राजनीतिक तूफान का केंद्र
हाल ही में लोकसभा में एक बड़ा राजनीतिक विवाद छिड़ गया जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने की अप्रकाशित संस्मरण (मेमोयर) का जिक्र किया। राहुल गांधी का दावा है कि इस किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव (विशेषकर गलवान घाटी झड़प) के दौरान सेना को निराश करने के गंभीर आरोप हैं। उन्होंने कहा, “पूर्व सेना प्रमुख का बयान उजागर कर देगा कि मोदी जी और राजनाथ जी ने सेना को कैसे निराश किया। अपने पर्दाफाश के डर से वो मुझे संसद में बोलने नहीं दे रहे।” यह बयान फरवरी 2026 के बजट सत्र में आया, जहां सदन बार-बार स्थगित हुआ।
राहुल गांधी का पूरा बयान और संदर्भ
राहुल गांधी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए एक मैगजीन आर्टिकल का हवाला दिया, जिसमें नरवाने की अप्रकाशित किताब के अंश थे। उन्होंने “चीनी टैंक्स इन डोकलाम” जैसे कुछ शब्द पढ़ने की कोशिश की, लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य भाजपा सांसदों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि अप्रकाशित किताब या मैगजीन आर्टिकल का हवाला सदन के नियमों (रूल 349) के खिलाफ है। राहुल गांधी ने बाहर पत्रकारों से कहा कि सरकार “56 इंच की छाती” के दावे पर सवाल उठने से डर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक नेतृत्व ने सेना को निर्देश देने में पीछे हट गए और सेना को अकेला छोड़ दिया। यह मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि यह सेना की भावनाओं और देश की सुरक्षा से जुड़ा है।
पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवाने के बयान के मुख्य बिंदु
जनरल एमएम नरवाने (रिटायर्ड) की अप्रकाशित किताब के अंश (कारवां मैगजीन में प्रकाशित) में 2020 के लद्दाख संकट पर विस्तार से चर्चा है। रिपोर्ट्स के अनुसार:
- चीनी सेना की तरफ से आक्रामकता के दौरान राजनीतिक स्तर से स्पष्ट निर्देश नहीं मिले।
- सेना ने जवाबी कार्रवाई के विकल्प तैयार किए, लेकिन “टॉप लेवल” से मंजूरी नहीं मिली।
- किताब में दावा है कि सरकार ने संकट को स्पिन किया और सेना की तैयारी पर सवाल उठाए गए। राहुल गांधी ने इन्हें आधार बनाकर कहा कि मोदी और राजनाथ ने सेना को “लेट डाउन” किया। हालांकि, किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, इसलिए पूर्ण संदर्भ उपलब्ध नहीं। पूर्व सेना प्रमुखों के अन्य बयानों (जैसे अग्निपथ योजना पर चिंता) को भी विपक्ष जोड़ रहा है।
मोदी सरकार की सेना नीतियों पर सवाल और आंकड़े
मोदी सरकार के कार्यकाल में रक्षा बजट बढ़ा है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि आधुनिकीकरण में देरी, राफेल डील में कथित अनियमितताएं और LAC पर चीन के साथ स्थिति से सेना प्रभावित हुई। गलवान झड़प के बाद हथियारों की कमी उजागर हुई। राहुल गांधी ने कहा कि ये नीतियां सेना को कमजोर कर रही हैं। सरकार का पलटवार है कि कांग्रेस सेना को राजनीतिक हथियार बना रही है और
पूर्व सेना प्रमुखों के बयानों का गलत इस्तेमाल हो रहा है।
संसद में बोलने से रोकना: लोकतंत्र पर सवाल?
राहुल गांधी का मुख्य आरोप है कि “पर्दाफाश के डर” से स्पीकर ने उन्हें रोका। सदन कई बार स्थगित हुआ।
कांग्रेस ने RTI और दस्तावेज मांगे, लेकिन जवाब नहीं मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि
पूर्व सैन्य नेताओं के बयान नीतिगत बहस के लिए जरूरी हैं, लेकिन सदन के नियमों का पालन भी आवश्यक है।
राजनीतिक प्रभाव और भविष्य
यह विवाद 2024 चुनावों के बाद भी जारी है और युवा वोटरों को प्रभावित कर सकता है।
आने वाले संसद सत्रों में यह मुद्दा और गरमाएगा। भाजपा ने
इसे कांग्रेस की राजनीति करार दिया, जबकि विपक्ष इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बता रहा है।