कैंपस में सख्ती का नया दौर
दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU Gorakhpur University) ने अपने परिसर में धरना, प्रदर्शन, जुलूस या किसी भी राजनीतिक गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। 3 फरवरी 2026 को कुलपति प्रोफेसर डॉ. राजेश सिंह द्वारा जारी सर्कुलर में UGC के नवीनतम दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए यह फैसला लिया गया। UGC के नए नियमों, विशेषकर Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 के विवाद के बीच यह कदम उठाया गया है, जो कैंपस में जाति-आधारित भेदभाव रोकने के लिए बने हैं लेकिन छात्रों में व्यापक विरोध पैदा कर रहे हैं। छात्र संगठन इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं, जबकि प्रशासन शैक्षणिक शांति और NEP 2020 के अनुपालन का दावा कर रहा है।
UGC नियमों का पालन क्यों जरूरी? विवाद की पूरी पृष्ठभूमि
UGC ने जनवरी 2026 में Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 अधिसूचित किए, जो 2012 के नियमों को अपडेट करते हैं। इनमें उच्च शिक्षा संस्थानों को Equity Committees गठित करने का आदेश है, जो SC, ST, OBC, PwD और महिलाओं के सदस्यों से बने होंगे। उद्देश्य कैंपस में जाति-आधारित भेदभाव रोकना और समावेश सुनिश्चित करना है। नियम कहते हैं कि धरना-प्रदर्शन से पढ़ाई प्रभावित होती है, जो NEP 2020 के खिलाफ है। गोरखपुर विश्वविद्यालय में हाल के फीस वृद्धि, हॉस्टल सुविधा और परीक्षा पैटर्न पर धरनों के बाद UGC ने नोटिस जारी किया। एक ट्रैक्टर रैली जैसे उल्लंघनों के बाद सर्कुलर जारी हुआ। सुरक्षा गार्ड्स बढ़ाए गए हैं। यह नियम राष्ट्रीय स्तर पर लागू हैं, लेकिन गोरखपुर में राजनीतिक सक्रियता के कारण विवाद ज्यादा भड़का।
छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया: विरोध और कानूनी कदम की धमकी
ABVP के स्थानीय अध्यक्ष ने इसे “लोकतंत्र का गला घोंटना” बताया। NSUI ने #SaveStudentVoice कैंपेन चलाया। संगठनों ने 5 फरवरी को गेट पर शांतिपूर्ण विरोध की योजना बनाई, लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई की चेतावनी दी। यूपी के अन्य विश्वविद्यालयों जैसे लखनऊ और कानपुर में भी समान नियम हैं। पूर्व छात्र नेता रवि प्रकाश ने कहा कि 2024 के प्रदर्शनों से परीक्षाएं प्रभावित हुईं, UGC ने फंडिंग रोक की धमकी दी थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए जरूरी है, लेकिन छात्रों को वैकल्पिक मंच जैसे छात्र परिषद बैठकें उपलब्ध करानी चाहिए।
प्रशासन का पक्ष: शांति और शैक्षणिक उत्कृष्टता सुनिश्चित
कुलपति डॉ. राजेश सिंह ने कहा, “UGC नियमों का पालन न करने से रैंकिंग और NAAC ग्रेडिंग प्रभावित होती है। हम शांतिपूर्ण चर्चा के लिए तैयार हैं।” सर्कुलर में शिकायत निवारण सेल का जिक्र है। गोरखपुर में सामाजिक-राजनीतिक मुद्दे गर्म रहते हैं, इसलिए प्रतिबंध कैंपस को सुरक्षित बनाएगा। पिछले वर्षों में किसान आंदोलन समर्थन (2023) और पर्यावरण प्रदर्शन (2025) जैसे मामले हुए। UGC नियम इनसे बचाव का हथियार हैं। छात्र अब सोशल मीडिया या बाहर मंचों पर अपनी बात रखेंगे। BHU ने भी समान आदेश जारी किया है।
भविष्य की संभावनाएं: संवाद से समाधान?
यह प्रतिबंध यूपी शिक्षा क्षेत्र में ट्रेंड सेट कर सकता है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय 36 जिलों के 500+ कॉलेजों का समन्वय करता है।
छात्र UGC नियमों में छूट चाहते हैं। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने ट्वीट किया, “
शिक्षा का मंदिर शांति का प्रतीक हो।” अदालत में चुनौती संभव है।
फिलहाल कैंपस शांत है, लेकिन तनाव बरकरार। UGC नियमों पर विवाद जारी रहेगा,
लेकिन शैक्षणिक उत्कृष्टता प्राथमिकता बनी रहेगी। छात्रों को रचनात्मक तरीके अपनाने होंगे
