गोरखपुर जेल में ब्रिटिश नागरिक जार्डन का हंगामा, दीवार-पंखा-बल्ब तोड़े; जेल प्रशासन ने हथकड़ी में रखने की मांगी अनुमति

महराजगंज/गोरखपुर: गोरखपुर जिला कारागार में बंद ब्रिटिश नागरिक जार्डन की कथित आक्रामक गतिविधियों ने जेल प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जेल प्रशासन का कहना है कि बंदी ने जेल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के साथ कर्मचारियों के साथ भी कथित तौर पर मारपीट और आक्रामक व्यवहार किया है। स्थिति को देखते हुए जेल अधीक्षक ने महराजगंज के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से जार्डन को हथकड़ी में रखने की अनुमति मांगी है।

जेल प्रशासन के अनुसार, जार्डन ने कारागार परिसर में निर्माणाधीन एक दीवार गिरा दी। इसके अलावा अपने बैरक में लगे पंखे और रोशनी के बल्ब को भी नुकसान पहुंचाया। इससे पहले एक बंदीरक्षक का गला दबाने की कोशिश करने का आरोप भी उस पर लगा है। घटना के बाद जेल कर्मचारियों ने उसे नियंत्रित किया और उसकी निगरानी बढ़ा दी गई।

मामला ऐसे समय में सामने आया है जब जार्डन के खिलाफ दाखिल चार्जशीट के बाद अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अदालत में जेल प्रशासन की ओर से भेजे गए पत्र पर भी विचार किया जा सकता है।

जेल प्रशासन ने अदालत से क्यों मांगी हथकड़ी की अनुमति?

गोरखपुर जेल प्रशासन के मुताबिक जार्डन का व्यवहार लगातार परेशानी का कारण बन रहा है। जेल अधीक्षक ने 14 सितंबर को महराजगंज के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को पत्र भेजकर बंदी की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी।

पत्र में जेल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट और जेल की व्यवस्था प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है। प्रशासन का कहना है कि बंदी के व्यवहार को देखते हुए उसकी विशेष निगरानी की जा रही है।

जेल प्रशासन के अनुसार, जार्डन के साथ ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। कथित तौर पर नंबरदार के साथ भी आक्रामक व्यवहार किए जाने के बाद जेलकर्मी उसके पास अकेले जाने से बच रहे हैं।

इसी परिस्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन चाहता है कि अदालत से अनुमति मिलने पर उसे हथकड़ी में रखा जा सके। जेल अधीक्षक का कहना है कि इससे बंदी को नियंत्रित रखने और जेल कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, हथकड़ी में रखने की अनुमति देना या नहीं देना अदालत के अधिकार क्षेत्र का विषय है। इसलिए जेल प्रशासन के अनुरोध पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

जार्डन पर जेल में तोड़फोड़ और बंदीरक्षक का गला दबाने का आरोप

जेल प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार जार्डन ने जेल के भीतर बन रही एक दीवार को गिरा दिया। इसके बाद उसने अपने बैरक में लगे पंखे और बल्ब को भी तोड़ दिया।

सबसे गंभीर आरोप एक बंदीरक्षक से जुड़े हैं। प्रशासन का कहना है कि जार्डन ने कथित तौर पर बंदीरक्षक का गला दबाने की कोशिश की। घटना के बाद जेल कर्मचारियों ने मिलकर उसे काबू में किया।

इन घटनाओं के बाद जेल में उसकी निगरानी बढ़ा दी गई। प्रशासन की चिंता केवल संपत्ति के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि जेलकर्मियों और अन्य बंदियों की सुरक्षा भी इसका प्रमुख कारण बताई जा रही है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये बातें जेल प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। किसी आरोपी के खिलाफ आरोप लगना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है।

महराजगंज से गोरखपुर जेल क्यों भेजा गया था?

जार्डन को पहले महराजगंज जिला कारागार में रखा गया था। उसकी गतिविधियों को देखते हुए बाद में उसे गोरखपुर जिला कारागार स्थानांतरित किया गया।

जेल प्रशासन की ओर से अब कहा जा रहा है कि गोरखपुर जेल में आने के बाद भी उसकी कथित आक्रामक गतिविधियों से परेशानी बनी हुई है। इसी कारण गोरखपुर जेल अधीक्षक ने अदालत से हथकड़ी में रखने की अनुमति मांगी है।

इस मामले में जार्डन की ओर से विधिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े उसके लीगल डिफेंस काउंसिल ने जेल प्रशासन की ओर से भेजे गए पत्र की पुष्टि की है।

मंगलवार की सुनवाई के दौरान यह पत्र अदालत के सामने रखे जाने की संभावना है। इसके बाद अदालत जेल प्रशासन की मांग और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए आवश्यक आदेश दे सकती है।

बिना वीजा-पासपोर्ट नेपाल जाने के दौरान पकड़ा गया था

जेल में बंद जार्डन के मामले की शुरुआत जुलाई में हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उसे 11 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास नेपाल जाने की कोशिश के दौरान पकड़ा गया था। उसके पास वीजा और पासपोर्ट नहीं होने की बात सामने आई थी।

इसके बाद उसे सोनौली पुलिस को सौंपा गया। मामले में आव्रजन और

विदेशी कानूनों से जुड़े प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

शुरुआत में उसकी नागरिकता को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी।

इसी वजह से पुलिस की चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया में देरी हुई।

बाद में 26 अगस्त की सुनवाई के दौरान उसकी ब्रिटिश नागरिकता की पुष्टि हुई।

इसके बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और मामले में धोखाधड़ी से संबंधित तीन धाराएं भी जोड़ी गईं।

अब मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए जार्डन से जुड़े आरोपों और

उसके खिलाफ दर्ज मामलों में अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

