गोरखपुर में भूमाफियाओं का दबदबा: कानून बेबस, प्रशासन मूक
गोरखपुर जिले में भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हैं। यहां कानून, प्रशासन और न्यायालय सब बौने साबित हो रहे हैं। शुक्रवार को माधोपुर हरिजन बस्ती के निवासी रमेश यादव ने गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर एक सनसनीखेज खुलासा किया। उन्होंने अपनी वैध जमीन पर अवैध कब्जे, धमकियों और साजिश की पूरी कहानी सुनाई। यह मामला सिर्फ जमीन विवाद नहीं, बल्कि पूरी कानून व्यवस्था पर सीधा हमला है।
पीड़ित की जमीन पर वर्षों से कब्जा
रमेश यादव की जमीन गाटा संख्या 566/2 (रकबा 0.138 हेक्टेयर) पर उनका मकान संख्या 246-W बना हुआ है। बावजूद इसके शिखर चंद्र गुप्ता, कृष्ण मोहन गुप्ता, दुर्गा प्रसाद गुप्ता, राजेश गुप्ता और उनके परिजन लंबे समय से कब्जा जमाए हुए हैं। पीड़ित ने बताया कि आरोपी खुलेआम चुनौती देते हैं—“पहले लेखपाल-कानूनगो से चिन्हांकन कराओ, तभी हटेंगे।” यह दबंगई आम नागरिक को बर्बाद करने की कोशिश है।
एसडीएम कोर्ट आदेश और रिपोर्ट बेअसर
रमेश यादव ने एसडीएम कोर्ट से धारा 24 के तहत पैमाइश और चिन्हांकन कराया। एसडीएम, कानूनगो और लेखपाल की तीनों रिपोर्टें स्पष्ट रूप से उनके पक्ष में आईं। रिपोर्ट्स में जमीन को पूरी तरह वैध साबित किया गया। फिर भी भूमाफियाओं ने कब्जा नहीं छोड़ा। सवाल उठता है—जब सरकारी दस्तावेज पीड़ित के हक में हैं, तो प्रशासन क्यों चुप है? क्या कहीं संरक्षण का खेल चल रहा है?
यह घटना गोरखपुर में भूमाफिया संस्कृति को उजागर करती है। उत्तर प्रदेश में ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं, जहां कोर्ट ऑर्डर के बावजूद माफिया जमीन नहीं छोड़ते। रमेश यादव ने कहा, “रिपोर्ट आने के बाद भी कब्जा बरकरार है। आम आदमी कहां जाए?”
बलात्कार केस में फंसाने की खुली धमकी
रिपोर्ट आने के बाद मामला और उलझ गया। अंजू गुप्ता, वंदना गुप्ता, बिंदु गुप्ता, आर्यन गुप्ता और प्रशांत गुप्ता ने गाली-गलौज शुरू कर दी। उन्होंने पीड़ित को बलात्कार जैसे संगीन मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। यह साफ साजिश है—डराकर जमीन हड़पना। पीड़ित परिवार डर के साए में जी रहा है। महिलाओं के नाम पर अपराध करने की यह प्रवृत्ति बेहद खतरनाक है।
फर्जी मुकदमा और कोई वैध कागजात नहीं
आरोपियों के पास गाटा 566/2 का कोई वैध दस्तावेज नहीं है। फिर भी उन्होंने पड़ोसी गाटा 567/2 पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराया। इसका मकसद प्रशासन और कोर्ट को गुमराह करना है। यह ट्रिक भूमाफियाओं की पुरानी चाल है—फर्जी कागजों से वैध
मालिक को परेशान करना। रमेश यादव ने दावा किया कि उनके सभी कागजात पूर्णतः वैध और पूरे हैं।
प्रेस क्लब में पत्रकारों की मांग
प्रेस वार्ता में मौजूद पत्रकारों ने इसे कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती बताया।
उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट और एसएसपी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
पीड़ित ने मांग की है कि धमकी देने वालों पर IPC की सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज हो और
परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। गोरखपुर पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
क्या गोरखपुर प्रशासन इस बम को फैलने देगा?
यह मामला न केवल एक व्यक्ति की जमीन का है,
बल्कि पूरे समाज में कानून के प्रति विश्वास की कमी को दर्शाता है।
यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता, तो ऐसे मामले और बढ़ेंगे।
रमेश यादव जैसे पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए, ताकि आम नागरिक
सुरक्षित महसूस करे। गोरखपुर में भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत है