उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला एक बड़ा कदम उठाया गया है। सहजनवा-दोहरीघाट नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है, जिसमें आठ नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण होगा। यह परियोजना कुशीनगर और महाराजगंज जिले को जोड़ेगी, जिससे यात्रियों को गोरखपुर, देवरिया और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों तक तेज पहुंच मिलेगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में इसकी घोषणा की, जो पूर्वोत्तर रेलवे जोन के तहत आ रही है। इससे न केवल यात्रा समय कम होगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।
परियोजना का विवरण
सहजनवा-दोहरीघाट नई रेल लाइन लगभग 50 किलोमीटर लंबी होगी, जो गोरखपुर मंडल के सहजनवा से शुरू होकर महाराजगंज जिले के दोहरीघाट तक जाएगी। इस लाइन पर आठ स्टेशन बनाए जाएंगे: सहजनवा, तमकुही राज, नरायनपुर, पिपरा, हथौड़ा, रामकोला, चितौड़ा और दोहरीघाट। इन स्टेशनों का डिजाइन आधुनिक होगा, जिसमें प्लेटफॉर्म टिकटिंग, वेटिंग रूम, पार्किंग और डिजिटल सिग्नलिंग सिस्टम शामिल होंगे। परियोजना की लागत करीब 1500 करोड़ रुपये आंकी गई है, जो 2026-28 के बीच पूरी होनी है। रेलवे ने जमीन अधिग्रहण और सर्वे पूरा कर लिया है, जिससे काम शीघ्र शुरू होगा। यह लाइन डीजल से इलेक्ट्रिक ट्रैक पर बदली जाएगी, जो पर्यावरण अनुकूल होगी।
पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक ने बताया कि यह परियोजना अमृत भारत स्टेशन स्कीम से जुड़ी है, जहां स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाएं दी जाएंगी। सहजनवा स्टेशन को जंक्शन का दर्जा मिल सकता है, जबकि दोहरीघाट पर गंगा घाट से कनेक्टिविटी बढ़ेगी। ट्रेनों की संख्या में 20% वृद्धि होगी, जिसमें पैसेंजर, एक्सप्रेस और फ्रेट ट्रेनें शामिल होंगी। इससे नेपाल सीमा तक माल ढुलाई आसान हो जाएगी। स्थानीय सांसदों ने इसे पूर्वांचल के विकास की सौगात बताया है।
पूर्वांचल को मिलने वाले लाभ
यह नई रेल लाइन पूर्वांचल के लिए गेम चेंजर साबित होगी। कुशीनगर के पर्यटन स्थल जैसे वैशाली स्तूप और रामायण भूमि तक रेल पहुंच आसान हो जाएगी, जिससे पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो सकती है। किसानों को धान, गन्ना और सब्जियों का निर्यात तेज होगा, क्योंकि फ्रेट कॉरिडोर से लागत 30% कम होगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे- निर्माण में 5000 से ज्यादा मजदूर लगेंगे और स्टेशनों पर 2000 नौकरियां पैदा होंगी। गोरखपुर से दोहरीघाट की दूरी 2 घंटे से घटकर 1 घंटे रह जाएगी। महिलाओं और छात्रों के लिए विशेष कोच और वाई-फाई सुविधा होगी। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एम्बुलेंस ट्रेन कनेक्टिविटी बढ़ेगी।
आर्थिक रूप से, यह परियोजना 5 साल में 2000 करोड़ का निवेश आकर्षित करेगी। छोटे व्यापारियों को बाजार तक पहुंच मिलेगी, जबकि कोविड के बाद रिकवरी में मददगार बनेगी। पर्यावरणीय लाभ के तौर पर, डीजल ट्रेनें कम होने से कार्बन एमिशन घटेगा। सरकार की डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर योजना से लिंक होगा। स्थानीय पंचायतें उत्साहित हैं, जो सड़क ट्रैफिक कम होने से दुर्घटनाएं रुकेंगी।
निर्माण समयसीमा और चुनौतियां
निर्माण कार्य फरवरी 2026 से शुरू होगा, पहला चरण सहजनवा-तमकुही तक जून 2027 तक पूरा।
पूर्ण संचालन 2028 तक। रेलवे ने IRCON को ठेका दिया है
जो ब्रिज और टनल बनाएगा। चुनौतियां जैसे बाढ़ प्रभावित इलाका हैं,
लेकिन हाई-लेवल ब्रिज से समाधान होगा। बजट में कोई कमी नहीं,
पीएम गतिशक्ति योजना से फंडिंग। जनता की मांग पर 2 साल में मंजूरी मिली।
अन्य संबंधित विकास
पूर्वांचल में यह छठी नई लाइन है- पहले गोरखपुर-लखनऊ, वाराणसी-शाहगंज जैसी परियोजनाएं सफल रहीं।
नेपाल-अंतरराष्ट्रीय ट्रेनें बढ़ेंगी। राज्य सरकार ने 100 करोड़ का योगदान दिया।
सोशल मीडिया पर #SahjanwaDohriGhatRailway और #पूर्वांचलरेलक्रांति ट्रेंड कर रहे हैं।
पूर्वांचल का नया विकास अध्याय
सहजनवा-दोहरीघाट नई रेल लाइन पूर्वांचल के लिए ऐतिहासिक है। यह परियोजना कनेक्टिविटी, पर्यटन,
कृषि और रोजगार को नई ऊंचाई देगी। 2028 तक पूरी होने पर क्षेत्र का चेहरा बदल जाएगा।
रेलवे की यह पहल विकास और समावेशिता का प्रतीक बनेगी।