गोरखपुर। शनिवार की सुबह अलीनगर में प्रशासनिक अमले की अचानक कार्रवाई ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने अलीनगर तिराहे पर बुलडोजर चलाकर उस स्थान को ढहा दिया जो वर्षों से इलाके की पहचान माना जाता था। यह संरचना न केवल एक यातायात केंद्र थी बल्कि स्थानीयों के लिए सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व रखती थी। इस कार्रवाई से स्थानीय जनता में गहरी नाराजगी और निराशा देखने को मिली।
सुबह-सुबह पहुंचा बुलडोजर, लोगों में अफरा-तफरी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रशासनिक टीम सुबह करीब 8 बजे भारी पुलिस बल के साथ अलीनगर तिराहे पर पहुंची। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि अधिकारियों ने बिना किसी सार्वजनिक घोषणा या वैकल्पिक व्यवस्था के सीधे बुलडोजर चला दिया। दुकानदारों और स्थानीय निवासियों ने विरोध करने की कोशिश की, मगर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए किसी को आगे बढ़ने नहीं दिया गया। बुलडोजर के पहिए चलते ही तिराहे की ऐतिहासिक दीवारें और चबूतरे कुछ ही मिनटों में मलबे में तब्दील हो गए।

सदियों पुरानी पहचान का अंत
अलीनगर तिराहा गोरखपुर शहर की पुरानी बस्तियों में से एक ऐतिहासिक स्थान माना जाता है। बुजुर्गों के अनुसार, यह तिराहा सौ साल से भी पुराना है और यहां पर पहले सामाजिक बैठकों, धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक मेलों का आयोजन होता था। स्थानीयों का कहना है कि तिराहे पर स्थित पेड़, चबूतरा और कलात्मक पत्थर शहर की विरासत का हिस्सा थे। इनके टूटने से लोगों को ऐसा लगा जैसे उनकी शहर की पहचान ही छिन ली गई हो।

स्थानीयों का दर्द और आक्रोश
स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई को मनमाना बताया। उनका कहना है कि तिराहा अवैध अतिक्रमण नहीं था, बल्कि शहर की सांस्कृतिक धरोहर था। कई लोगों ने आंसू बहाते हुए कहा कि प्रशासन ने बिना सूचना के उनकी यादें मिटा दीं। दुकानदारों ने कहा कि इससे उनका व्यापार प्रभावित होगा।
युवाओं ने सोशल मीडिया पर विरोध जताया और कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताया।
प्रशासन का दावा है कि यह जगह अवैध अतिक्रमण थी और सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाई गई।
लेकिन स्थानीयों का कहना है कि कोई नोटिस नहीं दिया गया। वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव रहा।
यह कार्रवाई विवाद का कारण बनी है। जनता में गुस्सा है और न्याय की मांग उठ रही है।
यह घटना शहर की विरासत और विकास के बीच टकराव दिखाती है।
प्रशासन को संवेदनशीलता बरतनी चाहिए थी। स्थानीयों की भावनाओं का सम्मान जरूरी है।
अब मलबे के ढेर ने तिराहे की जगह ले ली है।
अलीनगर के लोग एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं। वे मांग कर रहे हैं कि कार्रवाई रुकवाएं और विरासत बचाएं।
प्रशासन से बातचीत की अपील की गई है। यह विवाद आगे बढ़ सकता है।