फोरलेन निर्माण में
भटहट-बांस फोरलेन में ग्रामीणों का विरोध: काम रुकवाया
गोरखपुर जिले के भटहट क्षेत्र में भटहट-बांस फोरलेन सड़क निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। शुक्रवार को बड़हरिया गांव के सामने नाली (नाला) निर्माण के लिए जेसीबी से खोदाई शुरू हुई। तभी करीब 20 ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर काम रोक दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि उनकी जमीन की रजिस्ट्री नहीं हुई है और मुआवजा भी नहीं मिला, फिर भी निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। विरोध के बाद पीडब्ल्यूडी की टीम ने खोदाई रोक दी और मामले को सुलझाने का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों के प्रमुख आरोप और मांगें
बड़हरिया गांव के निवासी अख्तर, मजहर, नसुरुल्लाह, लाल बहादुर निषाद, रामचंद्र, कबीर और सुलेमान ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण और नाला निर्माण के लिए उनकी जमीन ली जा रही है, लेकिन अभी तक जमीन की रजिस्ट्री नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए जेसीबी से खोदाई शुरू कर दी गई, जो सरकारी नियमों के खिलाफ है। ग्रामीणों ने कहा कि मुआवजा न मिलने और रजिस्ट्री न होने से वे आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। वे चाहते हैं कि पहले रजिस्ट्री और मुआवजा पूरा हो, उसके बाद ही काम शुरू हो।
पीडब्ल्यूडी अधिकारी का बयान
लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता उमाशंकर ने मौके पर ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों को सोमवार को रजिस्ट्री के लिए बुलाया गया है। रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नाला निर्माण सहित अन्य कार्य दोबारा शुरू किए जाएंगे। अधिकारी ने आश्वासन दिया कि कोई भी नियमों के खिलाफ काम नहीं होगा और सभी प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन हस्तांतरण किया जाएगा।
फोरलेन प्रोजेक्ट का महत्व
भटहट-बांस फोरलेन सड़क निर्माण उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना का हिस्सा है। यह सड़क गोरखपुर को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और क्षेत्रीय विकास में मदद करेगी। प्रोजेक्ट में नाली निर्माण, चौड़ीकरण और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य शामिल हैं। हालांकि, भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के मुद्दे कई बार विवाद का कारण बनते हैं। इस घटना से साफ है कि ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ी है और वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं।
ग्रामीणों का गुस्सा और सड़क सुरक्षा का सवाल
ग्रामीणों ने कहा कि अगर रजिस्ट्री और मुआवजा नहीं हुआ तो वे आगे भी काम नहीं होने देंगे। कई ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान उनकी खेती योग्य जमीन प्रभावित हो रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सहायता नहीं मिली। यह मामला भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के प्रावधानों पर भी सवाल उठाता है, जिसमें प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास का प्रावधान है।
आगे की संभावनाएं
सोमवार को रजिस्ट्री होने के बाद यदि ग्रामीण संतुष्ट हुए तो काम फिर शुरू हो जाएगा।
अन्यथा विरोध और तेज हो सकता है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को ग्रामीणों से संवाद बनाए रखने और
पारदर्शी तरीके से प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी जा रही है।
यह घटना गोरखपुर जिले में चल रहे अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए भी सबक है।
विकास और अधिकारों में संतुलन जरूरी
भटहट-बांस फोरलेन प्रोजेक्ट विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
बिना रजिस्ट्री और मुआवजे के काम रोकना ग्रामीणों की जागरूकता दिखाता है। उम्मीद है कि
सोमवार को बातचीत से मामला सुलझ जाएगा और निर्माण कार्य सुचारू रूप से चलेगा।
गोरखपुर में ऐसी घटनाएं विकास प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का संदेश देती हैं
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