KYC के नाम पर 240 रुपये वसूली
गोरखपुर से उपभोक्ताओं के साथ ठगी और जबरन वसूली का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नौसड़ स्थित कन्हैया गैस एजेंसी, जिसका लाइसेंस पहले ही निलंबित किया जा चुका है, वहां केवाईसी कराने के नाम पर लोगों से पैसे वसूले जा रहे हैं। इस मामले ने प्रशासन और आम जनता के बीच हलचल मचा दी है।
क्या है पूरा मामला
मामले के अनुसार, कन्हैया गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं से केवाईसी कराने के लिए 240 रुपये वसूले जा रहे थे। इतना ही नहीं, एजेंसी संचालक ने केवाईसी के लिए गैस पाइप खरीदना अनिवार्य कर दिया था। जबकि हकीकत यह है कि एजेंसी का लाइसेंस पहले ही निलंबित हो चुका है और उसे केवाईसी करने का अधिकार भी नहीं है।
उपभोक्ताओं से बदसलूकी
जिन उपभोक्ताओं ने पैसे देने से मना किया, उनके साथ बदसलूकी की गई। आरोप है कि एजेंसी संचालक ने एक ग्राहक को गिलास उठाकर मारने तक की धमकी दी। इस पूरी घटना का एक वीडियो और ऑडियो भी सामने आया है, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है।
ऑडियो में सामने आई सच्चाई
वायरल ऑडियो में संचालक यह कहते हुए सुना गया कि “जिससे शिकायत करनी हो कर दो, यहां फ्री में कुछ नहीं होगा।” वह यह भी कहता है कि अगर कोई गैस पाइप नहीं खरीदेगा तो उसका केवाईसी नहीं किया जाएगा। यह बयान उपभोक्ताओं के साथ खुलेआम दबाव बनाने का प्रमाण माना जा रहा है।
उपभोक्ताओं की परेशानी
पेवनपुर की पूजा देवी ने बताया कि वह चार दिनों से केवाईसी कराने के लिए दौड़ रही हैं, लेकिन उन्हें बार-बार परेशान किया जा रहा है। उनके घर में पहले से गैस पाइप होने के बावजूद उन्हें नया पाइप खरीदने के लिए मजबूर किया गया।
हांसूपुर की चंदा देवी ने बताया कि वह पांच दिनों से एजेंसी के चक्कर काट रही हैं। कभी सर्वर डाउन बताया जाता है तो कभी नेटवर्क की समस्या बताकर काम टाल दिया जाता है।
लाइन में लगे लोगों को पहले ही कह दिया जाता है कि बिना पाइप खरीदे केवाईसी नहीं होगा।
प्रशासन का बयान
जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह ने साफ कहा कि
कन्हैया गैस एजेंसी का लाइसेंस निलंबित है और वह केवाईसी करने की
पात्र नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर
एजेंसी संचालक द्वारा केवाईसी के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं, तो
यह पूरी तरह गैरकानूनी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांच और कार्रवाई की तैयारी
मामले के सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है।
अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है और वायरल ऑडियो-वीडियो की भी
जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर एजेंसी संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना है।
गोरखपुर का यह मामला उपभोक्ताओं के साथ हो रही ठगी और सिस्टम की खामियों को उजागर करता है।
ऐसे मामलों में प्रशासन की सख्ती और जागरूकता बेहद जरूरी है ताकि आम लोगों को
परेशानियों का सामना न करना पड़े और दोषियों को समय पर सजा मिल सके
