बीआरसी उरुवा टीईटी विरोध
उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में सोमवार को प्राथमिक शिक्षकों ने अनोखा प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने बीआरसी उरुवा में चल रहे आउट ऑफ स्कूल प्रशिक्षण कार्यक्रम में काली पट्टी बांधकर हिस्सा लिया और अपने विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज कराया।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के आदेश के बाद पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने और पदोन्नति पाने हेतु टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसी आदेश के विरोध में शिक्षकों ने यह कदम उठाया।

शिक्षकों की क्या है मांग?
शिक्षक नेता अरविंद कुमार चंद ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 27 जुलाई 2011 से लागू हुआ था। नियमों के अनुसार, टीईटी की अनिवार्यता केवल 27 जुलाई 2011 के बाद नियुक्त शिक्षकों पर लागू होनी चाहिए।
वहीं शिक्षक नेता रवि प्रकाश ने सरकार से मांग की है कि अध्यादेश लाकर 2011 से पहले
नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए।
प्रशिक्षण में भी जारी रहा विरोध
बीआरसी उरुवा पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षक काली पट्टी बांधकर शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि वे शिक्षण कार्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं,
लेकिन अपने अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण विरोध भी जरूरी है।
इस मौके पर रतन सेन, दिनेश गुप्ता, दीप नारायण तिवारी, छोटेलाल, दुर्गेश सिंह, विनोद,
सत्यप्रकाश पांडे, अवनीश चंद और बसंत सिंह सहित कई शिक्षक मौजूद रहे।