गोरखपुर में शर्मनाक वारदात: लापता छात्रा से कई जगह दुष्कर्म, पुलिस ने 4 आरोपियों को दबोचा
चार महीने बाद मिला सुराग, सामने आई सच्चाई
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के चौरीचौरा थाना क्षेत्र से चार महीने पहले लापता हुई कक्षा 9वीं की छात्रा से दुष्कर्म के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। यह मामला तब सामने आया जब पुलिस ने 23 मार्च को किशोरी को बरामद किया और उसका मेडिकल परीक्षण कराया। मेडिकल रिपोर्ट और कोर्ट में दर्ज बयान के आधार पर दुष्कर्म की पुष्टि हुई।
नवंबर 2025 से लापता थी किशोरी
जानकारी के मुताबिक, किशोरी नवंबर 2025 में अपने कॉलेज से अचानक गायब हो गई थी। गुजरात में रह रहे उसके पिता ने पुलिस को सूचना दी थी कि काफी तलाश के बावजूद बेटी का कोई पता नहीं चल पाया। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
कई होटलों में ले जाकर किया गया दुष्कर्म
जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। किशोरी को अलग-अलग होटलों में ले जाकर कई आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने अपने बयान में कुल 10 लोगों पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर उसके साथ गलत काम किया।
पुलिस जांच में मिले पुख्ता सबूत
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की। इन सबूतों के आधार पर 10 लोगों को हिरासत में लिया गया और उनसे पूछताछ शुरू की गई।
4 आरोपी गिरफ्तार, जेल भेजे गए
दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने बुधवार को चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें तरकुलहा स्थित मधुबन
होटल के संचालक धर्मराज यादव, बरही निवासी ऑटो चालक मोनू उर्फ मनीष राजभर, भगवानपुर
टोला तुलसीपुर निवासी दिहाड़ी मजदूर किशन उर्फ बिट्टू और डुमरी खुर्द निवासी समीर
उर्फ दिलशाद शामिल हैं। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
बाकी आरोपियों से पूछताछ जारी
पुलिस ने मामले में दुष्कर्म की धाराएं बढ़ा दी हैं और छह अन्य आरोपियों को
हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही
बाकी आरोपियों की भूमिका भी साफ हो जाएगी और उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सफेदपोशों की पैरवी का भी एंगल
इस मामले में यह बात भी सामने आई है कि कुछ प्रभावशाली लोग आरोपियों की पैरवी में लगे हुए थे।
पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं मामले को दबाने या प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं की गई।
निष्कर्ष
यह घटना समाज में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक नाबालिग के साथ
इस तरह की वारदात बेहद चिंताजनक है। हालांकि पुलिस की सक्रियता से मामले का खुलासा हुआ है, लेकिन
अब सभी आरोपियों को सख्त सजा दिलाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
