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किसानों के हितों से नहीं करेंगे समझौता
विदेश मंत्री ने कहा, राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर करेंगे फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। टैरिफ विवाद और रूस से तेल खरीदने को लेकर चल रहे तनाव के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में भारत की कुछ सीमाएँ हैं। भारत किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “हम राष्ट्रीय हित एवं रणनीतिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखकर ही भारत ऊर्जा से जुड़े मुद्दों का समाधान करेंगे, किसी दबाव में नहीं आएंगे।” हालांकि विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों में कटुता (झगड़ा) नहीं है, व्यापार समझौते पर वार्ता जारी है।
जयशंकर ने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि व्यापारिक वार्ताओं के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा हमारे लिए किसानों का ही है। मुख्य रूप से देश के किसानों और कुछ तक छोटे उत्पादकों के हितों से जुड़ा हुआ है। इसलिए यह उम्मीद करना कि हम समझौता कर लेंगे, यह सही नहीं होगा। उन्होंने साफ कहा कि सरकार कभी भी अपने किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों के साथ समझौता नहीं करेगी। हम पर पूरी तरह से साफ है कि ऐसे मसले नहीं हैं, जिन पर हम समझौता कर सकें।
विपक्ष एवं आलोचकों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई असहमत है, तो उन्हें साफ बताना चाहिए कि वे किसानों के हित का बलिदान क्यों चाहते हैं। अगर वे राष्ट्रीय हित और रणनीतिक स्वतंत्रता को स्वीकार नहीं करते, तो उन्हें साफ करना चाहिए।
पाकिस्तान से रिश्तों पर मध्यस्थता स्वीकार नहीं
विदेश मंत्री ने कहा, भारत पाकिस्तान से अपने संबंधों और कश्मीर पर किसी तीसरे पक्ष या देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता। 50 से अधिक वर्षों से यह राष्ट्रीय सहमति रही है कि भारत और पाकिस्तान के बीच मसले द्विपक्षीय ही हल होंगे। अमेरिका और अन्य देशों को भी यह स्पष्ट कर दिया गया है। जैसे हमने इजरायल-ईरान या रूस-यूक्रेन मसले पर दखल देने का प्रयास नहीं किया, उसी तरह भारत और पाकिस्तान के मसले भी द्विपक्षीय हैं।
रूसी तेल पर दो टूक: जिन्हें दिक्कत… भारत से वह तेल न खरीदें, हम मजबूर नहीं करते
विदेश मंत्री ने ट्रंप प्रशासन की ओर से रूसी तेल को सस्ते दाम पर बेचने के आरोपों पर कहा, यह हास्यास्पद है कि व्यापार समर्थक अमेरिकी प्रशासन के लोग दूसरों पर व्यापार का आरोप लगा रहे हैं। यह वास्तव में अजीब है।
जयशंकर ने कहा, अगर आपको भारत से तेल या पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने में दिक्कत है, तो उसे न खरीदें। लेकिन आपको खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर रहा, दूसरे खरीद रहे हैं। अमेरिका खरीदता है, यूरोप भी खरीद रहा है। अगर वे भारत विरोधी तेल पर प्रतिबंध लगाते हैं, तो भारत पेट्रोलियम उत्पादों को दूसरे बाजारों में बेचकर मुनाफा कमा रहा है।
अमेरिका लगातार दबाव डाल रहा है कि भारत पर यूरोपीय, ऑस्ट्रेलियाई और मकसद, सोयाबीन, गोमांस, मेडिकल उपकरण और उच्च तकनीक उत्पादों के लिए बाजार खोले। अमेरिका चाहता है कि भारत अपना बाजार खोले और आयात बढ़ाए, लेकिन भारत ने इसे साफ इंकार कर दिया है।