15 जनवरी 2026 को गोरखपुर में आयोजित महोत्सव 2026 की शुरुआत भव्यता और उत्साह के साथ हुई थी। हजारों की संख्या में लोग, स्थानीय निवासी, पर्यटक और उत्साही दर्शक इस मेगा इवेंट को देखने पहुंचे। मंच पर बड़े-बड़े कलाकार, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न स्टॉल्स की मौजूदगी ने पहले कुछ घंटों में सबको आकर्षित किया। लेकिन जल्द ही यह महोत्सव व्यवस्था की भेंट चढ़ गया और पूरी चमक फीकी पड़ गई। प्रबंधन की लापरवाही, सुरक्षा में चूक और खासकर पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार ने इस आयोजन को विवादों में घेर लिया।
शुरुआती उत्साह और भव्य तैयारी
गोरखपुर महोत्सव 2026 को शहर की सांस्कृतिक विरासत और विकास को प्रदर्शित करने का बड़ा मंच माना जा रहा था। आयोजकों ने दावा किया था कि यह पूर्वांचल का सबसे बड़ा सांस्कृतिक महोत्सव होगा। स्टेज पर लोक नृत्य, संगीत कार्यक्रम, स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल और बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। शुरुआत में हजारों लोग जुटे और सोशल मीडिया पर भी #GorakhpurMahotsav2026 ट्रेंड करने लगा। लेकिन जैसे-जैसे शाम ढलती गई, वही उत्साह अव्यवस्था के तांडव में बदल गया।
अव्यवस्था का तांडव: सुरक्षा और प्रबंधन की पूरी नाकामी
मुख्य स्टेज के आसपास भीड़ प्रबंधन का कोई इंतजाम नहीं था। बैरिकेडिंग न के बराबर थी, जिससे लोग स्टेज के बहुत करीब पहुंच गए। पार्किंग की भयंकर समस्या रही, लोग किलोमीटरों दूर अपनी गाड़ियां छोड़कर पैदल आ रहे थे। शौचालयों की कमी, पानी की अनुपलब्धता और आपातकालीन निकास के अभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। कई बुजुर्ग और बच्चे भीड़ में फंसकर परेशान हुए। सबसे बड़ी बात यह कि सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक होने के बावजूद कोई जिम्मेदार अधिकारी तुरंत नजर नहीं आया।
पत्रकारों पर अत्याचार: सबसे बड़ा विवाद
महोत्सव की सबसे काली स्याही पत्रकारों के साथ हुए व्यवहार पर लगी। मीडिया कवरेज के लिए आए दर्जनों पत्रकारों और कैमरापर्सन्स को स्टेज एरिया में प्रवेश देने से मना किया गया। जब कुछ पत्रकारों ने अपना प्रेस पास दिखाया तो उन्हें अपशब्द कहे गए, धक्का-मुक्की की गई और कुछ मामलों में उनके कैमरे छीनने की कोशिश भी की गई। एक प्रमुख स्थानीय न्यूज चैनल के रिपोर्टर ने बताया कि उन्हें “यहां प्रेस का क्या काम, जाओ बाहर खड़े हो” जैसे शब्द कहे गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसने आयोजकों और स्थानीय प्रशासन की किरकिरी करा दी।
स्थानीय प्रशासन पर सवाल, जनता में रोष
यह महोत्सव गोरखपुर विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।
इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के बावजूद कोई ठोस सुरक्षा प्लान नजर नहीं आया।
कई नागरिकों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि
“महोत्सव मनाने आया था, लेकिन अपमान और परेशानी लेकर लौट रहा हूं”।
पत्रकारों के साथ हुए व्यवहार ने इसे सिर्फ एक आयोजन की विफलता नहीं,
बल्कि प्रेस की आजादी पर हमला बना दिया।
निष्कर्ष: सबक लेने का समय
गोरखपुर महोत्सव 2026 की यह विफलता आयोजकों के लिए एक बड़ा सबक है।
भव्य इवेंट की योजना बनाना आसान है, लेकिन उसे सफलतापूर्वक संचालित करना कठिन कार्य है। सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन,
पत्रकारों का सम्मान और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित न करना किसी भी बड़े आयोजन को बदनाम कर सकता है।
उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे महोत्सवों में इन कमियों को दूर किया जाएगा
ताकि गोरखपुर की सांस्कृतिक छवि और मजबूत हो।