स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो शादी के रिश्ते में न बंधें
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, शादीशुदा युगल यह नहीं कह सकते कि वे एक-दूसरे पर निर्भर नहीं रहना चाहते
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक रिश्ते में कोई पुरुष या स्त्री यह नहीं कह सकते कि वे अपने साथी पर निर्भर नहीं रहना चाहते। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा, अगर कोई स्वतंत्र रहना चाहता है, तो उसे विवाह नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने कहा, कोई भी विवाहिता जोड़ा यह नहीं कह सकता कि वह विवाह के दौरान दूसरे साथी से मुक्त रहना चाहता है। यह असंभव है। विवाह का क्या अर्थ है, दो इंसानों या व्यक्तियों का एकसाथ आना। आप स्वतंत्र कैसे हो सकते हैं?
कोर्ट यह टिप्पणी तब कर रहा था, जब एक दंपती का मामला सुन रहा था, जिसके दो नाबालिग बच्चे हैं। सुनवाई के दौरान पत्नी ने कहा, वह किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहती।
पीठ ने कहा, अगर दंपती साथ आ जाते हैं, तो हमें खुशी होगी क्योंकि बच्चे बहुत छोटे हैं। उनका क्या कसूर है कि टूटा हुआ घर मिले? मामले सुलझाने का आग्रह करते हुए पीठ ने कहा, हर पति-पत्नी का आपस में विवाद होता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट ने यह भी पत्नी से कहा, हम एक साथ यह तालियां नहीं बजा सकते, हम दोनों की मदद कर रहे हैं।
महिला ने दावा किया कि उसका पति, जो सिंगापुर में है और अभी भारत में है, मामला सुलझाने के लिए तैयार नहीं है। बच्चों से मिलने के बहाने कस्टडी चाहता है। हैदराबाद निवासी पत्नी से पीठ ने पूछा, आप सिंगापुर क्यों नहीं लौट सकती? पत्नी ने कहा, नौकरी की वजह से वह मुश्किलों में रही है। नौकरी की जरूरत पर पत्नी ने महिला ने दावा किया, अस्वस्थ होने के बाद उसे कोई गुजारा भत्ता नहीं मिला।
कोर्ट ने कहा, आप यह नहीं कह सकतीं
कोर्ट ने कहा, आप यह नहीं कह सकतीं कि आपकी शादी हो जाने के बाद भी आप भगवानरामपुरुष में और अन्य जातियों की तरह बातें करें। पत्नी में आर्थिक तौर पर निर्भर हो जाती है। पति में आर्थिक तौर पर निर्भर हो जाता है। कोई भी यह नहीं कह सकता कि मैं किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहता। फिर आपने शादी क्यों की? शादीशुदा युगल यह नहीं कह सकते कि पति पर निर्भर नहीं रहना चाहती या पत्नी पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
