गोरखपुर को बनाया जाएगा गारबेज फ्री सिटी
गोरखपुर शहर अब स्वच्छता के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। नगर निगम ने शहर को पूरी तरह गारबेज फ्री बनाने का संकल्प लिया है और इसके लिए 13 वार्डों को आदर्श मॉडल के रूप में विकसित किया है। इन वार्डों में नई सफाई व्यवस्था पूरी तरह लागू कर दी गई है, जिससे आने वाले समय में पूरे शहर की सफाई में बड़ा बदलाव आएगा। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन के तहत की जा रही है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘स्वच्छ उत्तर प्रदेश’ विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
13 आदर्श वार्डों में क्या है खास?
गोरखपुर नगर निगम ने शहर के 13 चुनिंदा वार्डों को मॉडल वार्ड बनाया है। इनमें विभिन्न क्षेत्रों जैसे आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित इलाके शामिल हैं, ताकि हर तरह की स्थिति में मॉडल सफल साबित हो। इन वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण 100% लागू कर दिया गया है। हर घर से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग इकट्ठा किया जा रहा है।
नगर निगम आयुक्त ने बताया कि इन वार्डों में विशेष सफाई दल तैनात किए गए हैं, जो रोजाना सुबह-शाम सफाई करते हैं। सड़कों पर कचरा ढेर नहीं लगने दिया जा रहा। साथ ही, कंपोस्टिंग यूनिट और मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) स्थापित की गई हैं, जहां गीले कचरे से खाद और सूखे कचरे से रिसाइकिल सामग्री बनाई जा रही है। स्थानीय निवासियों की भागीदारी भी बढ़ाई गई है – आरडब्ल्यूए और स्वयंसेवी संगठनों को जोड़ा गया है।
सफाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव: क्या होगा नया?
पुरानी व्यवस्था में कचरा संग्रहण अनियमित था और सेग्रिगेशन पर ध्यान नहीं दिया जाता था। अब नई व्यवस्था में जीपीएस युक्त वाहन सफाई के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं, जिनकी रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। नगर निगम ऐप के जरिए नागरिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं और उसका तुरंत निस्तारण होता है।
बड़ा बदलाव यह है कि प्लास्टिक कचरे पर सख्ती की जा रही है। सिंगल-यूज प्लास्टिक पर जुर्माना लगाया जा रहा है। साथ ही, बड़े कॉमर्शियल क्षेत्रों और होटलों से बल्क वेस्ट जेनरेटर फीस वसूली जा रही है। इन 13 मॉडल वार्डों के सफल होने के बाद पूरी व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से शेष 57 वार्डों में लागू की जाएगी। लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक गोरखपुर पूरी तरह गारबेज फ्री सिटी बन जाए।
स्वच्छता रैंकिंग में सुधार की उम्मीद
पिछले कुछ वर्षों में गोरखपुर की स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग में गिरावट आई थी,
लेकिन यह नई पहल रैंकिंग सुधारने में मदद करेगी। नगर निगम ने इसके लिए अतिरिक्त बजट भी आवंटित किया है।
सफाई कर्मियों को नई यूनिफॉर्म, उपकरण और ट्रेनिंग दी जा रही है।
साथ ही, स्कूलों और कॉलोनियों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं,
ताकि लोग कचरा फेंकने की बजाय सेग्रिगेशन करें।
मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा, “गोरखपुर को स्वच्छ और सुंदर बनाने का सपना अब साकार हो रहा है।
13 आदर्श वार्डों का मॉडल सफल रहा तो हम पूरे शहर को गारबेज फ्री बना देंगे।”
स्थानीय निवासियों ने भी इस पहल की सराहना की है।
कई वार्डों में सड़कें पहले से ज्यादा साफ दिख रही हैं और बदबू की समस्या कम हुई है।
चुनौतियां और आगे की राह
हालांकि चुनौतियां भी हैं। कुछ इलाकों में लोगों की आदतें बदलना मुश्किल है और अवैध डंपिंग अभी भी होती है।
नगर निगम ने इसके लिए सीसीटीवी लगाने और चौकीदार तैनात करने की योजना बनाई है।
लैंडफिल साइट का भी आधुनिकीकरण किया जा रहा है, ताकि कचरा वैज्ञानिक तरीके से डिस्पोज हो।