तालाब प्रदूषित, सफाई का दावा खोखला
गोरखपुर में एक तरफ सफाई अभियान चल रहे हैं, तो दूसरी तरफ शहर के नालों का गंदा पानी सीधे रामगढ़ताल में गिर रहा है। 16 दिसंबर 2025 की यह स्थिति तालाब को प्रदूषित कर रही है और मछलियां मर रही हैं। अमर उजाला और दैनिक जागरण की रिपोर्ट्स के अनुसार, शहर के कई नाले रामगढ़ताल में खुलते हैं, जिनसे सीवेज और कचरा पानी में मिल रहा है।
हाल ही में तालाब में हजारों मछलियां मरी मिलीं, जिसका कारण प्रदूषण बताया जा रहा है। नगर निगम और GDA सफाई का दावा करते हैं, लेकिन धरातल पर हालात बदतर हैं। स्थानीय लोग परेशान हैं और तालाब की सफाई की मांग कर रहे हैं। यह दोहरा चेहरा गोरखपुर के विकास और पर्यावरण संरक्षण पर सवाल खड़े कर रहा है।
सफाई अभियान का दावा: नगर निगम की मुहिम
नगर निगम और GDA लगातार सफाई अभियान चला रहे हैं। मुख्य दावे:
- स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफाई।
- नालों की नियमित सफाई।
- तालाब किनारे कचरा हटाना।
- डस्टबिन और जागरूकता कार्यक्रम।
निगम का कहना है कि शहर स्वच्छ हो रहा है। लेकिन रामगढ़ताल की स्थिति दावों की पोल खोल रही है।
दूसरी तरफ: नालों का गंदा पानी तालाब में
शहर के कई नाले रामगढ़ताल में खुलते हैं। मुख्य समस्या:
- सीवेज का पानी सीधे तालाब में।
- प्लास्टिक, कचरा और केमिकल मिलावट।
- बारिश में गंदगी और बढ़ती है।
- तालाब का पानी काला और बदबूदार।
- ऑक्सीजन कम, मछलियां मर रही हैं।
हाल ही में 8 क्विंटल मरी मछलियां निकाली गईं।
प्रदूषण का कारण: लापरवाही और अनियोजित विकास
प्रदूषण के मुख्य कारण:
- नालों की सफाई नहीं।
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अपर्याप्त।
- अवैध कनेक्शन।
- आसपास बस्तियां और फैक्टरियां।
- जागरूकता की कमी।