गोरखपुर के डाड़ी गांव में स्वास्थ्य विभाग का कैंप, गाय के दूध के सेवन को लेकर बढ़ी चिंता

राकेश शर्मा की रिपोर्ट

डाड़ी गांव, गोला, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश | तारीख: 21 अक्टूबर 2026

गोरखपुर जिले के गोला विकासखंड स्थित डाड़ी गांव में रेबीज की आशंका के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण अभियान शुरू किया है। बुधवार सुबह लगाए गए कैंप में 11 बजे तक 150 लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन दी गई। लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त वैक्सीन भी मंगाई गई है।

मुख्य समाचार

गोरखपुर। जिले के गोला विकासखंड के डाड़ी गांव में एक गाय में रेबीज की आशंका जताए जाने के बाद ग्रामीणों के बीच चिंता का माहौल है। बुधवार सुबह 10 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), गोला की टीम गांव पहुंची और कैंप लगाकर संबंधित लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाने का अभियान शुरू किया। सुबह 11 बजे तक लगभग 150 लोगों को टीका लगाया जा चुका था। ग्रामीणों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अतिरिक्त वैक्सीन की व्यवस्था भी की।

बीमार गाय के दूध से बने चरणामृत के सेवन के बाद बढ़ी चिंता

मामला डाड़ी चौराहे पर दुर्गा पूजा के दौरान आयोजित कार्यक्रम से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, पूजा पंडाल में चरणामृत तैयार करने और एक दुकान पर चाय बनाने के लिए जिस गाय के दूध का इस्तेमाल किया जाता था, वह गाय बीमार हो गई थी। पशु चिकित्सकों ने गाय में दिखाई दिए लक्षणों के आधार पर रेबीज की आशंका जताई थी।

इसके बाद गाय के दूध से बने चरणामृत का सेवन करने वाले और चाय पीने वाले लोगों में संक्रमण की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई। गांव में इस बात की चर्चा फैलने के बाद संबंधित लोग स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करने लगे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर गाय में रेबीज की पुष्टि और दूध के सेवन से किसी व्यक्ति में संक्रमण होने की पुष्टि नहीं मानी जा सकती। इस संबंध में चिकित्सकीय आकलन महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगाया विशेष कैंप

मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित माने जा रहे लोगों तक पहुंचकर टीकाकरण शुरू किया। मंगलवार को करीब 50 लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई थी। बुधवार को गांव में विशेष कैंप लगाकर अभियान का दायरा बढ़ाया गया, ताकि अधिक से अधिक संबंधित लोगों की चिकित्सकीय जांच और आवश्यक बचाव संबंधी कार्रवाई की जा सके।

बुधवार सुबह 11 बजे तक 150 लोगों को टीका लगाए जाने की जानकारी सामने आई। कैंप में लोगों की संख्या बढ़ने पर सीएचसी गोला से 250 और लोगों के टीकाकरण के लिए 50 वायल वैक्सीन भेजी गईं। स्वास्थ्य विभाग की इस व्यवस्था का उद्देश्य संबंधित लोगों को समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना है।

एक सप्ताह पहले हुई थी गाय की मौत

मिली जानकारी के अनुसार, गांव में लगभग एक सप्ताह पहले एक गाय की मौत हो चुकी है। बताया जा रहा है कि इस गाय का दूध कुछ लोगों के घरों में भी पहुंचता था। ऐसे लोगों को भी रेबीज की आशंका के मद्देनजर वैक्सीन लगाई गई थी। अब स्वास्थ्य विभाग उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है, जिनका संपर्क संबंधित गाय या उसके दूध से बने खाद्य पदार्थों के माध्यम से हुआ हो सकता है।

इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रेबीज मुख्य रूप से संक्रमित जानवर की लार के काटने, खरोंच या खुले घाव अथवा आंख और मुंह की श्लेष्म झिल्ली के संपर्क में आने से फैलता है। केवल दूध पीने से रेबीज फैलने का जोखिम स्थापित नहीं है। हालांकि, संदिग्ध पशु से जुड़े किसी भी संभावित संपर्क के मामले में स्वयं निष्कर्ष निकालने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील

स्वास्थ्य संबंधी किसी भी आशंका को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

संबंधित गाय के संपर्क में आने वाले लोगों को स्वास्थ्यकर्मियों को पूरी जानकारी देनी चाहिए,

