गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कल्याण पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन
दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से गीता प्रेस की प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस दौरान कल्याण पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन कराने का अनुरोध किया गया। कल्याण पत्रिका गीता प्रेस, गोरखपुर की प्रसिद्ध मासिक पत्रिका है, जिसमें सनातन संस्कृति, धर्म, आध्यात्म और सामाजिक उत्थान की सामग्री प्रकाशित होती है। वर्ष 2026 में पत्रिका के प्रकाशन के सौ वर्ष पूरे होने जा रहे हैं और इसी अवसर पर शताब्दी अंक, यानी 1000वां विशेषांक, प्रकाशित किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न विद्वानों, वैज्ञानिकों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के वैचारिक लेख शामिल होंगे। पत्रिका का शताब्दी अंक देश-विदेश के पाठकों के लिए महत्त्वपूर्ण रहेगा, जिसमें समाज एवं धर्म की दिशा देने वाले विषयवस्तु को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस प्रसंग में गीता प्रेस के प्रबंधक, लालमणि त्रिपाठी ने बताया कि पत्रिका के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हरिद्वार में 20 से 22 जनवरी 2026 को तीन दिवसीय आयोजन किया जाएगा। इसमें देश के जानेमाने संत, विचारक, धर्माचार्य, साहित्यकार, वैज्ञानिक और समाजसेवी सहभागिता करेंगे। आयोजन में पत्रिका के ऐतिहासिक योगदान को प्रस्तुत किया जाएगा और भारतीय संस्कृति के विश्व पटल पर संदेश को प्रचारित किया जाएगा। गीता प्रेस प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से त्रिपाठी, सम्पादक राधेश्याम, सहायक संपादक श्यामसुंदर, व्यवस्थापक रामनाथ, प्रो. गिरधारीलाल व अन्य अधिकारी सम्मिलित रहे। गृह मंत्री ने शताब्दी अंक के विमोचन को लेकर सहमति जताई और आयोजन की उपयोगिता की सराहना की। इस आयोजन के अन्तर्गत कई ज्ञानवर्धक संगोष्ठियाँ सम्मिलित रहेंगी और पत्रिका के ऐतिहासिक दस्तावेज भी प्रदर्शित किए जाएंगे।
कार्यक्रम के आयोजक मंडल ने यह भी घोषणा की है कि आयोजन में कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता है, इसके लिए पूर्व सूचना मात्र देना आवश्यक है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक भारतीय संस्कृति और मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना है। शताब्दी महोत्सव में गीता प्रेस के ऐतिहासिक योगदान, पत्रिका के प्रसार, पाठकों की भावनाओं, संतों के उपदेश, वैज्ञानिकों और समाज सुधारकों के विचारों पर विशेष चर्चा होगी। आयोजन को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए गीता प्रेस ने देश के समस्त प्रमुख धार्मिक संगठनों, सनातन धर्म प्रचारक संस्थाओं, साहित्यकारों और वैज्ञानिक विचारकों के सहयोग की आकांक्षा जताई। इस अवसर पर पत्रिका के मूल्य, सामग्री और सामाजिक योगदान के बारे में रिपोर्ट और प्रस्तुति दी जाएगी।
पीडब्ल्यूडी कार्यालय विवाद की घटना
दूसरी खबर के अनुसार, पीडब्ल्यूडी कार्यालय में जई और ठेकेदारों के बीच तीव्र झगड़े की घटना सामने आई, जिससे कार्यलय का माहौल तनावग्रस्त हो गया। घटना की शुरुआत ठेकेदारों द्वारा बीआईपी ड्यूटी में घोटाले और भुगतान में गड़बड़ी के आरोप से हुई। उनका दावा था कि भुगतान प्रक्रिया में अनियमितता बरती जा रही है और फाइलें रोक कर मनमाना व्यवहार किया जा रहा है। इसी बहस में दोनों पक्षों के बीच मारपीट, गाली-गलौज हो गई और एक इंजीनियर की शर्ट फाड़ दी गई। मामला इतना बढ़ गया कि अन्य कर्मचारी भयभीत हो गए और कामकाज बाधित हो गया।
पुलिस को सूचना मिलते ही मौके पर आना पड़ा। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत करने की कोशिश की, किंतु जब विवाद नहीं सुलझा, तो दोनों पक्षों को थाने ले जाया गया। वहां दोनों के बयान दर्ज किए गए और जांच शुरू की गई। ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023-24 के भुगतान में गलत कटौती की गई तथा अधिकारी मनमाने ढंग से ठेकों का निपटान कर रहे हैं। दूसरी ओर जई ने स्पष्ट कहा कि आरोप निराधार हैं, फाइलें नियम के अनुसार चली हैं और किसी प्रकार की व्यक्तिगत लाभ के लिए प्रक्रिया नहीं हुई।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों की निगरानी में जांच कराई जा रही है। दोषियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए दोनों पक्षों के ठोस साक्ष्य लिए जाएंगे। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित विभागीय एवं कानूनी कार्यवाही की जाएगी। इस घटना के बाद पीडब्ल्यूडी कार्यालय में कर्मचारियों व अधिकारियों में असंतोष और चिंता का माहौल है, साथ ही विभाग में पारदर्शिता और सही प्रक्रिया पर समाज का ध्यान केंद्रित हुआ है।
दोनों घटनाओं का सामाजिक और प्रशासनिक महत्व
पहली खबर देश के धार्मिक, सांस्कृतिक और समाज सुधारक आयाम को उजागर करती है। गीता प्रेस द्वारा कल्याण पत्रिका के सौ वर्षों के योगदान और शताब्दी अंक के आयोजन से भारत की आध्यात्मिक धरोहर और संस्कृति के प्रसार को नई दिशा मिलेगी। गृह मंत्री के हाथों विमोचन से इसकी विशिष्टता और महत्व बढ़ जाता है। ऐसे आयोजनों से समाज को मूल्यों, विचारों और संस्कृति की जानकारी मिलती है, जो पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनती है।
दूसरी खबर सरकारी विभागों में कार्यपद्धति, पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे को सामने रखती है। पीडब्ल्यूडी कार्यालय में विवाद से पता चलता है कि भ्रष्टाचार, मनमानी और अनुचित व्यवहार पर नियंत्रण जरूरी है। यह घटना समाज को जागरूक करती है कि प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए, जिससे जनकल्याण योजनाओं का सही लाभ पहुंचे। ठेकेदारों और अधिकारियों की गुटबंदी, आरोप-प्रत्यारोप जनसामान्य की सुविधाओं को बाधित करते हैं।
इन दोनों घटनाओं का मूल संदेश यही है कि देश की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित और प्रचारित करना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण प्रशासनिक ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही का पालन करना है, जिससे समाज में विश्वास और समरसता बढ़े।
