गोरखपुर की दिव्या सिंह
गोरखपुर की बेटी का बड़ा सपना: साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप
गोरखपुर जिले के पिपरौली ब्लॉक के बनौड़ा गांव की 28 वर्षीय दिव्या सिंह अब देश-विदेश में अपनी बहादुरी से चर्चा बटोरने वाली हैं। दिव्या एक साइकिलिस्ट हैं और उनका लक्ष्य साइकिल से एवरेस्ट के बेस कैंप तक पहुंचना है। यदि वह इस चुनौती को पूरा कर लेती हैं तो वह ऐसा करने वाली दुनिया की पहली भारतीय महिला बन जाएंगी। बुधवार को गोरखपुर के विकास भवन से जिला समाज कल्याण अधिकारी वशिष्ठ नारायण सिंह और जिला विकास अधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर उन्हें नेपाल के लिए रवाना किया।
यात्रा की शुरुआत: काठमांडू से एवरेस्ट बेस कैंप तक
दिव्या सिंह पहले काठमांडू पहुंचेंगी। वहां से वह एवरेस्ट बेस कैंप की यात्रा शुरू करेंगी। उनके साथ कोच उमा सिंह भी रहेंगी, जो खुद पहले ही साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप फतह कर चुकी हैं। उमा सिंह की मौजूदगी दिव्या के लिए न सिर्फ मार्गदर्शन, बल्कि प्रेरणा का स्रोत भी है।
दिव्या सिंह गोरखपुर विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र और गृह विज्ञान में परास्नातक हैं। डीएलएड पूरा करने के बाद वह एक निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। पढ़ाई और नौकरी के साथ-साथ उन्होंने साइकिलिंग को अपना जुनून बनाया है।
दो साल की तैयारी: उत्तराखंड, हिमाचल और नेपाल की पहाड़ियां
दिव्या ने बताया कि एवरेस्ट बेस कैंप की कहानियां सुनकर उनके मन में रोमांच पैदा हुआ। उनका सपना था कि वह वहां पहुंचकर तिरंगा फहराएं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वह पिछले दो साल से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और नेपाल की कठिन पहाड़ियों पर साइकिलिंग कर रही हैं। ऊंचाई, ठंड और ऑक्सीजन की कमी जैसी चुनौतियों से जूझते हुए उन्होंने अपनी फिटनेस और दृढ़ता को मजबूत किया है।
काला पत्थर पर भी पहुंचने का लक्ष्य: विश्व की पहली महिला बनने की कोशिश
कोच उमा सिंह ने बताया कि एवरेस्ट बेस कैंप की ऊंचाई 17,500 फुट है। पिछले फरवरी में चिली की एक महिला साइकिलिस्ट वहां पहुंची थीं, लेकिन भारत की कोई महिला अभी तक नहीं पहुंच पाई है। दिव्या सिंह के साथ ही एक और बड़ा लक्ष्य है – एवरेस्ट क्षेत्र में स्थित ‘काला पत्थर’ नामक जगह। इसकी ऊंचाई 18,500 फुट है। यदि दिव्या वहां पहुंच गईं तो काला पत्थर पर साइकिल से पहुंचने वाली दुनिया की पहली महिला बन जाएंगी।
प्रशासन और समाज से मिला समर्थन
बुधवार को रवाना होने से पहले जिला समाज कल्याण अधिकारी वशिष्ठ नारायण सिंह और अन्य अधिकारियों ने दिव्या को
तिरंगा प्रदान किया और शुभकामनाएं दीं। यह यात्रा न सिर्फ दिव्या की व्यक्तिगत उपलब्धि होगी,
बल्कि गोरखपुर और पूरे उत्तर प्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
दिव्या का संदेश: सपने पूरे करने के लिए मेहनत जरूरी
दिव्या सिंह का मानना है कि सपने बड़े हों तो चुनौतियां भी बड़ी होती हैं, लेकिन लगन और
मेहनत से कुछ भी असंभव नहीं। उनकी यह यात्रा महिलाओं को
साहसिक खेलों और एडवेंचर में आगे आने के लिए प्रेरित करेगी। पूरी दुनिया की निगाहें
अब दिव्या सिंह पर टिकी हैं कि क्या वह इतिहास रच पाएंगी।
गोरखपुर की इस बेटी की बहादुरी और दृढ़ संकल्प की कहानी
हर युवा को यह सिखाती है कि सपनों की ऊंचाई
कोई सीमा नहीं जानती। शुभकामनाएं दिव्या सिंह को – तिरंगा फहराने और नया इतिहास रचने के लिए!
