📰 बड़ी ख़बर | समाज में ऊँच-नीच भगवान ने नहीं बनाई, पंडितों ने गढ़ी – मोहन भागवत
मुंबई : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को मुंबई में संत रोहिदास (रविदास) जयंती पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि समाज में ऊँच-नीच की व्यवस्था भगवान ने नहीं बनाई है, बल्कि पंडितों ने बनाई है।
भागवत ने साफ़ कहा कि –
👉 “हमारे समाज का बंटवारा दूसरों के लिए फ़ायदे का कारण बन गया।”
👉 “काम कोई छोटा-बड़ा नहीं होता, हर काम समाज के लिए ज़रूरी है।”
👉 “श्रम और श्रमिकों का सम्मान न करने की वजह से देश में बेरोज़गारी और असमानता बढ़ी है।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इस्लामी आक्रमण से पहले भारत आत्मनिर्भर था। हमारी जीवनशैली, परंपराएँ और विचार मज़बूत थे, लेकिन समाज में फैले भेदभाव का लाभ विदेशी ताक़तों ने उठाया।
भागवत ने कबीर और संत रविदास का ज़िक्र करते हुए कहा कि संतों ने हमेशा जातिगत भेदभाव का विरोध किया और समाज को एकता का संदेश दिया।
🔴 भागवत का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पहली बार RSS प्रमुख ने खुलकर कहा कि ऊँच-नीच की व्यवस्था धार्मिक नहीं बल्कि मानवनिर्मित है।
⚡ विश्लेषण (फिशरमैन ओल्ड न्यूज़ की नज़र से):
- भागवत ने जातिगत ऊँच-नीच को भगवान से नहीं, बल्कि पंडितों की बनाई व्यवस्था से जोड़ा।
- समाज में असमानता की वजह से भारत की ताक़त कमज़ोर हुई और विदेशी हावी हो गए।
- यह बयान दलित-पिछड़े समाज के लिए बड़ा सन्देश है, क्योंकि उन्होंने संत रविदास और कबीर की शिक्षाओं को आधार बनाया।
- सवाल यह भी है कि क्या अब RSS जाति-व्यवस्था को सुधारने के ठोस क़दम उठाएगा या यह महज़ बयानबाज़ी है।
🖋️ फिशरमैन ओल्ड न्यूज़ की रिपोर्ट
👉 साफ़ है कि अगर समाज को मज़बूत बनाना है तो जात-पात की दीवारें गिरानी होंगी। वरना बंटवारे का फ़ायदा हमेशा बाहरी ताक़तों और सत्ता के दलालों को मिलता रहेगा।