दिल्ली के मामले में भी अदालत में पेशी

फिलहाल जार्डन को एक अलग मामले में अदालत के समक्ष पेश करने के लिए

दिल्ली ले जाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके कारण महराजगंज में होने वाली

सुनवाई में उसकी व्यक्तिगत पेशी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।

इसी बीच गोरखपुर जेल प्रशासन की हथकड़ी में रखने की मांग भी अदालत के सामने आ सकती है।

यदि अदालत अनुमति देती है तो जेल प्रशासन उस आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा।

इस पूरे मामले में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। एक विदेशी नागरिक के जेल में बंद होने के कारण

उसकी निगरानी, कानूनी सहायता और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े नियमों का पालन भी जरूरी है।

जेल प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती

जार्डन के मामले ने जेल प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है।

एक तरफ उसे बंदी की सुरक्षा और उसके कानूनी अधिकारों का ध्यान रखना है, वहीं दूसरी ओर जेल कर्मचारियों,

अन्य बंदियों और जेल की संपत्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है।

यदि कोई बंदी आक्रामक व्यवहार करता है या जेल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो प्रशासन के लिए

उसे नियंत्रित करना जरूरी हो जाता है। लेकिन इसके साथ ही किसी भी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए

कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के आदेश का पालन भी आवश्यक है।

इसी वजह से जेल प्रशासन ने सीधे अपनी ओर से निर्णय लेने के बजाय

अदालत से अनुमति मांगने का रास्ता अपनाया है।

अदालत की सुनवाई पर टिकी नजर

जार्डन के मामले में 15 सितंबर को सुनवाई निर्धारित है। इस सुनवाई में चार्जशीट से जुड़े

पहलुओं के साथ जेल प्रशासन द्वारा भेजे गए पत्र पर भी चर्चा हो सकती है।

अदालत जेल प्रशासन द्वारा बताए गए घटनाक्रम, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और

बंदी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है।

मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान यह भी स्पष्ट होगा कि

जेल में हुई घटनाओं के संबंध में लगाए गए

आरोपों की स्थिति क्या है और उन पर कोई अलग कानूनी कार्रवाई आवश्यक है या नहीं।

फिलहाल जेल प्रशासन का मुख्य उद्देश्य स्थिति को नियंत्रण में रखना और

किसी अप्रिय घटना को रोकना बताया जा रहा है।

विदेशी नागरिक होने के कारण मामला और संवेदनशील

जार्डन के ब्रिटिश नागरिक होने के कारण यह मामला सामान्य जेल प्रकरणों की तुलना में

कुछ अधिक संवेदनशील है। विदेशी नागरिक से जुड़े मामलों में आव्रजन स्थिति, नागरिकता,

कानूनी प्रतिनिधित्व और संबंधित देश के साथ आवश्यक औपचारिकताओं का भी महत्व होता है।

हालांकि, जेल के भीतर आचरण से जुड़े नियम विदेशी और भारतीय बंदियों के लिए

जेल प्रशासन की निर्धारित व्यवस्था के तहत ही लागू होते हैं।

इस मामले में भी प्रशासन को सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

अदालत से हथकड़ी में रखने की अनुमति मांगना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

FAQ: गोरखपुर जेल में ब्रिटिश नागरिक जार्डन का मामला

Q1. जार्डन कौन है?
जार्डन ब्रिटिश नागरिक है, जिसे जुलाई में भारत-नेपाल सीमा के पास बिना वीजा-

पासपोर्ट नेपाल जाने के दौरान पकड़े जाने के बाद कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

Q2. गोरखपुर जेल प्रशासन ने हथकड़ी में रखने की अनुमति क्यों मांगी?
जेल प्रशासन का कहना है कि जार्डन ने कथित तौर पर जेल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और

कर्मचारियों के साथ आक्रामक व्यवहार किया। उसकी गतिविधियों को देखते हुए

प्रशासन ने अदालत से हथकड़ी में रखने की अनुमति मांगी है।

Q3. जार्डन पर जेल में क्या नुकसान करने का आरोप है?
जेल प्रशासन के अनुसार उसने निर्माणाधीन दीवार गिराने के साथ अपने बैरक में

लगा पंखा और बल्ब तोड़ दिया। उस पर एक बंदीरक्षक का गला दबाने की कोशिश का भी आरोप है।

Q4. जार्डन को गोरखपुर जेल क्यों भेजा गया था?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार उसकी गतिविधियों को देखते हुए

उसे पहले महराजगंज जिला कारागार से गोरखपुर जेल स्थानांतरित किया गया था।

Q5. क्या अदालत ने उसे हथकड़ी में रखने की अनुमति दे दी है?
अभी जेल प्रशासन ने अदालत से अनुमति मांगी है। अनुमति पर फैसला न्यायालय की सुनवाई के बाद होगा।

निष्कर्ष

गोरखपुर जिला कारागार में बंद ब्रिटिश नागरिक जार्डन की कथित आक्रामक गतिविधियों ने

जेल प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जेल प्रशासन का दावा है कि उसने जेल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के

साथ कर्मचारियों के साथ भी कथित तौर पर हिंसक व्यवहार किया। इसी वजह से

विशेष निगरानी के बीच उसे हथकड़ी में रखने की अनुमति अदालत से मांगी गई है।

जार्डन के खिलाफ मूल मामला भारत-नेपाल सीमा पर बिना आवश्यक दस्तावेजों के

नेपाल जाने की कोशिश से जुड़ा है। उसकी नागरिकता की पुष्टि के बाद पुलिस ने

चार्जशीट दाखिल की और मामले में अतिरिक्त धाराएं जोड़ी गईं।

अब जेल में उसके व्यवहार से जुड़े आरोपों और हथकड़ी की मांग पर अदालत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

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