चुनाव आयोग सही, आधार को नागरिकता का प्रमाण नहीं मान सकते : सुप्रीम कोर्ट
बिहार में एसआईडीआर मामले में कहा-पात्रों को शामिल करना व अपात्रों को बाहर करना आयोग का अधिकार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (एसआईडीआर) के मुद्दे पर चुनाव आयोग के रुख का समर्थन करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि आधार कार्ड को नागरिकता के निर्धारण हेतु मान्य दस्तावेज नहीं माना जा सकता। यह भी कहा, मतदाता सूची में नाम जोड़ना या हटाना निर्वाचन आयोग का अधिकार क्षेत्र है और निर्वाचन आयोग के बाहर कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयदीप गुप्ता की पीठ ने कहा कि आधार कार्ड को नागरिकता का निर्धारण करने वाले दस्तावेज के रूप में नहीं माना जा सकता, इसलिए वोटर आईडी और आधार को नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
विवाद काफी हद तक विश्वास में कमी का मामला
शॉर्ट कोर्ट ने एसआईडीआर विवाद को काफी हद तक विश्वास की कमी का मामला माना। कोर्ट ने कहा, मतदाता सूची का मामला 24 जून के आयोग के फैसले पर चुनौती देते हुए न्यायपालिका के करीब 8 करोड़ मतदाताओं में से 7.24 करोड़ मतदाताओं पर एसआईडीआर लागू करने को उचित ठहराया गया।
हालांकि, जब 7.9 करोड़ मतदाताओं में से 7.24 करोड़ मतदाताओं पर एसआईडीआर लागू हो रहा है, तो इसे असमानता नहीं कहा जा सकता।
सिर्फ रहने के कारण नहीं बन सकते नागरिक
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, आधार, पैन, वोटर आईडी जैसे दस्तावेज केवल पहचान पत्र हैं, नागरिकता के अधिकारों का सबूत नहीं। पीठ ने कहा, क्या आपको कोर्ट से यह कहने की आवश्यकता है कि, वे लोग जिनके पास आधार नहीं है, वे नागरिक नहीं हैं, इसलिए उन्हें वोट देने से वंचित किया जा सकता है? आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में केवल योग्य नागरिकों के नाम हों, इसमें किसी को वंचित करने का प्रयास नहीं है।
6.5 करोड़ लोगों को वर्ष 2003 की मतदाता सूची में शामिल किया गया
मतदाता सूची के लिए दस्तावेज दाखिल करने की आवश्यकता नहीं थी। आयोग के कार्य में हस्तक्षेप उचित नहीं, क्योंकि यह एक सतत प्रक्रिया है।
अधिनियम और एंडोर्समेंट प्रोजेक्ट (एसआईडीआर) ने तर्क दिया कि एसआईडीआर मनमाना और असंवैधानिक है, क्योंकि लाखों लोगों को प्रतिनिधि चुनने से वंचित कर सकता है, जिससे देश में स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र बाधित होगा।
हालांकि, आयोग की तरफ से कहा गया कि अनुच्छेद 324 और प्रतिनिधि अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) में मतदाता सूची में संशोधन करने का अधिकार स्पष्ट रूप से प्राप्त है।
आधार, पैन, वोटर आईडी से कोई भारतीय नागरिक नहीं बन जाता : हाईकोर्ट
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ आधार कार्ड, पैन कार्ड या मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज रखने से कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं बन जाता। नागरिकता कानूनों के तहत अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले व्यक्ति को नागरिकता नहीं मिल सकती।