घटना का पूरा विवरण: नमाज के बीच खूनी खेल
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक शिया मस्जिद पर शुक्रवार को नमाज अदा कर रहे सैकड़ों लोगों के बीच आत्मघाती हमलावर ने खौफनाक हमला बोल दिया। यह घटना मस्जिद के मुख्य हॉल में जुमे की नमाज के चरम पर घटी, जब लोग अल्लाह के सामने सिर झुकाए हुए थे। आतंकी ने पहले अंधाधुंध गोलाबारी की, जिसमें कई लोग घायल हो गए, और फिर अपने विस्फोटक बेल्ट से जोरदार धमाका कर दिया। इस हमले में कम से कम 31 लोग मारे गए, जबकि 50 से अधिक घायल हुए हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर बनी हुई है, और अस्पतालों में इमरजेंसी लगी हुई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जो नमाज के लिए मस्जिद पहुंचे थे।
तहरीक ए तालिबान का हाथ: विदेशी आतंकी की पहचान
पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत दावा किया कि हमलावर तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़ा था। जांच में पता चला कि आतंकी विदेशी मूल का था, संभवतः अफगानिस्तान या किसी अन्य पड़ोसी देश से। TTP ने हमले की जिम्मेदारी ले ली है, और उनके प्रवक्ता ने बयान जारी कर इसे “शिया काफिरों के खिलाफ जिहाद” बताया। सुरक्षा बलों ने मस्जिद के आसपास के CCTV फुटेज से आतंकी की तस्वीरें बरामद कीं, जिसमें वह AK-47 के साथ नजर आ रहा है। हमले से पहले उसने गेट पर गोलियां चलाईं ताकि लोग भाग न सकें, फिर अंदर घुसकर धमाका किया। TTP का यह ताजा हमला पाकिस्तान में शिया समुदाय के खिलाफ बढ़ते खतरे को दर्शाता है।
सुरक्षा चूक और बचाव कार्य: घायलों का बुरा हाल
हमले के समय मस्जिद में भारी भीड़ थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था ढीली पड़ी। स्थानीय पुलिस ने बताया कि चेकपोस्ट पर सघन तलाशी नहीं ली गई थी। धमाके के बाद रेस्क्यू टीमों ने मलबे से शव निकाले, और घायलों को निकटतम अस्पताल पहुंचाया। कई घायल सर्जरी के इंतजार में हैं, जहां ब्लड की भारी किल्लत हो गई है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने हमले की निंदा की और सुरक्षा एजेंसियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने भी शोक व्यक्त किया। शिया समुदाय ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं, और सड़कों पर तनाव फैल गया है।
पृष्ठभूमि: पाकिस्तान में शिया-विरोधी हमलों का सिलसिला
पाकिस्तान में TTP और उसके सहयोगी संगठन लंबे समय से शिया मुसलमानों को निशाना बना रहे हैं। 2025 में ही कई मस्जिदों और इमामबाड़ों पर हमले हो चुके हैं। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान TTP का गढ़ बने हुए हैं। अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद TTP ने पाकिस्तान में गतिविधियां तेज कर दीं। विशेषज्ञों का कहना है कि
विदेशी आतंकियों को बॉर्डर पार कराना आसान हो गया है।
सरकार ने कई ऑपरेशन चलाए, लेकिन TTP कमजोर नहीं पड़ा।
इस हमले से पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल उठे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भविष्य की आशंकाएं
भारत, अमेरिका और सऊदी अरब ने हमले की निंदा की है। UN ने भी शांति की अपील की।
पाकिस्तान सरकार ने TTP के खिलाफ नया एक्शन प्लान तैयार किया है।
लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में और हमले हो सकते हैं।
शिया समुदाय में गुस्सा भरा है, जो सांप्रदायिक दंगों को जन्म दे सकता है।
