सम्भल : हिंदू 15 फीसदी बचे, तुर्क व धर्मांतरित पठानों में संघर्ष
न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में दावा – मुस्लिम आबादी 80 से 85 फीसदी तक बढ़ी, सुनियोजित तुष्टिकरण से बदली जनसांख्यिकी, 78 साल पहले 45 फीसदी थी हिंदू आबादी
लखनऊ।
सुनियोजित दंगे और तुष्टिकरण की राजनीति ने उत्तर प्रदेश के सम्भल जनपद की जनसांख्यिकी को बदल दिया है। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 78 सालों में यहाँ हिंदू समाज 45 प्रतिशत से घटकर मात्र 15 प्रतिशत रह गया है। जबकि मुस्लिम आबादी 80 से 85 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 78 साल पहले सम्भल में हिंदू आबादी 45 प्रतिशत थी, लेकिन 1947 से 2024 तक के दौरान योजनाबद्ध तरीके से दंगों और उत्पीड़न के चलते हिंदू पलायन करते गए। वर्तमान समय में केवल 15 प्रतिशत हिंदू यहाँ शेष बचे हैं।
सात दशक में 15 दंगे, 209 हिंदू मारे गए
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले सात दशकों में सम्भल में कुल 15 बड़े दंगे हुए, जिनमें 209 हिंदुओं की मौत हो गई। आंकड़ों के अनुसार :
- 1936 से 1978 तक कुल 213 हिंसा की घटनाएँ दर्ज की गईं। इनमें 209 हिंदू मारे गए।
- 1978 से 1992 तक यह घटनाएँ और तेज हुईं।
- 1992 के बाद हालात बिगड़ते गए और हिंदुओं का पलायन और बढ़ गया।
- 2019 व 2024 के बीच फिर से सांप्रदायिक तनाव बढ़ा।
मुस्लिम गुटों में आपसी संघर्ष
रिपोर्ट में उल्लेख है कि अब सम्भल में तुर्क और धर्मांतरित पठानों के बीच संघर्ष की स्थिति भी बन गई है। आपसी वर्चस्व को लेकर अक्सर टकराव होता है।
सपा सांसद के भाषण से भड़की हिंसा
रिपोर्ट के मुताबिक सम्भल में हाल की हिंसा सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क के भाषण से भड़की थी।
24 जून को सम्भल में हुई हिंसा में कई लोग घायल हुए थे। इसमें हिंदू समाज के घरों को निशाना बनाया गया और तोड़फोड़ की गई।
आयोग ने सरकार को सुझाव दिए
न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति वेदपाल गुप्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह रिपोर्ट सौंपी।
मुख्यमंत्री के सामने रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए आयोग ने कहा कि :
- सम्भल में हिंदुओं की स्थिति बेहद दयनीय है।
- प्रशासन को विशेष कदम उठाने चाहिए।
- हिंदुओं की सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
- पीड़ित परिवारों को न्याय व मुआवजा दिया जाए।
सारांश
78 साल पहले सम्भल की पहचान मिश्रित सांस्कृतिक और धार्मिक माहौल वाले जिले के रूप में होती थी, जहाँ 45 प्रतिशत हिंदू और 55 प्रतिशत मुस्लिम आबादी थी।
लेकिन दंगों, तुष्टिकरण और योजनाबद्ध पलायन ने इसे पूरी तरह बदल दिया। आज यहाँ हिंदू 15 प्रतिशत ही रह गए हैं और मुस्लिम समाज का वर्चस्व 85 प्रतिशत तक पहुँच चुका है।