22 कैदी यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा
गोरखपुर जिला कारागार में शिक्षा का नया अध्याय
गोरखपुर जिला कारागार में एक बहुत ही सराहनीय और प्रेरणादायक पहल की जा रही है। इस वर्ष कुल 22 कैदी उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की इंटरमीडिएट परीक्षा देने जा रहे हैं। कारागार प्रशासन ने इन कैदियों के लिए परीक्षा केंद्र की पूरी व्यवस्था कर दी है और परीक्षा कारागार परिसर में ही आयोजित की जाएगी। यह कदम कैदियों को शिक्षा के माध्यम से समाज में वापसी का अवसर देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
22 कैदियों के लिए विशेष परीक्षा केंद्र
जिला कारागार प्रशासन ने यूपी बोर्ड के साथ समन्वय स्थापित कर कारागार परिसर में ही एक अस्थायी परीक्षा केंद्र स्थापित किया है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि कैदियों को बाहर ले जाने की जरूरत न पड़े और सुरक्षा के साथ-साथ उनकी पढ़ाई भी निर्बाध रूप से चल सके। परीक्षा के दौरान निम्नलिखित विशेष इंतजाम किए गए हैं:
- पूरी तरह से अलग और सुरक्षित परीक्षा कक्ष
- सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था
- पर्याप्त संख्या में निगरानीकर्ता और पर्यवेक्षक
- समय पर प्रश्न-पत्र और उत्तर पुस्तिकाओं का वितरण
- परीक्षा नियमों का पूर्ण पालन
इन सभी व्यवस्थाओं के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि परीक्षा पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ हो।
शिक्षा सुधार कार्यक्रम का हिस्सा
गोरखपुर जेल प्रशासन पिछले कई वर्षों से कैदियों की शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है। जेल के अंदर चल रहे शिक्षा कार्यक्रमों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- कक्षा 10वीं और 12वीं की नियमित पढ़ाई
- एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम
- एनओएस (नेशनल ओपन स्कूल) के माध्यम से शिक्षा
- कंप्यूटर, टेलरिंग, बुनाई जैसे व्यावसायिक कोर्स
इन कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप ही इस बार 22 कैदी इंटरमीडिएट परीक्षा देने जा रहे हैं। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में भी काफी अच्छी मानी जा रही है।
समाज में वापसी की नई उम्मीद
शिक्षा के माध्यम से कैदियों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बाहर आने के बाद समाज में सम्मानजनक जीवन जीने की ओर कदम बढ़ा पाते हैं। जेल प्रशासन का मानना है कि पढ़ा-लिखा कैदी अपराध की ओर दोबारा लौटने की संभावना बहुत कम रखता है। इसी सोच के साथ गोरखपुर जिला कारागार में शिक्षा को बहुत महत्व दिया जा रहा है।
प्रशासन और समाज की सराहना
इस पहल की जेल अधिकारियों, शिक्षकों और समाजसेवियों द्वारा खूब सराहना की जा रही है। कई सामाजिक संगठन इस कार्यक्रम से जुड़ने और कैदियों की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं। यह पहल न केवल कैदियों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए
एक सकारात्मक संदेश है कि शिक्षा किसी भी उम्र और परिस्थिति में जीवन बदल सकती है।
शिक्षा हर किसी का अधिकार
गोरखपुर जिला कारागार में 22 कैदियों द्वारा इंटरमीडिएट परीक्षा देना यह साबित करता है कि
सुधार और शिक्षा के द्वार कभी बंद नहीं होने चाहिए। कारागार प्रशासन की इस पहल से
एक नई उम्मीद जगी है कि सजा के साथ-साथ सुधार भी जरूरी है।