एबीवीपी पदाधिकारी ने किया आत्मदाह का प्रयास – गोरखपुर विश्वविद्यालय में मचा हड़कंप
गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर मंगलवार की शाम अचानक तनाव और अफरातफरी का केंद्र बन गया, जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पदाधिकारी और गोरखपुर विभाग के संगठन मंत्री राजवर्धन ने पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। इस घटना से न केवल छात्र-राजनीति बल्कि पूरे विश्वविद्यालय में सनसनी फैल गई।
घटना की शुरुआत
- जानकारी के अनुसार, मंगलवार की शाम लगभग 5:30 बजे, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मेन गेट पर एबीवीपी कार्यकर्ताओं द्वारा जयप्रकाश नारायण की जयंती मनाई जा रही थी।
- कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे और कई नेताओं ने वक्तव्य दिया।
- इस दौरान लगे पोस्टरों में महापुरुषों के चित्र प्रदर्शित किए गए थे, जिनमें भगवान बुद्ध और संत कबीर की तस्वीरें भी शामिल थीं।
- आरोप है कि पोस्टर में अन्य महापुरुषों को उचित सम्मान नहीं दिया गया।
- इसी मुद्दे को लेकर छात्रों के दो गुटों में कहासुनी और विवाद हो गया।
विवाद का कारण
- उपस्थित छात्रों ने आरोप लगाया कि जिन महापुरुषों ने समाज और शिक्षा को नई दिशा दी, उनके चित्रों और योगदान का सम्मान नहीं किया गया।
- इसको लेकर माहौल गरमा गया और दोनों गुटों के बीच नारेबाजी भी हुई।
- मौके पर मौजूद एबीवीपी के विभाग संगठन मंत्री राजवर्धन ने खुद को अपमानित और आहत महसूस किया।
- उन्होंने यह आरोप लगाया कि उनके गुट के महापुरुषों को सम्मान नहीं दिया गया और उनके योगदान को दरकिनार किया गया।
- इसी आक्रोश में उन्होंने आत्मदाह का कदम उठाने का निर्णय लिया।
आत्मदाह का प्रयास
- राजवर्धन अपने साथ पेट्रोल की बोतल लेकर आए थे।
- विवाद गहराने के बाद उन्होंने अचानक अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेल लिया।
- इससे मौके पर मौजूद छात्रों और कार्यकर्ताओं में हड़कंप मच गया।
- प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राजवर्धन ने खुद को आग लगाने का प्रयास किया।
- हालांकि, इससे पहले ही कुछ छात्रों और पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।
पेट्रोल से आंख में चोट
- आत्मदाह की कोशिश के दौरान पेट्रोल की कुछ मात्रा उनकी आंख में चली गई।
- पेट्रोल का असर इतना तेज था कि उनकी आंखों में जलन और सूजन शुरू हो गई।
- देखते ही देखते उनकी हालत बिगड़ने लगी।
- मौके पर मौजूद छात्रों ने तुरंत शोर मचाया और पुलिस को सूचना दी।
- मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें तुरंत अस्पताल भेजा।
अस्पताल में भर्ती
- पुलिस ने राजवर्धन को एंबुलेंस की मदद से गोरखपुर जिला अस्पताल पहुँचाया।
- वहां डॉक्टरों ने उनका प्राथमिक उपचार किया।
- डॉक्टरों ने बताया कि पेट्रोल की वजह से उनकी आंख और चेहरे पर असर हुआ है।
- उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
- बाद में परिवार के लोग उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए, जहाँ फिलहाल उनका इलाज चल रहा है।
छात्रों में रोष और अफरातफरी
- आत्मदाह की कोशिश की खबर फैलते ही विश्वविद्यालय परिसर में अफरातफरी मच गई।
- बड़ी संख्या में छात्र अस्पताल की ओर दौड़े।
- एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने इसे अपने संगठन और महापुरुषों के सम्मान से जोड़ते हुए कड़ा विरोध जताया।
- दूसरी ओर, प्रतिद्वंद्वी गुट ने आरोप लगाया कि यह कदम केवल राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया।
- इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी छात्रों के बीच बहस शुरू हो गई।
पुलिस की कार्रवाई
- पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।
- पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों गुटों की ओर से बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
- कैंट थाना प्रभारी सूरज सिंह ने कहा कि घटना के पीछे की असली वजह की जांच की जा रही है।
- उन्होंने कहा कि फिलहाल मामले की गहन जांच जारी है।
- पुलिस ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
परिवार की प्रतिक्रिया
- राजवर्धन के परिवार ने घटना की खबर सुनते ही अस्पताल का रुख किया।
- परिजनों का कहना है कि राजवर्धन ने हमेशा संगठन और समाज के लिए काम किया है।
- वे भावुक होकर बोले कि उनके बेटे ने ऐसा कदम आहत होकर उठाया।
- उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
- परिवार का कहना है कि अगर समय रहते उन्हें रोका न जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका
- विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना पर चिंता जताई।
- कुलपति कार्यालय की ओर से कहा गया कि छात्रों की शिकायतों और मांगों को गंभीरता से सुना जाएगा।
- प्रशासन ने कहा कि किसी भी गुट को भड़काने या विवाद को बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- अधिकारियों ने पुलिस को सहयोग करने का आश्वासन दिया।
- साथ ही छात्रों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की अपील की गई।
छात्र राजनीति की पृष्ठभूमि
- गोरखपुर विश्वविद्यालय में लंबे समय से छात्र राजनीति का दबदबा रहा है।
- एबीवीपी, एनएसयूआई और अन्य छात्र संगठन यहाँ सक्रिय रहते हैं।
- कई बार छोटे-छोटे मुद्दों पर बड़े विवाद खड़े हो जाते हैं।
- छात्र संगठन इन विवादों को अपने राजनीतिक एजेंडे से भी जोड़ते हैं।
- आत्मदाह का यह प्रयास छात्र राजनीति में बड़े तनाव की ओर इशारा करता है।
घटना के दूरगामी प्रभाव
- इस घटना ने छात्र राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।
- सवाल उठ रहा है कि छात्र किस हद तक कट्टरता और आवेश में जा रहे हैं।
- आत्मदाह जैसा कदम न केवल उनकी जिंदगी को खतरे में डालता है बल्कि शिक्षा के माहौल को भी प्रभावित करता है।
- विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की घटनाओं से विश्वविद्यालय की छवि धूमिल होती है।
- अगर ऐसे मामलों को समय रहते नहीं रोका गया तो इसका असर आने वाले छात्रसंघ चुनावों पर भी पड़ सकता है।