गोरखपुर के रामगढ़ताल में
गोरखपुर में एक दुखद घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। कैंट थाना क्षेत्र के डिबिया धोबी टोला निवासी लेखपाल संजय त्रिपाठी की 23 वर्षीय बेटी श्रद्धा त्रिपाठी (उर्फ निशु) का शव बुधवार दोपहर रामगढ़ताल में तैरता मिला। युवती तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी और काफी दिनों से मानसिक रूप से परेशान चल रही थी। मंगलवार रात करीब 9 बजे वह घर से अचानक निकल गई थी, जिसके बाद परिजन उसे ढूंढते रहे लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
युवती कब और कैसे लापता हुई?
परिजनों के अनुसार, श्रद्धा मंगलवार रात घर से किसी काम के बहाने बाहर गई थी। काफी देर तक वापस न लौटने पर परिवार ने उसके मोबाइल पर बार-बार कॉल किया लेकिन फोन स्विच ऑफ मिला। रात भर तलाश की गई लेकिन कुछ पता नहीं चला। बुधवार सुबह परिजन कैंट थाने पहुंचे और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत सीसीटीवी फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर तलाश शुरू की।
एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस टीम सक्रिय हो गई थी। इसी बीच दोपहर करीब 12-1:30 बजे रामगढ़ताल में स्थानीय लोगों ने एक युवती का शव तैरता देखा और पुलिस को सूचना दी। रामगढ़ताल और कैंट थाना पुलिस मौके पर पहुंची, शव को बाहर निकाला और शिनाख्त की। पिता संजय त्रिपाठी (जो कुशीनगर में लेखपाल पद पर तैनात हैं) मौके पर पहुंचे और शव को अपनी बेटी श्रद्धा के रूप में पहचाना।
मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने का खुलासा
परिजनों ने पुलिस को बताया कि श्रद्धा काफी दिनों से मानसिक रूप से परेशान थी। उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण परिवार उसे लगातार देखभाल करता था। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के नाते घर की जिम्मेदारियां भी उस पर थीं, लेकिन हाल के दिनों में वह उदास और चिंतित रहती थी। पुलिस प्रथम दृष्टया इसे आत्महत्या का मामला मान रही है, लेकिन हत्या या अन्य कोई एंगल भी जांच के दायरे में है।
पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
रिपोर्ट आने के बाद मौत का सही कारण स्पष्ट होगा।
रामगढ़ताल क्षेत्र में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं,
जिससे इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज,
आसपास के गवाहों के बयान और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
परिवार और समाज पर गहरा असर
यह घटना परिवार के लिए बहुत दुखद है। लेखपाल संजय त्रिपाठी सरकारी नौकरी में होने के कारण पूरे
परिवार पर यह सदमा गहरा है। स्थानीय लोग भी
इस घटना से स्तब्ध हैं और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।
ऐसे मामलों में समय पर काउंसलिंग और परिवार का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण होता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें
गोरखपुर की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि
मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति उदास, चिंतित या अकेला महसूस कर रहा हो, तो तुरंत मदद लें। हेल्पलाइन नंबर जैसे
104 या स्थानीय काउंसलिंग सेंटर उपलब्ध हैं। पुलिस जांच पूरी होने के बाद और
जानकारी सामने आएगी। फिलहाल परिवार को इस दुख में शोक संवेदनाएं।
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