ताकि संपर्क के प्रकार के अनुसार जोखिम का आकलन किया जा सके।

यदि किसी व्यक्ति को संदिग्ध जानवर ने काटा या खरोंचा है, अथवा उसकी लार किसी खुले घाव या आंख-मुंह में पहुंची है, तो प्रभावित स्थान को साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट तक धोकर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

डाड़ी गांव में स्वास्थ्य विभाग का कैंप इस घटना के बाद एहतियाती कार्रवाई का हिस्सा है।

अब आगे की स्थिति गाय की जांच करनी है।

लोगों के संपर्क का आकलन और स्वास्थ्य विभाग की चिकित्सकीय सलाह पर निर्भर करेगी।

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डाड़ी गांव में रेबीज की आशंका से बढ़ी चिंता

स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाकर शुरू किया टीकाकरण

एक सप्ताह पहले हुई थी गाय की मौत

ग्रामीणों को चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील

Facts/Details

  • स्थान: डाड़ी गांव, गोला विकासखंड, गोरखपुर।
  • स्वास्थ्य केंद्र: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), गोला।
  • कैंप शुरू होने का समय: बुधवार सुबह 10 बजे।
  • सुबह 11 बजे तक टीकाकरण: लगभग 150 लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई।
  • मंगलवार का टीकाकरण: करीब 50 लोगों को टीका लगाया गया था।
  • अतिरिक्त व्यवस्था: 250 और लोगों के टीकाकरण के लिए 50 वायल वैक्सीन भेजी गईं।
  • घटना का कारण: बीमार गाय में लक्षणों के आधार पर रेबीज की आशंका जताई गई।
  • चिंता का विषय: गाय के दूध से बने चरणामृत और चाय का सेवन।
  • गाय की मौत: स्थानीय जानकारी के अनुसार, लगभग एक सप्ताह पहले।
  • महत्वपूर्ण तथ्य: गाय में रेबीज की पुष्टि और दूध के सेवन से संक्रमण होने की पुष्टि के बारे में उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट विवरण नहीं है।

Statement

स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव में कैंप लगाकर संबंधित लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन दी जा रही है।

लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त वैक्सीन की व्यवस्था की गई है।

जिन लोगों का संबंधित गाय से संपर्क रहा है, उन्हें संपर्क की पूरी जानकारी चिकित्सकों को देनी चाहिए।

रेबीज की आशंका को लेकर घबराने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए।

आवश्यक सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

सवाल 1: डाड़ी गांव में एंटी-रेबीज कैंप क्यों लगाया गया?

जवाब: एक बीमार गाय में रेबीज की आशंका जताए जाने के बाद संबंधित लोगों के स्वास्थ्य जोखिम का आकलन करने और आवश्यक बचाव संबंधी कार्रवाई के लिए कैंप लगाया गया।

सवाल 2: कितने लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई?

जवाब: बुधवार सुबह 11 बजे तक लगभग 150 लोगों को टीका लगाए जाने की जानकारी मिली है। मंगलवार को करीब 50 लोगों को टीका लगाया गया था।

सवाल 3: क्या गाय का दूध पीने से रेबीज हो सकता है?

जवाब: केवल दूध पीने से रेबीज फैलने का जोखिम स्थापित नहीं है। फिर भी संदिग्ध पशु से किसी प्रकार का संपर्क हुआ हो तो चिकित्सक से संपर्क करके सही सलाह लेनी चाहिए।

सवाल 4: रेबीज की आशंका होने पर क्या करना चाहिए?

जवाब: जानवर के काटने, खरोंचने या उसकी लार के खुले घाव अथवा आंख-मुंह में पहुंचने पर प्रभावित स्थान को 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोएं और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

सवाल 5: अतिरिक्त वैक्सीन क्यों मंगाई गई?

जवाब: कैंप में लोगों की संख्या बढ़ने के कारण अधिक लोगों को टीका लगाने की व्यवस्था के लिए 50 वायल वैक्सीन भेजी गईं।

विवरण

गोरखपुर के डाड़ी गांव में बीमार गाय से जुड़ी रेबीज की आशंका है।

स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है।

ग्रामीणों को सलाह है कि वे अफवाहों से बचें,

संबंधित संपर्क की जानकारी चिकित्सा अधिकारी को दें

और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करें।