गोरखपुर शहर में अवैध कॉलोनियों की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी, लेकिन अब गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) ने बड़ा एक्शन लेते हुए 52 एकड़ कीमती जमीन को कब्जा मुक्त करा लिया है। यह अभियान न केवल शहर के नियोजित विकास को गति देगा बल्कि अवैध निर्माण करने वालों के लिए सख्त संदेश भी है। GDA की टीम ने बुलडोजर मशीनों के साथ धरातल पर उतरकर सैकड़ों अवैध प्लॉट्स, घरों और व्यावसायिक इमारतों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई से गोरखपुर के निवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि इससे ट्रैफिक जाम, जलभराव और असुरक्षित निर्माण की समस्याओं पर लगाम लगेगी। GDA अधिकारियों के अनुसार, यह जमीन अब पार्क, सड़कें और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए उपयोग की जाएगी।
GDA का यह बुलडोजर एक्शन पिछले कई महीनों की तैयारियों का नतीजा है।
अवैध कॉलोनियां गोरखपुर के बाहरी इलाकों जैसे चौरीचौरा रोड, बैंकाटंक और गोलघर के आसपास फैली हुई थीं, जहां बिना अनुमति के हजारों प्लॉट काटे गए थे। इन कॉलोनियों में बिजली, पानी और सीवर जैसी बेसिक सुविधाएं न होने से निवासियों को रोज परेशान होना पड़ता था। GDA ने सर्वे के बाद नोटिस जारी किए थे, लेकिन जब कोई प्रतिक्रिया न मिली तो 15 फरवरी 2026 को सुबह से ही एक्शन शुरू हो गया। लगभग 200 से अधिक पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में JCB और बुलडोजर ने निर्माणों को नेस्तनाबूद कर दिया। इस कार्रवाई में 52 एकड़ जमीन पूरी तरह मुक्त हो गई, जो करीब 2 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की कीमत वाली है।
इस एक्शन के पीछे गोरखपुर के मेयर और स्थानीय विधायक का भी पूरा समर्थन रहा।
उन्होंने कहा कि अवैध कॉलोनियां शहर की सुंदरता को खराब कर रही थीं और भूमाफिया इसका फायदा उठा रहे थे। GDA के उपाध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आने वाले दिनों में ऐसे और अभियान चलाए जाएंगे। प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक जमीन या मुआवजे का वादा किया गया है, लेकिन केवल वास्तविक प्रभावितों को। स्थानीय निवासियों ने सोशल मीडिया पर #GDABuldozerAction ट्रेंड चलाया और शहर को साफ-सुथरा बनाने की मांग की। इससे पहले लखनऊ और कानपुर में भी ऐसे एक्शन हुए थे, लेकिन गोरखपुर का यह सबसे बड़ा रहा।
अवैध कॉलोनियों की समस्या उत्तर प्रदेश के कई शहरों में आम है।
गोरखपुर में पिछले 5 सालों में 300 से अधिक ऐसी कॉलोनियां पनपीं, जिनमें करोड़ों का काला कारोबार हो रहा था। GDA ने जीआईएस मैपिंग और ड्रोन सर्वे से इनकी पहचान की। अब मुक्त हुई 52 एकड़ जमीन पर मास्टर प्लान के तहत रिंग रोड, स्कूल और हॉस्पिटल बनने की संभावना है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे ग्रीन स्पेस बढ़ेगा और जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलेगी। हालांकि, कुछ प्रभावित लोग अदालत का रुख कर सकते हैं, लेकिन GDA का दावा है कि सभी कार्रवाइयां कानूनी हैं।
यह एक्शन गोरखपुर को स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
शहरवासी अब उम्मीद कर रहे हैं कि ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या कम होगी। GDA ने चेतावनी दी है कि भविष्य में कोई भी अवैध निर्माण बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय व्यापारियों ने भी समर्थन किया, क्योंकि इससे नई दुकानें और बाजार विकसित होंगे। कुल मिलाकर, 52 एकड़ जमीन कब्जा मुक्त होना गोरखपुर के विकास की नई शुरुआत है।