उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां थाना रामगढ़ताल क्षेत्र में एक पत्नी और उसके बेटे ने मिलकर अपने ही पति की हत्या कर दी। यह घटना 24/25 मार्च 2026 की रात की बताई जा रही है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।
पुलिस के अनुसार, मृतक की पत्नी गीता और उसका बेटा पंकज लंबे समय से पारिवारिक विवाद में उलझे हुए थे। इसी विवाद ने इतना गंभीर रूप ले लिया कि दोनों ने मिलकर रमेश बेलदर की पीढ़ा (लकड़ी का छोटा आसन/डंडा) से पीट-पीटकर हत्या कर दी।
रामगढ़ताल में रिश्तों का खून: मां-बेटे ने मिलकर उतारा पिता को मौत के घाट
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देशन में चल रहे अपराध नियंत्रण अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक नगर और क्षेत्राधिकारी कैण्ट के मार्गदर्शन में रामगढ़ताल पुलिस टीम ने तेजी दिखाते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
मामले में दर्ज मुकदमा संख्या 173/2026 धारा 103(1) भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त पीढ़ा भी बरामद कर लिया है, जो हत्या का मुख्य हथियार बताया जा रहा है।
गोरखपुर मर्डर केस: घरेलू विवाद बना मौत की वजह, पत्नी-बेटे गिरफ्तार
पूछताछ में सामने आया कि घर में लंबे समय से विवाद चल रहा था, जो धीरे-धीरे हिंसक रूप लेता गया। घटना वाली रात विवाद इतना बढ़ गया कि पत्नी और बेटे ने मिलकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दे दिया।
पुलिस टीम की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के चलते 24 घंटे के अंदर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे इलाके में कानून व्यवस्था को लेकर लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है।
सनसनीखेज खुलासा: पत्नी और बेटे ने पीढ़ा से पीट-पीटकर की हत्या
गिरफ्तारी करने वाली टीम में उप निरीक्षक चन्दन सिंह, अशोक शर्मा, हरिओम सिंह, आरती यादव समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे, जिन्होंने इस केस को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि पारिवारिक विवाद अगर समय रहते सुलझाए न जाएं तो वे कितने खतरनाक परिणाम दे सकते हैं।
गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना: मां-बेटे ने मिलकर की पिता की हत्या
गोरखपुर का यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। घरेलू विवाद, मानसिक तनाव और पारिवारिक असंतुलन आज के समय में अपराध का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संवाद की कमी और बढ़ता तनाव बड़ी भूमिका निभाते हैं। यदि समय रहते समाधान न निकाला जाए तो यह हिंसा में बदल सकता है।
