नेपाल की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आया है। काठमांडू से आई ताज़ा खबरों के मुताबिक नेपाल में तख़्तापलट हो गया है। देश की सत्ता पूरी तरह हिल गई है और हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। राजधानी में हिंसक प्रदर्शन और आगजनी ने लोकतंत्र की नींव को झकझोर दिया है।
संसद भवन और सरकारी इमारतों में आग
काठमांडू स्थित संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट और कई सरकारी इमारतों में प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी। चारों ओर धुआं और अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। गुस्साए लोगों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रियों के घरों पर भी पथराव किया। हालात इतने बिगड़ गए कि सुरक्षा बलों को भीड़ पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
ओली और कई मंत्रियों ने दिया इस्तीफा
नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने भारी दबाव और हालात बिगड़ने के बाद इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ ही कैबिनेट के कई मंत्रियों ने भी पद छोड़ दिया है। सरकार पर भ्रष्टाचार, तानाशाही रवैये और जनता की आवाज़ दबाने के आरोप लंबे समय से लग रहे थे। इस असंतोष ने आखिरकार बड़े बवाल का रूप ले लिया।
नेताओं और परिवारों पर हमले
खबरों के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री देउबा और उनकी पत्नी पर भी भीड़ ने हमला किया। वित्त मंत्री को भी प्रदर्शनकारियों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। कई वरिष्ठ नेताओं के घरों और कार्यालयों को पूरी तरह तोड़फोड़ कर दिया गया। हालात इस कदर बिगड़े कि पुलिस और सेना को मिलकर मोर्चा संभालना पड़ा।
जेलों और थानों पर हमला
भीड़ का गुस्सा सिर्फ संसद और नेताओं तक ही सीमित नहीं रहा। राजधानी और आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने जेलों और थानों पर धावा बोला, कैदियों को रिहा कर दिया। हथियारों की भी लूटपाट की खबरें आई हैं।
देशभर में अलर्ट
नेपाल के हालात को देखते हुए सेना ने पूरे देश में अलर्ट जारी कर दिया है। सातों प्रांतों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। जगह-जगह सेना की तैनाती की गई है और इंटरनेट सेवाओं पर भी असर पड़ा है।
पूर्व प्रधानमंत्री लमिछाने की बड़ी भूमिका
खबरों के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री रवि सिंह लमिछाने इस पूरे आंदोलन और तख्तापलट के पीछे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने जनता के असंतोष को उकसाया और सत्ता के खिलाफ माहौल तैयार किया। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि वे सिर्फ भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ लड़ रहे हैं।
नतीजा
नेपाल इस समय एक बड़े राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है। लोकतंत्र की जड़ों पर गंभीर चोट पहुंची है। सरकार गिर चुकी है, मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है और जनता सड़कों पर है। आगे की राह कठिन दिख रही है और यह कहना मुश्किल है कि आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीति किस दिशा में जाएगी।