रामगढ़ताल में
गोरखपुर के प्रसिद्ध रामगढ़ताल में मछलियों की मौत का सिलसिला जारी है। 15 दिसंबर 2025 को दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में मरी मछलियां मिलीं, जिनमें से 5 क्विंटल निकाली गईं। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) ने वजह तलाशने के लिए जांच शुरू कर दी है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण की रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले दिन 3 क्विंटल और दूसरे दिन 5 क्विंटल मरी मछलियां निकाली गईं। तालाब में प्रदूषण, ऑक्सीजन की कमी और सीवेज का पानी मिलने का शक है। स्थानीय लोग चिंतित हैं और तालाब की सफाई की मांग कर रहे हैं। यह घटना रामगढ़ताल के पर्यावरण और जैव विविधता पर सवाल खड़े कर रही है।
घटना का पूरा विवरण: दूसरे दिन 5 क्विंटल मरी मछलियां
रामगढ़ताल में मछलियों की मौत का सिलसिला 14 दिसंबर से शुरू हुआ। पहले दिन 3 क्विंटल मरी मछलियां निकाली गईं। 15 दिसंबर को फिर बड़ी संख्या में मछलियां मरी मिलीं। मुख्य बिंदु:
- कुल निकाली गईं: 5 क्विंटल।
- प्रकार: रोहू, कतला और अन्य स्थानीय मछलियां।
- जगह: तालाब का मध्य और किनारा।
- गंध: तालाब से बदबू फैल रही है।
- सफाई: GDA और नगर निगम की टीम ने सफाई की।
स्थानीय लोगों ने कहा, “दूसरे दिन और ज्यादा मछलियां मरी मिलीं। तालाब का पानी काला हो गया है।”
संभावित कारण: प्रदूषण और ऑक्सीजन की कमी
GDA की प्रारंभिक जांच में सामने आया:
- सीवेज का पानी तालाब में मिल रहा है।
- ऑक्सीजन लेवल कम – मछलियां सांस नहीं ले पा रही।
- प्रदूषण: प्लास्टिक, कचरा और केमिकल।
- मौसम: सर्दी में पानी का तापमान कम।
विशेषज्ञों ने कहा, “यूट्रोफिकेशन से ऑक्सीजन खत्म हो रही है।”
GDA की जांच और कार्रवाई: वजह तलाशी जा रही
*GDA ने तालाब का पानी सैंपल लिया है। मुख्य कदम:
- लैब में पानी की जांच।
- सीवेज लाइन चेक।
- सफाई अभियान तेज।
- मछली पालकों को मुआवजा का प्रस्ताव।
GDA अधिकारी ने कहा, “जल्द वजह पता चलेगी और कार्रवाई होगी।”
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया: चिंता और मांग
रामगढ़ताल के आसपास के लोग चिंतित हैं। एक स्थानीय ने कहा, “तालाब हमारी पहचान है, इसे बचाओ।” मछली पालकों ने कहा, “हमारा नुकसान लाखों का है।” लोगों ने तालाब की नियमित सफाई की मांग की।
रामगढ़ताल संरक्षण के सुझाव
- सीवेज लाइन रोकें।
- नियमित सफाई अभियान।
- प्लास्टिक प्रतिबंध।
- ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए फाउंटेन लगाएं।
- जागरूकता कार्यक्रम।