उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले को एक बड़ी सौगात मिलने वाली है, जहां हर विकास खंड (ब्लॉक) में दो-दो मिनी ग्रामीण स्टेडियम का निर्माण होगा। यह महत्वाकांक्षी योजना अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री कमलेश पासवान ने अपने हालिया निर्देशों के माध्यम से शुरू की है। गोरखपुर जिले में कुल 7 विकास खंड हैं – कैम्पियरगंज, चौरीचौरा, सहजनवा, खजनी, बांसगांव, ब्रह्मपुर और गगहा। इन सभी में प्रति ब्लॉक दो मिनी स्टेडियम बनने से कुल 14 नई खेल सुविधाएं ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध होंगी।
मिनी ग्रामीण स्टेडियम क्या होंगे?
ये मिनी ग्रामीण स्टेडियम ग्रामीण युवाओं के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए जाएंगे, जिनमें बहुउद्देशीय खेल मैदान, वॉलीबॉल कोर्ट, बैडमिंटन कोर्ट, जिम उपकरण और रनिंग ट्रैक जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इनका निर्माण ग्रामीण विकास विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग और स्थानीय पंचायतों के सहयोग से किया जाएगा। बजट का प्रावधान राज्य सरकार की ग्रामीण खेल नीति के तहत किया गया है, जो प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास योजना (PMGSY) और खेलो इंडिया प्रोग्राम से जुड़ा हुआ है। प्रत्येक स्टेडियम का अनुमानित क्षेत्रफल 2-3 एकड़ होगा, जिसमें पार्किंग, शेड और वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी शामिल रहेगा। इससे न केवल खेल गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य और फिटनेस को भी बढ़ावा मिलेगा।
मंत्री कमलेश पासवान के निर्देशों का महत्व
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और गोरखपुर सदर से बीजेपी सांसद कमलेश पासवान ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक में साफ निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं की कमी के कारण युवा शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, जिसे रोकना जरूरी है। “हर गांव-गांव तक खेल का मैदान पहुंचेगा, ताकि ग्रामीण बच्चे ओलंपिक स्तर के खिलाड़ी बन सकें,” पासवान ने कहा। निर्देशों में स्टेडियम निर्माण की समयसीमा तीन महीने रखी गई है, जबकि पूर्ण संचालन छह महीने में सुनिश्चित करने को कहा गया। यह योजना गोरखपुर के सांसद के रूप में उनके पिछले प्रयासों का विस्तार है, जहां उन्होंने पहले ही जिले में कई खेल परिसरों का उद्घाटन किया है।
ग्रामीण युवाओं और समुदाय को लाभ
इस योजना से गोरखपुर के लाखों ग्रामीण युवाओं को सीधा फायदा होगा। खासकर अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के बच्चों को मुफ्त कोचिंग और उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो जैसी पारंपरिक ग्रामीण खेलों को प्रोत्साहन मिलेगा, जो उत्तर प्रदेश सरकार की ‘खेलो इंडिया’ पहल से जुड़ेगा। महिलाओं और लड़कियों के लिए विशेष समय स्लॉट रखे जाएंगे, जिससे लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, स्टेडियम स्थानीय रोजगार सृजन का माध्यम बनेंगे – निर्माण में 500 से अधिक मजदूर लगेंगे और संचालन में 100 स्थायी नौकरियां पैदा होंगी। पर्यावरण के लिहाज से, स्टेडियम सोलर पैनल और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग से संचालित होंगे।
निर्माण प्रक्रिया और समयरेखा
निर्माण कार्य मार्च 2026 से शुरू हो जाएगा, जिसमें सबसे पहले भूमि चयन और सर्वे पूरा किया जाएगा। प्रत्येक ब्लॉक में 4 एकड़ भूमि चिह्नित की जा चुकी है। ठेकेदार चयन ई-टेंडर प्रक्रिया से होगा, जबकि गुणवत्ता निगरानी के लिए तीसरे पक्ष के एजेंसी को लगाया जाएगा। उद्घाटन समारोह जून 2026 तक निर्धारित है, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशेष अतिथि हो सकते हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि योजना का 70% फंडिंग राज्य सरकार और 30% केंद्र से आएगा। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों को स्टेडियम प्रबंधन में भागीदारी दी जाएगी।
गोरखपुर के खेल परिदृश्य में बदलाव
गोरखपुर, जो कभी खेल पिछड़े जिले के रूप में जाना जाता था, अब उत्तर प्रदेश का खेल हब बनने की राह पर है। पहले यहां केवल जिला स्टेडियम और कुछ शहरी मैदान थे, लेकिन मिनी ग्रामीण स्टेडियम से 100 किमी दूर तक कोई गांव खेल सुविधा से वंचित नहीं रहेगा। यह योजना पूर्वांचल के अन्य जिलों के लिए मॉडल बनेगी। हाल ही में गोरखपुर में आयोजित केंद्रीय खेल महोत्सव में 5000 से अधिक ग्रामीण खिलाड़ियों ने भाग लिया, जो इसकी सफलता का संकेत है।
