जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राधाकृष्णन को देश का 17वां उपराष्ट्रपति चुना गया है। शनिवार को हुए चुनाव में उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को बड़े अंतर से पराजित किया। राधाकृष्णन को कुल 452 मत मिले, जबकि रेड्डी को केवल 300 मत प्राप्त हुए। इसके अलावा 15 मत अमान्य घोषित कर दिए गए।
चुनाव परिणाम
कुल मतदाता : 785
डाले गए वोट : 781
वैध वोट : 752
राधाकृष्णन को : 452 वोट
सुदर्शन रेड्डी को : 300 वोट
अमान्य वोट : 15
इस प्रकार राधाकृष्णन को विपक्षी उम्मीदवार से 152 मत अधिक मिले। जीत सुनिश्चित करने के लिए 377 मतों की आवश्यकता थी, जबकि उन्हें 452 वोट हासिल हुए यानी 75 मत अतिरिक्त मिले।
भाजपा ने विपक्षी खेमे में भी बनाई सेंध
गौर करने वाली बात यह रही कि राधाकृष्णन को विपक्ष के 15 सांसदों ने भी वोट दिया। यह भाजपा की रणनीतिक सफलता मानी जा रही है। भाजपा के साथ-साथ एनडीए के घटक दलों और कुछ विपक्षी सांसदों ने भी उनका समर्थन किया।
प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामनाएं
चुनाव परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राधाकृष्णन को पुष्पगुच्छ भेंट कर बधाई दी। उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन अपनी सादगी, समर्पण और सेवा भावना के कारण उत्कृष्ट उपराष्ट्रपति साबित होंगे।
मतगणना और विवाद
चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। हालांकि मतगणना के दौरान कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा ने उनके खेमे में सेंध लगाई और क्रॉस वोटिंग कराई। विपक्षी खेमे के कुल 334 वोट होने चाहिए थे, लेकिन उनके उम्मीदवार रेड्डी को केवल 300 वोट मिले। इसका मतलब है कि लगभग 34 वोट भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में चले गए।
उपराष्ट्रपति के रूप में भूमिका
राधाकृष्णन अब भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्यभार संभालेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि उनके मार्गदर्शन में सदन की कार्यवाही और भी अनुशासित और प्रभावी होगी।
विपक्षी उम्मीदवार की प्रतिक्रिया
सुदर्शन रेड्डी ने हार स्वीकारते हुए कहा कि यह लोकतंत्र का फैसला है। उन्होंने राधाकृष्णन को शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि वे सभी दलों को साथ लेकर चलेंगे।
निष्कर्ष
इस चुनाव में भाजपा ने न केवल अपनी ताकत साबित की बल्कि विपक्षी खेमे में सेंध लगाकर अपनी रणनीतिक पकड़ भी मजबूत दिखाई। राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति चुना जाना भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है और आने वाले दिनों में राज्यसभा की कार्यवाही पर भी इसका प्रभाव साफ दिखाई देगा।