अंतरराष्ट्रीय चोर गिरोह का पर्दाफाश: 8 लोगों की गिरफ्तारी, 15 घरों से करोड़ों की चोरी का खुलासा
उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह पिछले एक माह से अलग-अलग जिलों में सक्रिय था और अब तक 15 से अधिक घरों में सेंध लगाकर करोड़ों रुपये नकद और कीमती जेवरात उड़ा चुका था। पुलिस की जांच में जो खुलासा हुआ, उसने सभी को चौंका दिया। चोरी का माल खरीदने में संत कबीर नगर के प्रसिद्ध सर्राफा व्यापारी और उसका पुत्र भी शामिल निकले।
इस पूरी कार्रवाई में पुलिस ने कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से चोरी के जेवरात, नकदी, विदेशी मुद्रा और उपकरण बरामद किए गए हैं। आइए जानते हैं इन आठों आरोपियों के बारे में विस्तार से—
- गिरोह का मास्टरमाइंड – शकील अहमद
शकील अहमद इस गिरोह का सरगना है। मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला शकील चोरी की रणनीति बनाने और टीम को अलग-अलग इलाकों में भेजने का काम करता था। उसके पास अंतरराष्ट्रीय संपर्क थे, जिनके जरिए चोरी का माल नेपाल और दुबई तक भेजा जाता था। पुलिस के अनुसार, शकील पर पहले से भी कई मुकदमे दर्ज हैं और यह लंबे समय से फरार चल रहा था।
- टेक्निकल एक्सपर्ट – रमेश उर्फ राजा
रमेश गिरोह का तकनीकी एक्सपर्ट माना जाता है। वह घरों की तालेबंदी तोड़ने और सीसीटीवी कैमरों को निष्क्रिय करने में माहिर था। पुलिस को उसके पास से आधुनिक उपकरण मिले हैं, जिनमें वायर कटर, ड्रिल मशीन और ताले काटने वाले औजार शामिल हैं। रमेश पहले एक इलेक्ट्रिशियन था, लेकिन बाद में अपराध की दुनिया में उतर गया।
- ट्रांसपोर्टर – हसन उर्फ बबलू
हसन का काम चोरी के सामान को सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाना था। उसके पास खुद की गाड़ियां थीं जिनमें वह नकली नंबर प्लेट लगाकर चोरी के माल को अलग-अलग जिलों और राज्यों तक पहुंचाता था। पुलिस का कहना है कि हसन अंतरराष्ट्रीय रूट से भी जुड़ा हुआ था और सीमा पार तक माल पहुंचाने का काम करता था।
- नेपाली कनेक्शन – राजू थापा
राजू थापा नेपाल का रहने वाला है और गिरोह का अंतरराष्ट्रीय लिंक था। उसका काम चोरी के जेवरात को नेपाल ले जाकर वहां के काले बाजार में खपाना था। कई बार चोरी का माल नेपाल के रास्ते दुबई और मलेशिया तक पहुंचाया गया। राजू लंबे समय से भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय था और पुलिस की निगाहों से बचा हुआ था।
- स्थानीय मददगार – अनिल यादव
अनिल यादव का काम गिरोह को स्थानीय स्तर पर मदद करना था। वह इलाके में घरों का रैकी करता और चोरी के लिए सही जगह की पहचान करता था। इसके बदले उसे हर चोरी से हिस्सा मिलता था। पुलिस का कहना है कि अनिल कई बार घरों में नौकर बनकर भी जानकारी इकट्ठा करता था।
- सर्राफा व्यापारी – रमाकांत सोनी
संत कबीर नगर का यह प्रसिद्ध सर्राफा व्यापारी चोरी के माल को खरीदने में शामिल था। वह चोरी के सोने-चांदी को अपने व्यापार में मिलाकर बेच देता था, जिससे चोरी का सामान कानूनी लगने लगता। पुलिस का कहना है कि बिना रमाकांत की मदद के गिरोह इतना बड़ा खेल कभी नहीं कर सकता था।
- व्यापारी का पुत्र – अजय सोनी
अजय सोनी अपने पिता रमाकांत का हाथ बंटाता था। उसका काम चोरी के गहनों को पिघलाकर नया रूप देना और फिर ग्राहकों को बेचना था। पुलिस ने अजय के पास से बड़ी मात्रा में सोने के जेवर बरामद किए हैं। अजय ने पुलिस पूछताछ में कबूल किया है कि पिछले एक माह में उसने गिरोह से करीब 2 करोड़ रुपये के जेवर खरीदे थे।
- गिरोह का फाइनेंसर – फैजान अली
फैजान गिरोह का फाइनेंसर था। उसका काम चोरी की योजना के लिए पैसों की व्यवस्था करना, हथियार और उपकरण खरीदना और जरूरत पड़ने पर गिरोह के सदस्यों को कानूनी मदद दिलाना था। फैजान पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी शक है और पुलिस उसकी संपत्ति की जांच कर रही है।
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
पुलिस ने इन 8 आरोपियों के पास से करीब 4 करोड़ रुपये के गहने और नकदी बरामद की है।
चोरी में इस्तेमाल की गई गाड़ियां, मोबाइल फोन और उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
जांच में पता चला है कि गिरोह चोरी के माल को तीन हिस्सों में बांटता था – एक हिस्सा मास्टरमाइंड और फाइनेंसर का, दूसरा हिस्सा गिरोह के सदस्यों में और तीसरा हिस्सा सर्राफा व्यापारियों के पास।
लोगों में राहत
पिछले एक महीने में लगातार हो रही चोरी से लोग दहशत में थे। अब गिरोह के पकड़े जाने के बाद लोगों में राहत की भावना है। पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए गैंगस्टर एक्ट और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
👉 इस तरह, पुलिस ने न केवल एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय चोरी के नेटवर्क को भी तोड़ने में सफलता पाई।