्स के रूप में नैपकिन प्रदान किए गए। क्लब की महिला विंग की सदस्य सीमा सिंह ने बताया, “कई लड़कियां शर्म के कारण स्वास्थ्य मुद्दों पर बात नहीं करतीं। हमने उन्हें जागरूक किया और नैपकिन देकर उनकी गरिमा को सम्मान दिया।”
कार्यक्रम की मुख्य हाइलाइट्स
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| आयोजन स्थल | गोरखपुर के सरकारी/निजी स्कूल (विशिष्ट नाम उपलब्ध नहीं) |
| लाभार्थी | 50+ मेधावी छात्राएं (कक्षा 8-12) |
| सामग्री वितरण | स्टेशनरी किट + नैपकिन पैक (3-6 महीने के लिए पर्याप्त) |
| जागरूकता सत्र | स्वास्थ्य शिक्षा पर लेक्चर, जहां पीरियड्स और हाइजीन पर चर्चा |
| भागीदार | रोटरी क्लब सदस्य, स्कूल स्टाफ, स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता |
यह वितरण न केवल तात्कालिक मदद था, बल्कि लंबे समय तक छात्राओं को प्रेरित करने वाला। एक छात्रा ने कहा, “यह सामान तो छोटा लगता है, लेकिन इससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ा। अब पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आएगी।” कार्यक्रम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पीरियड्स मैनेजमेंट पर टिप्स दिए, जो ग्रामीण लड़कियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित होंगे।
क्यों जरूरी है शिक्षा के साथ स्वास्थ्य पर फोकस? गोरखपुर की चुनौतियां
गोरखपुर जैसे क्षेत्रों में लड़कियों का ड्रॉपआउट रेट स्वास्थ्य मुद्दों के कारण अधिक होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 20% से ज्यादा छात्राएं पीरियड्स के दौरान स्कूल मिस करती हैं, जो उनकी शिक्षा को प्रभावित करता है। रोटरी क्लब की यह पहल उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य शिक्षा अभियान से जुड़ती है, जहां सरकार ने स्कूलों में फ्री नैपकिन वितरण की योजना शुरू की है। क्लब ने इस कार्यक्रम को मॉडल के रूप में पेश किया, ताकि अन्य संगठन भी इसे अपनाएं।
अनिल कुमार ने आगे की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा, “अगले महीने हम 200 और छात्राओं तक पहुंचेंगे। साथ ही, अभिभावक वर्कशॉप आयोजित करेंगे ताकि घर-स्कूल का संवाद मजबूत हो।” यह पहल सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) से प्रेरित है, जो लिंग समानता और स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है। स्थानीय प्रशासन ने क्लब की सराहना की और सहयोग का वादा किया।
प्रभाव और अपील: लड़कियों का भविष्य सुरक्षित करें
इस कार्यक्रम से छात्राओं में पढ़ाई के प्रति उत्साह बढ़ा है, और स्वास्थ्य जागरूकता ने उन्हें आत्मविश्वास दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहलें ड्रॉपआउट को 15% तक कम कर सकती हैं।
रोटरी क्लब ने अपील की कि समाज के सभी वर्ग इसमें योगदान दें।
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शिक्षा और स्वास्थ्य साथ-साथ – यही है सच्ची प्रगति।