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नेपाली कांग्रेस का दावा – पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को मिल सकता है नेतृत्व, राष्ट्रपति पौडेल ने रातों-रात लिया बड़ा फैसला
नेपाल की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। तख़्तापलट और सरकार बदलने की स्थिति के बीच नेपाली कांग्रेस ने पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की के नाम पर सहमति जताई है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने आधी रात को लंबी चर्चाओं और संवैधानिक विचार-विमर्श के बाद कार्की को नेतृत्व सौंपने का संकेत दिया है।
पृष्ठभूमि
नेपाल इस समय राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। मौजूदा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं। सत्ता संघर्ष और जनता में बढ़ते असंतोष के बीच देश में व्यापक आंदोलन खड़ा हो गया है। इसी माहौल में नेपाली कांग्रेस ने सुशीला कार्की का नाम आगे बढ़ाया है।
सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं और उनकी छवि एक ईमानदार, सख़्त और निष्पक्ष न्यायविद के रूप में जानी जाती है। पार्टी का मानना है कि इस समय देश को एक ऐसे नेतृत्व की ज़रूरत है, जिस पर जनता भरोसा कर सके।
प्रदर्शन और हालात
राजधानी काठमांडू समेत नेपाल के कई हिस्सों में जनता सड़कों पर है।
अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 1300 से अधिक लोग घायल हैं।
विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोग सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और महंगाई को लेकर नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं।
जगह-जगह कर्फ्यू जैसे हालात हैं और सुरक्षा बलों को चौकसी बढ़ानी पड़ी है।
नेपाली कांग्रेस की रणनीति
वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने यह दावा किया है कि राष्ट्रपति पौडेल सुशीला कार्की को अंतरिम नेतृत्व सौंपने के पक्ष में हैं। इससे देश में अस्थायी स्थिरता लाई जा सकती है और जल्द ही चुनाव की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।
कांग्रेस का मानना है कि इस कदम से जनता का भरोसा फिर से बहाल होगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकेगा।
अन्य घटनाक्रम
गोरखपुर से जुड़ी खबर: नेपाल से गोरखपुर आने वाले व्यापारियों का लगभग 20 करोड़ रुपये का माल फँस गया है। सीमा बंद होने और अफरा-तफरी के कारण 50 से अधिक ट्रक नेपाल में रुके हुए हैं।
पर्यटन पर असर: दशरथ स्टेडियम और अन्य ऐतिहासिक स्थलों पर आए विदेशी पर्यटक आंदोलन और हिंसा के कारण असहज महसूस कर रहे हैं। कई पर्यटकों को बाहर निकलने में दिक़्क़त हो रही है।
आगे की राह
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वास्तव में सुशीला कार्की को अंतरिम नेतृत्व सौंपा जाता है, तो यह नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास का अभूतपूर्व कदम होगा। यह पहली बार होगा जब कोई पूर्व मुख्य न्यायाधीश देश की राजनीति की बागडोर संभालेगा।
हालांकि, हालात अभी नाज़ुक हैं। संसद की कार्यवाही रुकी हुई है और विपक्षी दलों के बीच गहन वार्ताएँ चल रही हैं। आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीति किस दिशा में जाएगी, यह देखने वाली बात होगी।
👉 यह खबर बताती है कि नेपाल राजनीतिक उथल-पुथल के बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है और सुशीला कार्की का नाम इस संकट से निकलने की संभावित कुंजी माना जा रहा है।
