प बनेगा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का हब
टीवी, मोबाइल और लैपटॉप के कंपोनेंट्स होंगे तैयार, 50 हज़ार करोड़ का निवेश
लखनऊ से बड़ी खबर निकलकर सामने आई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
कैबिनेट ने हाल ही में यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण नीति 2025 को मंजूरी प्रदान की है।
इस नीति का मकसद राज्य को सिर्फ असेंबलिंग तक सीमित नहीं रखना है।
बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के निर्माण को भी गति देना है।
सरकार चाहती है कि यूपी में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी जैसे उत्पादों के पुर्जे भी तैयार हों।
यानी अब केवल बॉडी असेंबल करने का काम नहीं होगा।
बल्कि उसके हर हिस्से का उत्पादन राज्य के भीतर ही किया जाएगा।
यही वजह है कि इस नीति को लेकर उद्योग जगत में भी बड़ी चर्चा शुरू हो गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि उसका लक्ष्य सिर्फ “असेंबली लाइन” तक नहीं रुकना है।
बल्कि वह इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का “कोर हब” बनाना चाहती है।
सरकार का अनुमान है कि इस नीति से करीब 50 हज़ार करोड़ रुपये का निवेश प्रदेश में आएगा।
इतना बड़ा निवेश न सिर्फ उद्योगों को गति देगा, बल्कि लाखों युवाओं को रोजगार भी प्रदान करेगा।
नीति में निवेशकों को कई तरह की रियायतें और प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव किया गया है।
यानी कंपनियों को कर में छूट, ज़मीन की उपलब्धता और बिजली की रियायती दरों जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
इससे राज्य में उद्योग स्थापित करना आसान होगा।
यही वजह है कि बड़े निवेशक उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित होंगे।
नीति का मुख्य उद्देश्य यह है कि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाया जाए।
आज की तारीख में भारत मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का बड़ा बाजार है।
लेकिन इनके पुर्जों का निर्माण अधिकतर चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से होता है।
भारत में केवल असेंबलिंग होती है।
यानी पुर्जे बाहर से आते हैं और यहां उन्हें जोड़कर उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार अब इस प्रवृत्ति को बदलना चाहती है।
सरकार चाहती है कि ये पुर्जे भी यहीं तैयार हों।
अगर ऐसा होता है तो आयात पर निर्भरता घटेगी।
साथ ही भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी बचेगा।
यह कदम “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य को भी मजबूत करेगा।
लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और कानपुर जैसे शहर पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए बड़े केंद्र माने जाते हैं।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा तो मोबाइल निर्माण के हब के रूप में दुनिया भर में पहचान बना चुके हैं।
सैमसंग, ओप्पो, वीवो जैसी कंपनियां यहां पहले से ही उत्पादन कर रही हैं।
नई नीति लागू होने के बाद इन कंपनियों को पुर्जों के लिए भी बाहर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
क्योंकि राज्य में ही चिप, बैटरी, डिस्प्ले, माइक्रोप्रोसेसर और अन्य कंपोनेंट्स तैयार होंगे।
इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और लागत भी घटेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूपी की यह पहल ऐतिहासिक है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपोनेंट्स निर्माण में आत्मनिर्भर बनने से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट का हब बन सकता है।
आज चीन इस क्षेत्र में सबसे बड़ा निर्यातक है।
लेकिन भारत भी धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है।
इस नीति से यूपी को ही नहीं बल्कि पूरे देश को लाभ होगा।
नीति 2025 में निवेशकों को दी जाने वाली छूटें स्पष्ट की गई हैं।
निवेश करने वाली कंपनियों को जमीन आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी।
बिजली सस्ती दर पर मिलेगी।
इसके अलावा सरकार प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित करेगी।
ताकि स्थानीय युवाओं को तकनीकी शिक्षा मिल सके और वे इन कंपनियों में काम कर सकें।
इससे ग्रामीण इलाकों के युवाओं को भी रोजगार मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इससे पलायन रुकेगा।
क्योंकि अब रोजगार के लिए उन्हें दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा।
राज्य सरकार ने दावा किया है कि इस नीति से सीधे और परोक्ष रूप से 10 लाख से ज्यादा रोजगार पैदा होंगे।
इनमें इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स, टेक्नीशियंस, असेंबली वर्कर्स और सपोर्ट स्टाफ शामिल होंगे।
युवाओं के लिए यह बड़ा अवसर होगा।
विशेषकर उन छात्रों के लिए जो आईटीआई, डिप्लोमा या इंजीनियरिंग कर रहे हैं।
वे सीधे इन कंपनियों में नौकरी पा सकेंगे।
केंद्र सरकार भी इस नीति को लेकर सहयोग कर रही है।
भारत सरकार की पीएलआई स्कीम (Production Linked Incentive Scheme) पहले से चल रही है।
अब यूपी की यह नीति उससे तालमेल बैठाकर और अधिक निवेश आकर्षित करेगी।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय का भी मानना है कि उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
इस नीति से महिलाओं को भी लाभ मिलेगा।
क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर अधिक होते हैं।
असेंबली लाइन से लेकर पैकेजिंग तक कई काम ऐसे हैं, जहां महिलाएं बड़ी संख्या में काम कर सकती हैं।
सरकार ने विशेष तौर पर महिलाओं के रोजगार पर ध्यान देने की बात कही है।
इससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
ग्रामीण क्षेत्र में भी इस निवेश का लाभ पहुंचेगा।
क्योंकि सरकार का प्लान है कि कुछ यूनिट्स छोटे कस्बों और जिलों में भी लगाई जाएं।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी औद्योगिक विकास होगा।
स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा।
इसके साथ-साथ सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं भी सुधरेंगी।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम देश के औद्योगिक नक्शे को बदल सकता है।
आज तक महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्य औद्योगिक हब माने जाते रहे हैं।
लेकिन आने वाले समय में उत्तर प्रदेश भी इस सूची में शामिल हो सकता है।
विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में यूपी का दबदबा बढ़ेगा।
सरकार का सपना है कि अगले 5 साल में यूपी देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स निर्माण केंद्र बने।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो आने वाले 10 वर्षों में भारत चीन को कड़ी टक्कर देगा।
भारत न केवल आत्मनिर्भर होगा बल्कि निर्यात भी करेगा।
और इस क्रांति की शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी।
👉 तो यह थी एक विस्तृत रिपोर्ट,
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि “यूपी अब केवल उपभोक्ता राज्य नहीं रहेगा, बल्कि उत्पादन और निर्यात का बड़ा केंद्र बनेगा।”
टीवी, मोबाइल और लैपटॉप कंपोनेंट्स का निर्माण उत्तर प्रदेश में होगा।
50 हज़ार करोड़ का निवेश आएगा।
लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा।
और भारत आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाएगा।