
शिबू सुरेन (या शिबू सोरेन) एक प्रमुख भारतीय राजनीतिज्ञ और आदिवासी नेता थे, जिनका जन्म 11 जनवरी 1944 को बिहार के हजारीबाग जिले के नेमरा गांव (अब झारखंड के रामगढ़ जिले में) में हुआ था।
उनका पूरा नाम शिवचरण लाल सोरेन था। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सह-संस्थापक और लंबे समय तक इसके अध्यक्ष रहे। शिबू सोरेन को झारखंड की राजनीति में “दिशोम गुरु” और “गुरु जी” के नाम से जाना जाता था। उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य था आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करना और झारखंड क्षेत्र को अलग राज्य के रूप में स्वतंत्रता दिलाना।
उन्होंने इस क्षेत्र के आदिवासियों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए महत्वपूर्ण काम किए।शिबू सोरेन के पिता, सोबरन मांझी, पेशे से शिक्षक थे और वह अपने इलाके में पढ़े-लिखे व्यक्ति माने जाते थे। शिबू सोरेन ने अपने युवावस्था में ही सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन शुरू किया।
वे पहले संताल युवाओं को संगठित कर समाज सुधार के लिए काम करने लगे। 1973 में उन्होंने विनोद बिहारी महतो और एके राय के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य झारखंड क्षेत्र में आदिवासी और अन्य समाज के लोगों के अधिकारों की रक्षा और अलग राज्य की मांग करना था।शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन संघर्ष से भरा रहा। उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा, खासकर 1975 के आपातकाल के दौरान। वे धनबाद जेल में कैद रहे और वहां भी उन्होंने कैदियों के बीच एकजुटता की भावना पैदा की। सन 1980 में वे पहली बार दुमका संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए।
इसके बाद वे कई बार लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य रहे। उन्होंने केंद्रीय मंत्री के रूप में भी देश सेवा की।झारखंड राज्य बनने से पहले शिबू सोरेन झारखंड क्षेत्र स्वायत्त परिषद (जैक) के अध्यक्ष थे। 15 नवंबर 2000 को झारखंड का गठन हुआ, जो उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सपना था। हालांकि वे खुद पहले मुख्यमंत्री नहीं बन पाए, लेकिन बाद में 2005 और 2008 में दो बार झारखंड के मुख्यमंत्री चुने गए।
उन्होंने राज्य के विकास और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए कई कदम उठाए। इस दौरान उनके बेटे हेमंत सोरेन ने भी राजनीति में बड़ा रोल निभाया और वर्तमान में वे झारखंड के मुख्यमंत्री हैं।शिबू सोरेन की पत्नी का नाम रूपी सोरेन था, जिनसे उनकी चार संतानें थीं। उनके बेटे दुर्गा सोरेन का निधन हो चुका है और अन्य बेटे हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन भी राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं।शिबू सोरेन ने लगभग 40 वर्षों तक झारखंड राज्य के लिए संघर्ष किया, जिसमें वे आदिवासी समाज की आवाज और मसीहा बने।
उन्हें झारखंड के गांधी और आदिवासियों के नायक के रूप में याद किया जाता है।वह 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनकी मृत्यु पर पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ी और विभिन्न राजनेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।शिबू सोरेन की संपत्ति 2019 के अनुसार लगभग 7.5 करोड़ रुपये थी, जिसमें व्यक्तिगत और पारिवारिक संपत्ति शामिल थी।
वे अपने क्षेत्र के लोगों के लिए कई सामाजिक और आर्थिक योजनाओं के प्रणेता रहे।उनका जीवन आदिवासी अधिकारों की लड़ाई, संघर्ष, और राजनीतिक सफर की मिसाल है जिन्होंने झारखंड को एक नया आकार दिया।
