राधाकृष्णन ने ली राष्ट्रपति की शपथ
वर्तमान सन्दर्भ में राष्ट्रपति राधाकृष्णन ने 53 दिन बाद सार्वजनिक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई, जिससे देश में नई राजनीतिक संभावनाएं जन्म ले रही हैं।
शपथ ग्रहण कार्यक्रम का दृश्य
शपथ ग्रहण समारोह भव्य तरीके से आयोजित किया गया था। जिसमें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, कई केंद्रीय मंत्रीगण एवं महत्वपूर्ण सरकारी अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने गंभीरता से इस आयोजन को देखा एवं देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया। मंच पर राधाकृष्णन ने संविधान की शपथ ली और देशवासियों को निस्पक्ष, ईमानदार एवं न्यायपूर्ण प्रशासन का आश्वासन दिया।
53 दिन बाद सार्वजनिक मंच पर
53 दिन के लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रपति राधाकृष्णन की सार्वजनिक उपस्थिति और सक्रियता ने कई नई अटकलों को जन्म दिया। देश की राजनीति, प्रशासनिक कार्य और आम जनमानस में उत्साह की लहर दौड़ गई है।
2030 तक कार्यकाल
राधाकृष्णन का कार्यकाल 2030 तक निर्धारित किया गया है, जिससे लंबे समय तक उनके प्रशासन की दिशा और नीति का असर देश की राजनीति, समाज एवं अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रीमंडल के सदस्य, पूर्व राष्ट्रपति, शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी, सेना के अधिकारी, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, नागरिक समाज के प्रतिनिधि आदि कार्यक्रम में उपस्थित रहे। समारोह की भव्यता और गरिमा सबके नजरों में थी।
महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर की प्रेरणा
राधाकृष्णन ने शपथ के दौरान महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर की शिक्षा और विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय, और समानता की बात की। उनकी भाषा में क्षणिक भावुकता और भविष्य मिशन का नजारा था।
भविष्य की दिशा
राष्ट्रपति के तौर पर राधाकृष्णन का प्रशासन पारदर्शिता, सुशासन, समावेशिता, और ईमानदारी की दिशा में आगे बढ़ेगा। देश में सामाजिक समरसता, समान अधिकार, और आर्थिक सुरक्षा का वातावरण बनाना उनका मुख्य उद्देश्य बताया गया है।
इस विस्तार में, अत्यंत विश्लेषणक्षम एवं प्रगतिशील दृष्टिकोण से घटनाओं को प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक बिंदु समाज, राजनीति, प्रशासन, और राष्ट्रीय चेतना के साथ जोड़ते हुए आगे बढ़ा है। फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़