गोरखपुर जंक्शन, उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख रेलवे स्टेशन, आज 141 वर्ष का हो गया है। 19 जनवरी 2026 को अपने 141वें स्थापना दिवस पर यह स्टेशन नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी कर रहा है। ब्रिटिश काल में 1885 में स्थापित यह स्टेशन पूर्वोत्तर रेलवे का हृदय स्थल रहा है। 500 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे पुनर्विकास कार्य ने इसे आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने का वादा किया है। लाखों यात्रियों के लिए यह स्टेशन न केवल आवागमन का केंद्र है, बल्कि गोरखपुर की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी है।
गोरखपुर जंक्शन का इतिहास: 141 साल पुराना गौरवशाली सफर
*गोरखपुर जंक्शन की नींव 1885 में पड़ी, जब ब्रिटिश सरकार ने अवध और रोहिलखंड रेलवे के तहत इसे विकसित किया। शुरू में मीटर गेज लाइन के रूप में स्थापित, यह बंगाल एंड नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के अंतर्गत आया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह स्टेशन क्रांतिकारियों का अड्डा बना, जहां से महत्वपूर्ण संदेश और गतिविधियां संचालित होती थीं। 1950 के दशक में पूर्वोत्तर रेलवे जोन का मुख्यालय यहां स्थापित हुआ, जिसने इसे रेलवे नेटवर्क में केंद्रीय महत्व दिया।
आज यह 10 प्लेटफॉर्म्स वाला व्यस्त स्टेशन है (हालांकि कुछ स्रोतों में 8 का उल्लेख है, लेकिन वर्तमान में 10 हैं), जहां प्रतिदिन 200 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं, जिनमें से कई ओरिजिनेटिंग और टर्मिनेटिंग हैं। विश्व का दूसरा सबसे लंबा प्लेटफॉर्म (लगभग 1,366 मीटर) यहीं है, जो इसे अनोखा बनाता है। गोरखनाथ मंदिर और कुशीनगर जैसे धार्मिक स्थलों से जुड़ाव के कारण यह बौद्ध तीर्थयात्रियों का भी प्रमुख केंद्र है। 141 वर्षों में इसने गोरखपुर को राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई और पूर्वांचल क्षेत्र का विकास हुआ।
500 करोड़ की पुनर्विकास योजना: क्या-क्या बदलाव?
केंद्र सरकार की ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत 2023 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 500 करोड़ रुपये है। कार्य अप्रैल 2026 या उसके आसपास पूरा होने की उम्मीद है (कुछ रिपोर्ट्स में मई 2027 तक का उल्लेख है)। यह योजना स्टेशनों को शहर के केंद्र के रूप में विकसित करने पर फोकस करती है। प्रमुख बदलावों में शामिल हैं:
- आधुनिक फुट ओवर ब्रिज, एस्केलेटर, लिफ्ट और एसी वेटिंग रूम।
- प्लेटफॉर्म्स को 760 मीटर या उससे अधिक लंबा किया जा रहा है,
- ताकि वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनें आसानी से संचालित हो सकें।
- सोलर पैनल से ऊर्जा उत्पादन और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं।
- स्टेशन भवन को हेरिटेज लुक के साथ डिजाइन किया गया है,
- जिसमें गोरखपुर की स्थानीय कला और संस्कृति की झलक दिखेगी।
- अन्य विश्वस्तरीय सुविधाएं जैसे रूफ प्लाजा, फूड कोर्ट, रिटेल आउटलेट्स, बच्चों के प्ले जोन,
- दिव्यांग-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर (रैंप, ब्रेल साइनेज) और बजट होटल।
यह पुनर्विकास स्टेशन को पुरानी इमारतों के ध्वस्त होने के साथ नई संरचना देगा, जिसमें टिकट काउंटर
अस्थायी रूप से शिफ्ट किए गए हैं। इससे यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी और स्टेशन एक आधुनिक शहर केंद्र बनेगा।
गोरखपुर जंक्शन का 141वां वर्ष न केवल इतिहास का जश्न है, बल्कि भविष्य की ओर एक मजबूत कदम भी है।
500 करोड़ की इस योजना से यह स्टेशन पूर्वांचल के विकास का नया प्रतीक बनेगा। लाखों यात्रियों,
तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए यह अब और अधिक आरामदायक, सुरक्षित और आकर्षक होगा