गोरखपुर मोहद्दीपुर ओवरब्रिज हादसा
गोरखपुर में मोहद्दीपुर ओवरब्रिज पर हुई भीषण दुर्घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर ने BRD मेडिकल कॉलेज के थर्ड ईयर MBBS छात्र आकाश पांडेय (22) की जान ले ली, जबकि एक अन्य व्यक्ति डॉ. उमेश शर्मा (डॉक्टर के भाई) की इलाज के दौरान मौत हो गई। आरोपी चालक गोल्डेन साहनी (30), जो प्रॉपर्टी डीलर है, को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया कि वह ट्रैफिक नियम तोड़ने का पुराना आदी है। पिछले एक साल में उसके खिलाफ 26 चालान कट चुके हैं, जिसमें 19 ओवरस्पीडिंग, दो डेंजर ड्राइविंग और बाकी नो-पार्किंग जैसे उल्लंघन शामिल हैं।
हादसे का विवरण: रॉन्ग साइड से तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर का कहर
हादसा बुधवार रात करीब 9-10 बजे शाहपुर थाना क्षेत्र के मोहद्दीपुर-कौवाबाग ओवरब्रिज पर हुआ। गोल्डेन साहनी अपनी काली फॉर्च्यूनर (UP 32 LR 0013) में रॉन्ग साइड से आ रहा था। तेज रफ्तार में उसने स्कूटी सवार आकाश पांडेय को जोरदार टक्कर मारी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि आकाश उछलकर ओवरब्रिज की रेलिंग में फंस गए और करीब 30 मिनट तक लटके रहे। मौके पर उनकी मौत हो गई। हादसे में अन्य स्कूटी/बाइक सवार भी घायल हुए, जिनमें उमेश शर्मा शामिल थे, जिनकी बाद में एम्स में मौत हो गई।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से वाहन ट्रेस किया और गोल्डेन साहनी को घर से गिरफ्तार कर लिया। वाहन जब्त कर लिया गया है। उसके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide not amounting to murder) का मुकदमा दर्ज किया गया है। नशे की आशंका जताई जा रही है, मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है।
गोल्डेन साहनी का बैकग्राउंड: राजनीतिक कनेक्शन और रंगबाजी
गोल्डेन साहनी खुद को निषाद पार्टी से जुड़ा बताता था। वह निषाद पार्टी अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद को “फूफा” कहता था और खुद को भावी ब्लॉक प्रमुख बताता था। सोशल मीडिया पर उसकी एक सेल्फी वायरल हुई, जिसमें वह मंत्री के साथ दिख रहा है, जिसे खुद मंत्री ने शेयर किया था। वह काली गाड़ियों का काफिला लेकर चलता था और
रफ्तार व स्टंट का शौकीन था। पुलिस के अनुसार, उसका रिकॉर्ड
बेहद खराब है – 26 चालान में से ज्यादातर ओवरस्पीडिंग के हैं, जो इस हादसे की वजह बने।
सामाजिक प्रभाव और पुलिस कार्रवाई
यह हादसा होली के मौके पर हुआ, जिसने खुशियों को मातम में बदल दिया।
MBBS छात्र आकाश पांडेय संत कबीर नगर का निवासी था और भविष्य उज्ज्वल था।
परिवार और मेडिकल छात्रों में आक्रोश है। पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है,
लेकिन ऐसे मामलों में राजनीतिक दबाव और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर सवाल उठ रहे हैं।
ट्रैफिक विभाग के आंकड़े बताते हैं कि गोल्डेन जैसे ड्राइवरों की वजह से सड़क हादसे बढ़ रहे हैं।
यह घटना याद दिलाती है कि रफ्तार और नशे का मिश्रण कितना खतरनाक है।
सख्ती जरूरी
गोल्डेन साहनी का केस एक उदाहरण है कि बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्ती बरतनी चाहिए।
गोरखपुर पुलिस जांच जारी रखेगी। पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए और
ऐसे हादसों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है।
