राप्ती नदी किनारे डूब क्षेत्र में पेट्रोल पंप पर विवाद
यह समाचार “राप्ती के किनारे डूब क्षेत्र में पेट्रोल पंप खोलने पर एनजीटी सख्त” शीर्षक से प्रकाशित हुआ है। आइए इसे विस्तार से लिखते हैं:
राप्ती नदी किनारे डूब क्षेत्र में पेट्रोल पंप पर विवाद
गोरखपुर:
राप्ती नदी के किनारे डूब क्षेत्र में खोले गए पेट्रोल पंप को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने इस मामले में सभी पक्षों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।
यह मामला गंभीर इसलिए है क्योंकि नदी के किनारे पेट्रोल पंप बनने से बाढ़ और पर्यावरणीय खतरों की आशंका बढ़ जाती है।
पृष्ठभूमि
- पहले भी इस पर आपत्ति जताई गई थी।
- गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने 16 मार्च 2024 को ही इस पेट्रोल पंप को सील कर दिया था।
- इसके बावजूद संचालन को लेकर विवाद बना हुआ है।
सुनवाई और आपत्ति
- एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2024 को तय की है।
- आपत्ति दर्ज करने वालों ने कहा है कि नदी किनारे पेट्रोल पंप खोलना खतरनाक है।
- रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल पंप डूब क्षेत्र में स्थित है और बाढ़ प्रभावित इलाके में आता है।
शिकायत और रिपोर्ट
- स्थानीय लोगों ने एनजीटी को दी शिकायत में कहा कि
- पेट्रोल पंप उस जगह पर खोला गया है, जहाँ हर साल बाढ़ का पानी आता है।
- यहाँ पर निर्माण प्रतिबंधित है।
- संबंधित भूमि का भू-उपयोग प्रमाण पत्र भी नहीं दिया गया है।
- उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल शक्ति विभाग की संयुक्त टीम ने 21 जून 2024 को निरीक्षण कर रिपोर्ट दी थी।
- रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि पेट्रोल पंप नदी के बहुत नजदीक है और पर्यावरण नियमों के विपरीत है।
पक्षकार
- इस पूरे मामले में
- भारतीय पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल),
- पेट्रोल पंप संचालक आलोक नाथ कुरेशी,
- और अन्य संबंधित विभागों को एनजीटी ने नोटिस भेजा है।
- एनजीटी की पीठ (न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति श্রীकांत और विशेषज्ञ सदस्य अफ़ताब आलम) इस मामले की सुनवाई करेगी।
