बाढ़ बचाव की 27 परियोजनाओं
गोरखपुर जिला हर साल बरसात के मौसम में बाढ़ और जलभराव की समस्या से जूझता रहा है। अब अच्छी खबर यह है कि बाढ़ बचाव की 27 परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है। इन पर कुल 142.88 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह फैसला स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, क्योंकि इन कार्यों से कई संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा काफी कम हो जाएगा।
स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण और विभागीय बंटवारा
ये सभी परियोजनाएं गंडक जोन के अंतर्गत आती हैं, जहां तीन अलग-अलग डिवीजन बाढ़ बचाव के कार्य संभालते हैं। स्वीकृत 27 परियोजनाओं का बंटवारा इस प्रकार है:
- बाढ़ खंड में कुल 13 परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं।
- ड्रेनेज खंड की 06 परियोजनाएं शामिल हैं।
- बाढ़ खंड-2 की 08 परियोजनाएं को हरी झंडी मिली है।
इन परियोजनाओं में तटबंध मजबूती, ड्रेनेज सुधार, नाले की सफाई, पंपिंग स्टेशन स्थापना और अन्य संरचनात्मक कार्य शामिल हो सकते हैं। ये कार्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान करेंगे।
कार्य में देरी की चिंता: टेंडर प्रक्रिया अभी लंबित
हालांकि स्वीकृति मिलने से उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन एक बड़ी समस्या सामने आई है। इन परियोजनाओं पर कार्य अब तक शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन टेंडर की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। देरी से टेंडर होने पर कार्य में काफी विलंब होगा, जिसका सीधा असर आगामी मानसून पर पड़ सकता है। स्थानीय लोग और विशेषज्ञों का कहना है कि जल्द से जल्द टेंडर प्रक्रिया पूरी कर कार्य शुरू किया जाना चाहिए, ताकि बरसात से पहले तैयारियां पूरी हो सकें।
गोरखपुर में बाढ़ की समस्या और महत्व
गोरखपुर गंडक, राप्ती और अन्य नदियों के प्रभाव क्षेत्र में आता है। हर साल बाढ़ से फसलें बर्बाद होती हैं, घर-मकान क्षतिग्रस्त होते हैं और लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ता है। पिछले वर्षों में सरकार ने कई बाढ़ बचाव परियोजनाओं पर काम किया है, लेकिन अभी भी कई गांव और इलाके संवेदनशील बने हुए हैं। इन 27 नई परियोजनाओं से
उन क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलेगी जहां सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
क्या उम्मीद की जा रही है?
इन परियोजनाओं के पूरा होने से:
- तटबंधों की मजबूती बढ़ेगी।
- ड्रेनेज सिस्टम बेहतर होगा, जिससे शहर में जलभराव कम होगा।
- ग्रामीण क्षेत्रों में कटान रुकेगी।
- समग्र रूप से जिले की बाढ़ प्रबंधन क्षमता मजबूत होगी।
प्रशासन को अब फोकस टेंडर प्रक्रिया तेज करने और कार्य की समयबद्ध निगरानी पर करना होगा। यदि समय पर काम
शुरू हो गया तो गोरखपुरवासियों को इस मानसून से पहले बड़ी राहत मिल सकती है।
यह कदम योगी सरकार की बाढ़ प्रबंधन और जल सुरक्षा नीति का हिस्सा माना जा रहा है,
जो प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जिलों में लगातार काम कर रही है।
स्थानीय निवासी अब इन परियोजनाओं के तेज क्रियान्वयन की उम्मीद कर रहे हैं।
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