फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़ स्पेशल रिपोर्ट
शीर्षक – ज़हरीली मिलावट का बड़ा खेल : मंडी में धंधेबाज़ों ने मचाई खलबली, रोज़ाना टन-टन मिलावटी दाल खपा रहे हैं कारोबारी
गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में खाद्यान्न मंडियों से एक हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। यहाँ रोज़ाना लगभग 600 टन दाल आती है, जिसमें से करीब 200 टन अरहर दाल होती है। जांच और सूचनाओं से सामने आया है कि धंधेबाज़ इस दाल में खेसारी दाल की मिलावट कर रहे हैं।
खेसारी दाल खाने से खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि खेसारी दाल खाने से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। लगातार सेवन करने पर लकवा और गठिया जैसी लाइलाज बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके बावजूद मिलावटखोर सस्ते दाम पर खेसारी खरीदकर इसे अरहर और मसूर जैसी महंगी दालों में मिलाकर ऊँचे दामों पर बेच रहे हैं।
मंडी में धंधेबाज़ों का जाल
गोरखपुर मंडी में रोज़ाना ट्रकों के जरिये बड़ी मात्रा में दालें आती हैं। इनमें मिलावटखोरों ने ऐसा नेटवर्क बना लिया है कि आम उपभोक्ता को पहचानना बेहद मुश्किल हो जाता है कि कौन-सी दाल असली है और कौन-सी जहरीली।
स्थानीय व्यापारियों की मिलीभगत से यह खेल और भी मज़बूत हो गया है।
उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़
खेसारी दाल पर लंबे समय से सरकारी प्रतिबंध है, फिर भी यह अवैध रूप से बाज़ारों में धड़ल्ले से बेची जा रही है। जानकारों का कहना है कि मंडी में आने वाली दाल की पूरी जांच और सख्त निगरानी जरूरी है। यदि यह सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में बड़ी आबादी स्वास्थ्य संकट में फंस सकती है।
मिलावट रोकने की चुनौती
स्थानीय प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती है मंडी में हो रही इस मिलावट पर रोक लगाना। अभी तक जिस तरह से रोज़ाना 600 टन दाल आती है और धड़ल्ले से बाज़ार में बिकती है, उसमें से असली और मिलावटी का पता लगाना कठिन साबित हो रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि सख्त अभियान नहीं चलाया गया तो मिलावटखोरों का हौसला और बढ़ेगा।
निष्कर्ष
फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़ अपनी इस रिपोर्ट के माध्यम से उपभोक्ताओं को आगाह करना चाहता है कि दाल खरीदते समय सावधानी ज़रूरी है। सरकार और प्रशासन को भी चाहिए कि इस ज़हरीली मिलावट के खिलाफ तत्काल कड़े कदम उठाए जाएं, ताकि आम जनता की सेहत और ज़िंदगी सुरक्षित रह सके।