बांदा POCSO कोर्ट
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में न्याय की एक बड़ी जीत हुई है। विशेष POCSO अदालत ने सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को 34 बच्चों के यौन शोषण, अश्लील तस्वीरें-वीडियो बनाकर डार्क वेब पर बेचने और वायरल करने के जघन्य अपराध में फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस माना और दोनों को मरते दम तक फंदे पर लटकाने का आदेश दिया। तीसरे आरोपी की फाइल अलग कर दी गई है, जो ई-मेल से जानकारी साझा करने के आरोप में शामिल था और जमानत पर बाहर है।
घटना का पूरा विवरण
यह मामला 2010 से 2020 तक चला। रामभवन (सिंचाई विभाग में चित्रकूट में तैनात JE) और पत्नी दुर्गावती ने 33-34 नाबालिग लड़कों (कुछ 3 साल के) का यौन शोषण किया। वे बच्चों को ऑनलाइन गेम, पैसे, खिलौनों का लालच देकर फंसाते थे। अश्लील वीडियो और फोटो बनाकर डार्क वेब पर 47 देशों में बेचते थे। इंटरपोल की सूचना पर CBI ने अक्टूबर 2020 में केस दर्ज किया। नवंबर 2020 में रामभवन गिरफ्तार हुआ, बाद में पत्नी दुर्गावती भी।
CBI जांच में पेन ड्राइव, लैपटॉप, मोबाइल से सैकड़ों अश्लील सामग्री बरामद हुई। एक पेन ड्राइव में 34 बच्चों के वीडियो और 689 फोटो मिले। ये बच्चे बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर समेत आसपास के जिलों के थे। पत्नी दुर्गावती पूरी मदद करती थी – बच्चों को बहकाने से लेकर सामग्री भेजने तक।
अदालत का फैसला और सजा
20 फरवरी 2026 को बांदा की विशेष POCSO अदालत (जज प्रदीप कुमार मिश्रा) ने दोनों को दोषी ठहराया। 21 फरवरी तक सजा सुनाई गई। IPC 377 (अप्राकृतिक अपराध), POCSO एक्ट की कई धाराएं (अग्रेसिव पेनेट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट, पोर्नोग्राफी में इस्तेमाल, स्टोरेज), IT एक्ट 66, 67B और आपराधिक साजिश के तहत फांसी।
रामभवन पर 6.45 लाख और दुर्गावती पर 5.40 लाख जुर्माना भी लगा।
हर पीड़ित को 10 लाख मुआवजा देने का आदेश।
अदालत ने कहा कि यह योजनाबद्ध, क्रूर और समाज के लिए बेहद खतरनाक अपराध था।
ऐसे मामलों में कठोरतम सजा जरूरी है।
सबूतों की भूमिका
- पेन ड्राइव और लैपटॉप: मुख्य सबूत, जिसमें हजारों फाइलें थीं।
- डिजिटल ट्रेस: डार्क वेब ट्रांजेक्शन, ई-मेल, इंटरनेट आईपी।
- बच्चों के बयान: 74 गवाहों में पीड़ित बच्चों के बयान निर्णायक।
- CBI जांच: इंटरपोल से मिली जानकारी ने केस मजबूत किया।
समाज के लिए संदेश
यह फैसला बच्चों की सुरक्षा में मील का पत्थर है। डार्क वेब पर CSAM (चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज मटेरियल) का
कारोबार रोकने की जरूरत है। पुलिस, CBI और अदालत की तेज कार्रवाई से अपराधियों में डर पैदा होगा।
पीड़ित बच्चों के पुनर्वास और परिवार को न्याय मिले, यही उम्मीद है।
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