गोरखपुर, 1 फरवरी 2026: जिला रविदास महासभा, गोरखपुर (रजि.) के तत्वावधान में परम पूज्य संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती एवं 80वें वार्षिक जयंती समारोह का आयोजन रविवार को अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता, मानवता और सामाजिक न्याय के संदेश को भी मजबूती से प्रस्तुत किया। अलवापुर स्थित प्राचीन गुरु रविदास मंदिर परिसर में हुआ यह समारोह हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी से चरम पर पहुंचा, जहां गुरु रविदास जयंती 2026 गोरखपुर के उत्सव ने पूरे शहर को भक्ति के रंग में रंग दिया।
सुबह की भक्तिमय पूजा-अर्चना: श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे से हुई, जब गुरु रविदास मंदिर अलवापुर में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। यह पूजा 11 बजे तक चली, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन और आरती के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। पूजा के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया, जो गुरु जी के श्रम की गरिमा और मानव समानता के संदेश को साकार करता नजर आया। पूरा क्षेत्र “गुरु रविदास जी अमर रहें” और “जय भीम, जय भारत” के जयघोष से गूंज उठा। इस दौरान महिलाएं, युवा और बुजुर्ग सभी भक्ति में डूबे दिखे, जो रविदास महासभा गोरखपुर की सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

दोपहर की भव्य शोभायात्रा: झांकियों ने बांधे सामाजिक संदेश
दोपहर 2 बजे मंदिर परिसर से एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसकी अध्यक्षता महासभा के अध्यक्ष श्रद्धेय सुरेश प्रसाद जी ने की। यह गुरु रविदास जयंती शोभायात्रा गोरखपुर 2026 अलवापुर से शुरू होकर नगर के प्रमुख मार्गों—नरसिंहपुर, गांजेरोजा, अंधियारी बाग, बिछुड़पुर, तिवारीपुर, हजारीपुर, तुर्कमानपुर—से गुजरी। यात्रा में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी, बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, भगवान बुद्ध तथा सामाजिक एकता और देश प्रेम से जुड़ी आकर्षक झांकियां शामिल रहीं। ये झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनीं, जहां समानता, शिक्षा, सामाजिक न्याय और भाईचारे के संदेश प्रमुखता से दिए गए।
शोभायात्रा को देखने सड़कों पर भारी जनसैलाब उमड़ा। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह फूल-मालाओं से गुरु जी की प्रतिमा का स्वागत किया। अलवापुर, नरसिंहपुर, गांजेरोजा आदि मोहल्लों से आई झांकियों ने समाज को नई दिशा देने वाले विचार प्रस्तुत किए। लोग गाजे-बाजे के साथ नाचते-झूमते अनुशासनपूर्वक आगे बढ़े। पूरे आयोजन में शांति व्यवस्था और आपसी सौहार्द का पालन विशेष रूप से सुनिश्चित किया गया, जिसमें युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी रही। यह दृश्य गुरु रविदास जी के विचारों—मानव समानता और श्रम सम्मान—को जीवंत रूप से प्रदर्शित करता था।
प्रमुख सहयोगियों का योगदान: सामाजिक कार्यकर्ताओं की एकजुटता
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
प्रमुख नामों में सर्वेशी सोनई प्रसाद, बेनी प्रसाद, बालकरन, संतराज भारती, सुरेंद्र कुमार भारती, शुकदेव प्रसाद,
पूर्णमासी, राजकुमार भारती, इयानंद उर्फ दयालु, बृजमोहन भारती, शैलेन्द्र कुमार भारती, बुद्ध प्रिय गौतम,
विजय कुमार गौतम, भोलानाथ, राजन कुमार (एडवोकेट), पुष्कर, राजकुमार,
भरत प्रसाद, अमित कुमार, तीजू प्रसाद, बलराम, राजमन, गोपाल, विष्णुकांत, अशोक कुमार, सुरेश कुमार,
शैलेश कुमार, राजकुमार गौतम सहित अन्य शामिल रहे। इनके सहयोग से आयोजन सुचारू रूप से चला।
गुरु रविदास जी के संदेश की प्रासंगिकता
अंत में, महासभा के पदाधिकारियों ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
यह समारोह गुरु रविदास जयंती 649वीं गोरखपुर के रूप में इतिहास में दर्ज हो गया,
जो सामाजिक एकता को मजबूत करने वाला साबित हुआ।
रविदास महासभा ने एक बार फिर सिद्ध किया कि गुरु जी के संदेश आज भी प्रासंगिक हैं।