गोरखपुर जिले की रामगढ़ झील, जो कभी मछुआरों की जीविका का प्रमुख स्रोत थी, आज जहर की तरह बन चुकी है। यहां मछलियों का भयावह कत्लेआम हो रहा है, जिससे पूरे मछुआरा समुदाय में हाहाकार मच गया है। फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस संकट पर गहरी चिंता जताई है और उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री से तत्काल जांच व सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है।
रामगढ़ झील: गोरखपुर की शान और मछुआरों की आजीविका का स्रोत
गोरखपुर शहर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में बसा रामगढ़ ताल (रामगढ़ झील) उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा प्राकृतिक जलाशय है। लगभग 723 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह तालाब 18 किलोमीटर के परिमाप के साथ ऐतिहासिक महत्व रखता है। ईसा पूर्व छठी शताब्दी में राप्ती नदी के मार्ग परिवर्तन से बने इस तालाब ने सदियों से स्थानीय मछुआरों को जीविका प्रदान की है।
यहां सैकड़ों परिवार मछली पालन और मत्स्य पकड़ पर निर्भर हैं। पर्यटन के नजरिए से भी यह पूर्वांचल का ‘मरीन ड्राइव’ बन चुका है, जहां क्रूज सेवा, वाटर स्पोर्ट्स और सुंदर घाट विकसित हो रहे हैं। लेकिन हाल के वर्षों में प्रदूषण ने इसकी सुंदरता और पारिस्थितिकी को गंभीर खतरे में डाल दिया है।
मछलियों का भयावह कत्लेआम: क्या हो रहा है रामगढ़ झील में?
हाल ही में रामगढ़ झील का पानी अचानक जहरीला हो गया, जिसके परिणामस्वरूप हजारों मछलियां तड़प-तड़प कर मर गईं। स्थानीय मछुआरों के अनुसार, पानी से तेज दुर्गंध आ रही है और मछलियां सतह पर तैरती दिख रही हैं। यह स्थिति न केवल मछली पालन को तबाह कर रही है, बल्कि आसपास के निवासियों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।
पिछले कुछ घटनाक्रमों (जैसे 2024 में हुई घटनाएं) में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में ऑक्सीजन की कमी को मुख्य कारण बताया गया। मछुआरों का कहना है कि यह कत्लेआम बार-बार हो रहा है, जिससे लाखों का नुकसान हो रहा है। फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस संकट पर गहरी चिंता जताते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से तत्काल जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और झील की सफाई की गुहार लगाई है।

जहर बन गया पानी: प्रदूषण के प्रमुख कारण
रामगढ़ झील में प्रदूषण के कई स्रोत हैं:
- औद्योगिक कचरा – आसपास के कारखानों और मिलों से निकलने वाला
- विषैला अपशिष्ट बिना ट्रीटमेंट के झील में बह रहा है।
- कृषि रसायन – खेतों से बहकर आने वाले कीटनाशक और उर्वरक भारी धातुओं के स्तर को बढ़ा रहे हैं।
- सीवर और नालों का अनियंत्रित बहाव – आसपास की कॉलोनियों का गंदा पानी सीधे झील में गिर रहा है,
- जिससे BOD (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) बढ़ गया है और घुलित ऑक्सीजन कम हो रहा है।
- मानवीय अतिक्रमण – अतिक्रमण और कचरा फेंकने से झील का क्षेत्रफल घटा है और पानी की गुणवत्ता बिगड़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारी धातुओं और रसायनों से मछलियों की श्वसन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो पूरा पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो सकता है।
फिशरमैन आर्मी की अपील और समाधान की जरूरत
फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यह संकट मछुआरा समुदाय की
आजीविका को खत्म कर सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि:
- तत्काल जल गुणवत्ता जांच कराई जाए।
- प्रदूषण के स्रोतों पर सख्त कार्रवाई हो।
- झील की सफाई और संरक्षण के लिए विशेष योजना लागू की जाए।
सरकार द्वारा रामगढ़ ताल को वेटलैंड का दर्जा और पर्यटन विकास की
पहल सराहनीय है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती है।
रामगढ़ झील को बचाना की मांग
रामगढ़ झील सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि गोरखपुर की सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहर है।
मछलियों का यह कत्लेआम चेतावनी है कि प्रदूषण को रोकना जरूरी है।
स्थानीय प्रशासन, प्रदूषण बोर्ड और समुदाय के संयुक्त प्रयास से ही इसे फिर से जीवंत बनाया जा सकता है।