गोरखपुर एम्स
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में जल्द ही डिजिटल ऑटोप्सी (वर्चुअल ऑटोप्सी) की सुविधा शुरू की जाएगी। इस अत्याधुनिक तकनीक से शव का बिना चीर-फाड़ पोस्टमार्टम किया जा सकेगा। विभिन्न इमेजिंग तकनीकों जैसे CT स्कैन, MRI और अन्य एडवांस्ड इमेजिंग के जरिए मौत के कारणों, आंतरिक चोटों, फ्रैक्चर और अन्य पैथोलॉजी का सटीक पता लगाया जा सकेगा। यह व्यवस्था शुरू होने पर गोरखपुर एम्स उत्तर प्रदेश का ऐसा पहला संस्थान बनेगा जहां डिजिटल ऑटोप्सी उपलब्ध होगी। एम्स में पहले से ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट का डिजिटलाइजेशन शुरू हो चुका है, और नई सुविधा से पारंपरिक चीर-फाड़ से जुड़े विवाद और असहमति के मामले भी कम होंगे।
डिजिटल ऑटोप्सी क्या है और कैसे काम करेगी?
डिजिटल ऑटोप्सी एक नॉन-इनवेसिव (बिना कटिंग) पोस्टमार्टम विधि है। शव को बैग में पैक कर CT या MRI मशीन में रखा जाता है, जहां हजारों इमेजेस (25,000 तक) सेकंडों में जनरेट हो जाती हैं। ये इमेजेस 3D रिकंस्ट्रक्शन के जरिए मौत के कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण करती हैं। इससे आंतरिक रक्तस्राव, हृदय रोग, ट्रॉमा, विषाक्तता या अन्य कारणों का पता लगाना आसान और सटीक होता है। समय भी कम लगता है – पारंपरिक पोस्टमार्टम में घंटों लगते हैं, जबकि डिजिटल में 30-60 मिनट में रिपोर्ट तैयार हो सकती है।
गोरखपुर एम्स फोरेंसिक मेडिसिन विभाग इस सुविधा की तैयारी में जुटा है। एम्स की मीडिया सेल की चेयरपर्सन डॉ. ने बताया कि यह व्यवस्था चीर-फाड़ से इनकार करने वाले परिवारों की समस्या हल करेगी और फोरेंसिक जांच को अधिक वैज्ञानिक बनाएगी। एम्स पहले से ही मेडलेपीआर प्लेटफॉर्म पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट डिजिटल अपलोड कर रहा है, और अब डिजिटल इमेजिंग से आगे बढ़ रहा है।
उत्तर प्रदेश में पहला संस्थान: गोरखपुर एम्स की उपलब्धि
उत्तर प्रदेश में डिजिटल ऑटोप्सी की शुरुआत गोरखपुर एम्स से होने जा रही है, जो पूर्वांचल के लिए बड़ी उपलब्धि है। दिल्ली एम्स में यह सुविधा पहले से उपलब्ध है, लेकिन यूपी में गोरखपुर पहला होगा। इससे मेडिको-लीगल केस, हत्या, दुर्घटना या संदिग्ध मौतों की जांच तेज और सटीक होगी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट तुरंत ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगी, जिससे पुलिस जांच को गति मिलेगी।
अब तक एम्स में 130 से अधिक पोस्टमार्टम हो चुके हैं, और रिपोर्ट डिजिटल सिस्टम से तैयार होती हैं।
लाभ और प्रभाव: फोरेंसिक जांच में क्रांति
- परिवारों की सहमति आसान: चीर-फाड़ से धार्मिक या भावनात्मक आपत्ति वाले परिवार अब सहमत होंगे।
- सटीकता और गति: इमेजिंग से छिपी चोटें भी दिखेंगी, रिपोर्ट तेज तैयार होगी।
- दूसरी राय संभव: डिजिटल रिकॉर्ड से अन्य विशेषज्ञ विश्लेषण कर सकेंगे।
- कानूनी मजबूती: वैज्ञानिक साक्ष्य मजबूत होंगे, कोर्ट में सबूत मजबूत।
- समय और संसाधन बचत: फोरेंसिक टीम अधिक मामलों को हैंडल कर सकेगी।
यह सुविधा गोरखपुर एम्स को पूर्वांचल का अत्याधुनिक फोरेंसिक सेंटर बनाएगी।
योगी सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं में निवेश से गोरखपुर मेडिकल हब बन रहा है।
जल्द शुरू होने वाली डिजिटल ऑटोप्सी से मौत के रहस्यों का वैज्ञानिक खुलासा आसान होगा।
